चुनावी मुद्दा: बाढ़ व कटाव से सैकड़ों परिवार होते रहे विस्थापित

Updated at : 29 Oct 2025 6:57 PM (IST)
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चुनावी मुद्दा: बाढ़ व कटाव से सैकड़ों परिवार होते रहे विस्थापित

चुनावी मुद्दा: बाढ़ व कटाव से सैकड़ों परिवार होते रहे विस्थापित

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– नहीं हुआ समस्या का समाधान कटिहार आसन्न विधानसभा चुनाव की सरगर्मी आहिस्ता-आहिस्ता जोर पकड़ने लगी है. कटिहार जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में द्वितीय व आखिरी चरण के तहत 11 नवंबर को मतदान होना है. अब नामांकन प्रक्रिया संपन्न होने के बाद प्रत्याशी व उनके समर्थक-कार्यकर्ता अपने अपने क्षेत्र में जाकर जन सम्पर्क अभियान में जुट गए है. इस बार भी हर सीट पर कमोवेश एनडीए बनाम महागठबंधन के बीच ही चुनावी दंगल होने के आसार है. पर इस बार कई सीटों पर निर्दलीय व एआईएमआईएम प्रत्याशी मुकाबला को त्रिकोणीय बना दिया है. जीत-हार को लेकर भी अटकलों का बाजार गरम है. चुनावी प्रचार व तमाम अटकलों के बीच स्थानीय मुद्दे भी है, जो इस चुनाव में जोर-शोर से उभरेगा. यूं तो जिले के सातों विधानसभा क्षेत्र में विकास से जुड़े ऐसे कई मुद्दे है, जो अब तक अधूरा है. यह अलग बात है कि इस क्षेत्र के नेतृत्व में बदलाव होता रहा. पर समस्याएं जस की तस बनी हुयी है. प्रभात खबर में वोट करें-बिहार गढ़े अभियान के तहत चुनाव में उठने वाली स्थानीय मुद्दों को लेकर भी पड़ताल की है. इस जिले के विधानसभा क्षेत्र में आम लोगों से जुड़ी कई समस्याएं है. विकास के कई मुद्दे है, जो अभी तक ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है. बाढ़ व कटाव इस जिले के कमोवेश हर विधानसभा क्षेत्र का एक मुख्य समस्या है. यूं तो कटिहार जिला बाढ़ की विभीषिका झेलने के लिए हर वर्ष अभिशप्त है. वर्ष 2016 भी जिले का 11 प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हुआ था. जबकि वर्ष 2017 में जिले के 15 प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हुआ है. हाल के वर्षों में भी बाढ़ व कटाव ने भारी तबाही मचायी है. इस वर्ष भी बाढ़ व कटाव ने भारी तबाही मचायी है. पिछले कई वर्षों से बाढ़ व कटाव की वजह से जान माल को व्यापक नुकसान हुआ है. वर्ष 2017 की बाढ़ में 85 लोगों की जान चली गयी. जबकि 20 लाख से अधिक की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुआ था. स्थानीय लोगों की मानें तो बाढ़ का मुख्य कारण तटबंध ही है. बाढ़ नदी के तटबंध टूटने की वजह से आती रही है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार 2017 में महानंदा तटबंध सात स्थानों पर टूटा है. जिसकी वजह से बाढ़ का पानी कटिहार जिले के अधिकांश क्षेत्रों को प्रभावित किया है. दूसरी तरफ बाढ़ के साथ-साथ कटाव की वजह से ही बड़ी आबादी विस्थापित होते रहे है. हर वर्ष विस्थापित को पुनर्वास करने के लिए संघर्ष होता रहा है. लोग आवाज भी उठाते रहे. पर विस्थापन की समस्या जस की तस बनी हुयी है. ऐसे लोगों का यह भी तर्क है कि हर वर्ष करोड़ो रुपया तटबंध की मरम्मती व रख रखाव के नाम पर खर्च होती है. उसके बावजूद बाढ़ के पानी में हर साल तक बांध टूट जाता है. ऐसे में तटबंध को नहीं बांधने से सरकारी व राजस्व का भी नुकसान होता है. केस स्टडी-1, करोड़ों खर्च के बाद भी टूट जाता है तटबंध महानंदा सहित अन्य नदी पर बने तटबंधों के रखरखाव एवं उसके मरम्मती के नाम पर हर वर्ष करोड़ों की राशि खर्च की जाती है. हाल के वर्षों में तटबंध की मरम्मती के नाम पर कटिहार जिले में 200 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की गयी. पर उसका फायदा लोगों को नहीं मिला. तटबंध टूटने की वजह से प्रलयंकारी बाढ़ आती रही है. वर्ष 2017 में तो महानंदा नदी के दायां व बायां तटबंध सात स्थानों पर टूट गया. इससे न केवल तटबंध की सुरक्षा को लेकर खर्च की जा रही राशियों पर भी सवाल उठने लगा है. बल्कि बाढ़ से लोगों को व्यापक नुकसान का सामना करना पड़ा है. तटबंध को लेकर अब लोग सवाल खड़ा करने लगे है. बाढ़ नियंत्रण के लिए तटबंध बनाया गया है या बाढ़ को आमंत्रण देने के लिए तटबंध का निर्माण किया गया है. इस बात को लेकर अब बहस होने लगी है. केस स्टडी-2, बाढ़ व कटाव से विस्थापन की समस्या कमोवेश कटिहार जिले के लोग हर साल बाढ़ व कटाव से जूझता है. वर्ष 2016 व 2017 में भी वर्ष 1987 में आयी बाढ़ का रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारी तबाही मचायी. जान-माल का व्यापक नुकसान हुआ है. आधारभूत संरचना सहित आम लोग प्रभावित हुए हैं. जान माल का व्यापक नुकसान हुआ. इस बार की बाढ़ ने भी भारी तबाही मचायी है. जानकारी के मुताबिक पिछले दो वर्ष मे आयी प्रलयंकारी बाढ़ से 800 करोड़ से भी अधिक सरकारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है. बाढ़ व कटाव से हजारों की आबादी अभी विस्थापित है. पुनर्वास को लेकर कोई ठोस पहल सरकार की ओर से नहीं हो सकी. तमाम तरह के नुकसान के बावजूद बाढ़ का स्थायी समाधान को लेकर अब तक कोई ठोस बार नहीं हुई है. यही वजह है कि आसन्न विधानसभा चुनाव में बाढ़ एक बड़ा मुद्दा उभरकर सामने आ रहा है. खास बातें बाढ़ नियंत्रण में असफल रहा है तटबंध जिलावासियों के लिये नियति बनी बाढ़ हर वर्ष करोड़ो खर्च के बाद भी टूट जाता है तटबंध बाढ़ व कटाव से हर वर्ष जान माल का होता है व्यापक क्षति महानंदा तटबंध के विरोध में उठती रही है आवाजें कटाव निरोधक के नाम पर सरकारी राशि का होता है दुरुपयोग

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