जिले के आजीविका मिशन के 50 से अधिक पदाधिकारी व कर्मी बेरोजगार

Updated at : 20 Mar 2026 7:35 PM (IST)
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जिले के आजीविका मिशन के 50 से अधिक पदाधिकारी व कर्मी बेरोजगार

जिले के आजीविका मिशन के 50 से अधिक पदाधिकारी व कर्मी बेरोजगार

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– 16 फरवरी से योजनाओं के सभी कार्य को कर दिया गया है बंद -आजीविका मिशन के सीआरपी मानदेय को ले लग रही जीविका कार्यालय नगर आयुक्त के समक्ष चक्कर -पिछले आठ माह से सीआरपी को नहीं हो पाया है मानदेय का भुगतान कटिहार जिले के दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के करीब 50 कमी व पदाधिकारी बेरोजगार हो गये हैं. ऐसा इसलिए कि 16 फरवरी से इस योजना को बंद कर दिया गया है. विभाग से इसको लेकर पत्र जारी किया है लेकिन नगर आयुक्त व जीविका के डीपीएम सच्चाई से पल्ला झाड़ रहे हैं. ऐसा नगर निगम कटिहार, नगर पंचायत बारसोई, मनिहारी समेत अन्य नगर पंचायतों में इस योजना के तहत कार्य करनेवाले पदाधिकारियों व कर्मचारियों का कहना है. सबसे बड़ी समस्या एसएचजी समूह के सीआरपी को हो गयी है. मानदेय भुगतान को लेकर इनलोगों को नगर आयुक्त व जीविका के डीपीएम के यहां चक्का लगाने को विवश होना पड़ रहा है. उनलोगों का कहना है कि पूर्व में शहरी क्षेत्र के लिए सीआरपी एसएचजी समूह गठन करने से लेकर कई तरह कार्य करते थे, इतना ही नहीं सीएम महिला रोजगार योजना, समूह गठन, बैंक से लिंकेज करवाना एसएचजी से सम्बंधित सारा क्रिया कलाप इनलोगों द्वारा किया जाता था. करीब दो वर्ष पूर्व विभाग के आदेश पर नगर निगम में कार्यरत ऐसे सभी कमियों को ग्रामीण जीविका के अधीन रखकर कार्य करने को कहा गया. साथ ही कार्य ग्रामीण जीविका शहरी क्षेत्र की कार्य करतीं एवं भुगतान जीविका की ओर से किये जाने लगा, लेकिन 16 फरवरी को इस शाखा को बंद कर दिये जाने की वजह से इनलोगों के समक्ष कठिनाई उत्पन्न हो गयी हैं. जिसका नतीजा है कि ये लोग घरों में बैठ गये हैं. सीआरपी का पिछले अगस्त-सितम्बर से मानदेय का भुगतान नहीं हो पाने से इनलोगों की आथिक स्थिति चरमरा गयी हैं, दो दिन पूर्व इन सभी कर्मियों ने मानदेय भुगतान को लेकर नगर आयुक्त से मुलाकात किये थे. लेकिन वहां से इनलोगों को बताया गया कि मानदेय भुगतान जीविका के माध्यम से होता था, इससे इनलोगों को मायूसी हाथ लगी. आजीविका शहरी मिशन के तहत इनलोगों ने करीब चार सौ एसएचजी समूह की महिलाओं को बैंक से लिकेंज करवाया था, अब वो सभी कार्य ठप पड़ गया है. बैंक द्वारा लोन दिया जायेगा या नहीं इस पर भी प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है. आजीविका शहरी मिशन के तहत सीआरपी का मानदेय करीब आठ नौ माह से बंद है. इनलोगों के पद को खत्म कर दिया गया है. बैंक से लोन नहीं दिये जाने काे लेकर पत्र उपलब्ध नहीं हो पाया है. नया समूह बनाने का कार्य बंद है. विभाग की ओर से राशि आने पर सीआरपी का भुगतान संभव है. इन्द्रशेखर इंदु, डीपीएम, जीविका

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