नगर निगम क्षेत्र में आम रास्ते के अतिक्रमण पर हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, SDM और अदालत के आदेश बेअसर

अतिक्रमित आम रास्ते पर किया गया अवैध निर्माण | Prabhat Khabar Network
कटिहार नगर निगम में आम रास्ते पर अवैध कब्जे का मामला प्रशासनिक और न्यायिक आदेशों को ठेंगा दिखा रहा है. पटना हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटा है, जिससे स्थानीय लोग मुश्किल में हैं.
कटिहार नगर निगम अंतर्गत वार्ड संख्या 21 (विजयनगर) में आम रास्ते पर अवैध कब्जे को लेकर प्रशासनिक और न्यायिक आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) कटिहार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय और पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) के स्पष्ट आदेशों एवं नोटिसों के बावजूद अब तक अतिक्रमण मुक्त कार्रवाई नहीं की जा सकी है. प्रशासन की इस शिथिलता से स्थानीय पीड़ित भुखमरी और आवागमन के भारी संकट से जूझ रहे हैं.
क्या है पूरा विवाद?
प्राप्त विवरण के अनुसार, विजयनगर निवासी अंबिका प्रसाद जायसवाल (पिता: कुलदीप प्रसाद जायसवाल) और प्रदीप कुमार लाल (पिता: अर्जुन लाल) ने अपनी-अपनी पत्नियों क्रमश: शशिकला देवी एवं कुमकुम वर्मा के नाम 2-2 कट्ठा जमीन खरीदी थी:
- आम रास्ते पर कब्जे का आरोप: दोनों के घर के सामने 10 फीट चौड़ी और 84 फीट लंबी पक्की ढलाई सड़क आम रास्ते के रूप में दर्ज है. आरोप है कि दोनों ने मिलकर अपने घर के सामने सड़क के 32 फीट लंबे और 10 फीट चौड़े हिस्से को अपनी निजी जमीन में मिलाकर अवैध निर्माण कर लिया.
- आवागमन ठप: इस अतिक्रमण के कारण पड़ोसी अर्जुन कुमार साहा और ध्रुव कुमार के घरों तक चार पहिया वाहनों, आगंतुकों एवं एम्बुलेंस आदि का पहुंचना पूरी तरह बंद हो गया है. विरोध करने पर विवाद और दंगा-फसाद की स्थिति उत्पन्न होने के कारण पुलिस ने दोनों पक्षों पर धारा 107 के तहत कार्रवाई भी की थी.
प्रशासनिक आदेशों की लंबी फेहरिस्त, पर कार्रवाई शून्य
अतिक्रमण हटाने को लेकर दंडाधिकारी न्यायालय से कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं:
- SDM कोर्ट का पहला आदेश: वाद संख्या 157 पी/2019 (धारा 133 CrPC) के तहत SDM कटिहार ने 04 दिसंबर 2023 को अवैध निर्माण ध्वस्त करने का आदेश दिया.
- बार-बार जारी हुए पत्र: इसके बाद पत्रांक 2043 (15.12.2023), पत्रांक 1165 गो (30.07.2024), पत्रांक 1598 गो (16.12.2024) तथा ज्ञापांक 09 (07.01.2025) के जरिए 25 जनवरी 2025 तक कब्जा हटाने का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया.
- डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से रिवीजन खारिज: अंबिका प्रसाद जायसवाल ने SDM आदेश के खिलाफ जिला अदालत में क्रिमिनल रिवीजन (49/2024) दायर किया, जिसे ADJ-II कटिहार ने 30 सितंबर 2024 को खारिज कर दिया.
पटना हाईकोर्ट का नोटिस भी बेअसर, फिर शुरू हुआ अवैध रिपेयरिंग
मामले का समाधान न होने पर पीड़ित अर्जुन कुमार साहा ने पटना उच्च न्यायालय में याचिका (CWJC No. 7329/2025) दाखिल की:
- हाईकोर्ट की सुनवाई: उच्च न्यायालय ने 16 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी कर 02 फरवरी 2026 को सुनवाई तय की थी.
- फिर भी हुआ निर्माण: हाईकोर्ट में मामला लंबित रहने के बावजूद 08 फरवरी 2026 को अतिक्रमित रास्ते पर दोबारा रिपेयरिंग और अवैध निर्माण शुरू कर दिया गया, जिसकी शिकायत सदर थाने और SDM को दी गई.
- अंतिम 4 दिनों का नोटिस: SDM कोर्ट ने ज्ञापांक 1254 (09.05.2026) के तहत 4 दिनों के भीतर कब्जा हटाने का नोटिस दिया, जिसे पक्षों ने 11 मई 2026 को प्राप्त किया, फिर भी स्थिति जस की तस है.
"प्रशासनिक निष्क्रियता अदालत की अवमानना के समान" — पीड़ित
नगर आयुक्त, अंचलाधिकारी (CO) और स्थानीय थानाध्यक्ष को दंडाधिकारी (Magistrate) के रूप में प्रतिनियुक्त किया जा चुका है. इसके बावजूद धरातल पर कोई बुलडोजर या प्रशासनिक कार्रवाई न होना स्थानीय पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. पीड़ितों का कहना है कि यह स्थिति न्यायिक आदेशों की अवमानना (Contempt of Court) के समान है. अब देखना यह है कि जिला प्रशासन कब तक हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन करा पाता है.
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लेखक के बारे में
By राजकिशोर
राजकिशोर प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के कटिहार कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.
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