विक्रमशिला सेतु बंद: कटिहार-भागलपुर का संपर्क दो दिनों से टूटा

Published by :RAJKISHOR K
Published at :05 May 2026 6:14 PM (IST)
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विक्रमशिला सेतु बंद: कटिहार-भागलपुर का संपर्क दो दिनों से टूटा

विक्रमशिला सेतु बंद: कटिहार-भागलपुर का संपर्क दो दिनों से टूटा

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– महंगाई से जूझने लगे लोग, जान जोखिम में सफर कटिहार भागलपुर के विक्रमशिला पुल के क्षतिग्रस्त होने से सीमांचल और अंग क्षेत्र के बीच आवागमन की घोर समस्या उत्पन्न हो गई है. कटिहार से भागलपुर जाने के लिए लोगों को अब मुंगेर के रास्ते 100 से 150 किमी अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है. इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है. सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों, बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है. नाव से जान जोखिम में डालकर पार कर रहे गंगा विक्रमशिला पुल बंद होने के बाद कई लोग कटिहार से भागलपुर जाने के लिए पुल के निकट नाव का सहारा ले रहे हैं. लेकिन सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं. नावों पर लाइफ जैकेट की व्यवस्था न होने से लोग डरे-सहमे यात्रा कर रहे हैं. क्षमता से अधिक सवारी बैठाने के कारण हर वक्त बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है. मनिहारी गंगा घाट पर यात्रियों की जबरदस्त भीड़ मनिहारी गंगा घाट पर भी भीड़ बढ़ गई है. लोग साहिबगंज, लालबथानी, गर्म घाट जाने के लिए नाव से गंगा पार कर रहे हैं. मनिहारी-साहिबगंज के बीच स्टीमर सेवा बंदोबस्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण पहले से ही बंद है. ऐसे में यात्री जान जोखिम में डालकर नाव से सफर करने को मजबूर हैं. प्रशासन की ओर से नाविकों को लाइफ जैकेट अनिवार्य करने का निर्देश तो दिया गया है. लेकिन घाटों पर इसका पालन नहीं हो रहा. इलाज के लिए भटक रहे मरीज, रेफर बदला पुल बंद होने का सबसे बुरा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है. कटिहार के गंभीर मरीजों को इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल रेफर किया जाता था. लेकिन अब रास्ता बंद होने से कटिहार सदर अस्पताल से मरीजों को पूर्णिया या सिलीगुड़ी रेफर किया जा रहा है. भागलपुर में पहले से भर्ती मरीजों के परिजनों को भी आने-जाने में भारी दिक्कत हो रही है. एम्बुलेंस को भी मुंगेर के रास्ते कई घंटे अतिरिक्त लग रहे हैं. जिससे मरीजों की जान पर बन आ रही है. बालू-गिट्टी डेढ़ गुना महंगी, निर्माण कार्य ठप झारखंड से कटिहार आने वाली बालू और गिट्टी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है. विक्रमशिला पुल से सीधे आने वाले ट्रक अब मुंगेर होकर आ रहे हैं. दूरी और डीजल खर्च बढ़ने से भाड़ा बढ़ गया है. कारोबारियों का कहना है कि बालू-गिट्टी के दाम में डेढ़ गुना तक वृद्धि तय है. इसका सीधा असर घर बना रहे आम लोगों के साथ-साथ सरकारी योजनाओं पर पड़ेगा. प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा और सड़क निर्माण के कार्य की लागत बढ़ जायेगी. कई जगह बालू-गिट्टी का संकट होने से काम भी रुक गए हैं. सब्जी-फल भी होंगे महंगे, भागलपुरी आम पर संकट भागलपुर मंडी से कटिहार आने वाली हरी सब्जी, फल और अन्य खाद्य सामग्री भी अब महंगी होगी. लंबी दूरी तय कर आने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ गई है. गर्मी में सब्जियों के खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है. 14 मई के बाद बाजार में आने वाला मशहूर भागलपुरी बंबया आम भी इस बार महंगा मिलेगा. इसके अलावा मालदा और लंगड़ा आम भी कटिहार के लोगों को सस्ते की जगह ऊंचे दाम पर खरीदना पड़ेगा. थोक विक्रेताओं का कहना है कि भाड़ा बढ़ने से हर आइटम 10 से 15 रुपये किलो तक महंगा हो जायेगा. प्रशासन के दावे, जमीन पर हकीकत अलग जिला प्रशासन ने नावों पर लाइफ जैकेट अनिवार्य करने का दावा किया है. लेकिन जमीनी हकीकत अलग है. यात्री बसों की कमी और नावों पर सुरक्षा इंतजाम न होने से परेशान हैं. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मनिहारी-साहिबगंज के बीच तुरंत स्टीमर सेवा शुरू की जाए और जमाखोरी रोकने के लिए बालू-गिट्टी के दामों पर नियंत्रण रखा जाय. जब तक विक्रमशिला सेतु की मरम्मत पूरी नहीं होती, तब तक सीमांचल के लाखों लोगों को महंगाई और असुरक्षित सफर की दोहरी मार झेलनी पड़ेगी.

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