पूर्णिया विवि के डीएस और फारबिसगंज कॉलेज के बीएड विभागों में शिक्षकों का अकाल, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप

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फोटो कैप्शन, कटिहार, डीएस कॉलेज का बीएड विभाग | Prabhat Khabar Network

डीएस कॉलेज का बीएड विभाग | Prabhat Khabar Network

पूर्णिया विश्वविद्यालय के दो प्रमुख कॉलेजों में बीएड विभागों में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के मानकों का गंभीर उल्लंघन सामने आया है. शिक्षकों की भारी कमी के चलते छात्रों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और फीस वसूली पर सवाल उठ रहे हैं. संघर्ष समिति ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी है.

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पूर्णिया विश्वविद्यालय के अधीन संचालित दो अंगीभूत महाविद्यालयों—डीएस कॉलेज कटिहार और फारबिसगंज कॉलेज फारबिसगंज के बीएड विभागों में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के मानकों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है. पर्याप्त शिक्षकों के अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न मिलने और छात्रों से पूरा शुल्क वसूले जाने को लेकर ‘पूर्णिया विवि बनाओ संघर्ष समिति’ के संस्थापक डॉ. आलोक राज ने कुलपति को ईमेल के जरिए आवेदन भेजकर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

निर्धारित संख्या से आधे से भी कम शिक्षक कार्यरत

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि दोनों अंगीभूत कॉलेजों में बीएड पाठ्यक्रम 'स्ववित्त पोषित' (Self-Financed) योजना के तहत चलाया जा रहा है. विगत कई वर्षों से इन संस्थानों में एनसीटीई द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप सहायक प्राध्यापकों की भारी कमी है.

वर्तमान में आवश्यक शिक्षकों की तुलना में आधे से भी कम शिक्षक कार्यरत हैं. एनसीटीई द्वारा निर्धारित शिक्षक संख्या और शैक्षणिक मानक कोई औपचारिक दिशा-निर्देश नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण-प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य वैधानिक शर्तें हैं. इनका पालन न होना सीधे तौर पर मान्यता की शर्तों का उल्लंघन है.

छात्रों के साथ हो रहा आर्थिक और शैक्षणिक अन्याय

डॉ. आलोक राज ने बताया कि सीमांचल क्षेत्र के अधिकांश विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं. छात्र अपने परिवार की जीवनभर की जमा पूंजी या बैंक ऋण लेकर लगभग डेढ़ लाख रुपये तक की फीस जमा करते हैं.

इस भारी-भरकम फीस के बावजूद जब उन्हें निर्धारित संख्या में शिक्षक, जरूरी शैक्षणिक संसाधन और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण नहीं मिलता, तो यह उनके साथ गंभीर आर्थिक और शैक्षणिक अन्याय है.

एक सप्ताह का अल्टीमेटम, उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि आवेदन प्राप्ति के एक सप्ताह के भीतर स्थिति में सुधार नहीं हुआ या प्रभावी कार्रवाई शुरू नहीं की गई, तो वे इस पूरे प्रकरण के साक्ष्यों के साथ एनसीटीई, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), राजभवन, बिहार सरकार के शिक्षा विभाग और सक्षम न्यायालय का रुख करेंगे.

छात्रों के संवैधानिक एवं शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय (High Court) में याचिका भी दायर की जाएगी.

विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष

मामले पर पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अखिलेश कुमार ने कहा कि फारबिसगंज कॉलेज और डीएस कॉलेज के बीएड विभागों में स्वीकृत सीटों के अनुरूप रिक्त शिक्षकों की जानकारी पत्राचार के माध्यम से मांगी गई है.

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से नियमानुसार शिक्षकों की नियुक्ति का प्रयास किया जा रहा है. जल्द ही इस विषय पर बैठक आयोजित कर समस्या का समाधान निकाला जाएगा.


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