कोढ़ा में फल फूल रहा अवैध नर्सिंग होम का धंधा

Updated at : 05 May 2024 10:53 PM (IST)
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कोढ़ा के निजी अस्पताल में मरीजों का किया जाता है आर्थिक दोहन

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कोढ़ा प्रखंड क्षेत्र के गेड़ाबाड़ी बाजार समेत कोलासी बाजार में निजी क्लिनिक, अल्ट्रासाउंड सेंटर, पैथोलॉजी सेंटर एवं कई नर्सिंग होम संचालित हैं. जहां गरीब, निःसहाय एवं निर्धन मरीजों का आर्थिक दोहन किया जा रहा है. निजी अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजनों ने बताया कि वे लोग काफी गरीब एवं निःसहाय परिवार से हैं. अपने परिजनों का प्रसव कराने अपने क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता के साथ कोढ़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आये थे. पर आशा कार्यकर्ता बहला फुसला कर उन्हें बगल के ही नर्सिंग होम सेंटर लाया गया. जहां पर कार्यरत कर्मी एवं एएनएम ने नॉर्मल डिलीवरी नहीं होने की बात कही. सीजर करने की बात कही और बीस हजार रुपये में सीजर होने की बात कही. इतना ही नहीं हम लोगों को काफी डरा दिया गया कि अगर जल्द ऑपरेशन नहीं हुआ तो कोई अनहोनी हो सकता है. तब जाकर आनन फानन में ऑपरेशन करने के लिए हम लोग तैयार हो गये. इधर उधर से उधार पेंचा लेकर बीस रुपया का हम लोग व्यवस्था किये. अगर विश्वस्त सूत्रों पर यकीन करें तो कोढ़ा प्रखंड क्षेत्र के कई ऐसे नर्सिंग होम हैं. जिनका प्रखंड क्षेत्र के सभी आशा कार्यकर्ताओं से सांठ गांठ है. सरकारी आशा कार्यकर्ता ऐसे नर्सिंग होम में गर्भवती महिलाओं को प्रसव कराने लाते हैं. सूत्र बताते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी होने पर आशा कार्यकर्ताओं को निजी अस्पताल के द्वारा दो हजार एवं सीजर होने पर चार से पांच हजार रुपये एक मरीज पर दिया जाता है. जिस कारण लोभ में आकर आशा कार्यकर्ता निजी नर्सिंग होम में गर्भवती महिलाओं को लाया जाता है. अब सवाल यह उठता है कि इस और स्वास्थ्य विभाग ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं. इतना ही नहीं अगर कोई गर्भवती महिला को प्रसव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में होता है तो उन्हें स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सारी दवाई व अन्य सुविधा अस्पताल से ही मुहैया कराई जाती है. आशा कार्यकर्ता कमीशन के लालच में मरीज को एएनएम के द्वारा लिखी गई पर्ची पर सारी दवाई बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीद कर दिया जाता है. यहां भी विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि यहां भी दवाई खरीदारी पर 20 से 25 प्रतिशत कमीशन आशा कार्यकर्ता को दिया जाता है. सूत्र यह भी बताते हैं कि ऐसे नर्सिंग होम में ऑपरेशन करने के वक्त ही बाहर से डॉक्टर को बुलाया जाता है और ऑपरेशन के बाद मरीज का देखरेख नर्सिंग होम के एएनएम के द्वारा ही किया जाता है. ऑपरेशन के बाद मरीज का देखरेख सर्जन या फिजिशियन के द्वारा नहीं किया जाता है. जिस कारण ऑपरेशन के उपरांत कई रोगियों को इन्फेक्शन भी हो जाता है. गेड़ाबाड़ी बाजार में कई ऐसे अल्ट्रासाउंड केंद्र एवं एक्स रे केंद्र तथा पैथोलॉजी और निजी नर्सिंग होम हैं. जिनका स्वास्थ्य विभाग से लाइसेंस निर्गत नहीं है और यहां कई ऐसे अल्ट्रासाउंड सेंटर, एक्सरे सेंटर, पैथोलॉजी सेंटर एवं नर्सिंग होम अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं. पिछले वर्ष स्वास्थ्य विभाग के द्वारा गेड़ाबाड़ी बाजार में अवैध अल्ट्रासाउंड के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया गया था. जिसमें गेड़ाबाड़ी बाजार में कई अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर पाए गए थे. जिसे स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सील कर दिया गया था.

कहते हैं चिकित्सा पदाधिकारी

मामले में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अमित आर्य ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भवती महिलाओं को प्रसव कराने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र ही लाया जाता है. अगर किसी आशा कार्यकर्ता के द्वारा किसी निजी अस्पताल में ले जाया जाता है तो वैसे आशाओं को चिन्हित कर विभागीय कार्रवाई की जायेगी.

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