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नेतृत्व कर पंचायतों में बदलाव की गाथा लिख रही आधी आबादी

नेतृत्व कर पंचायतों में बदलाव की गाथा लिख रही आधी आबादी

– राष्ट्रीय पंचायतीराज दिवस पर प्रभात खास: सूरज गुप्ता, कटिहार त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद निर्वाचित होने वाले पंचायत प्रतिनिधि अपने पंचायत व गांव का विकास करते रहे हैं. पंचायती राज व्यवस्था में पहली बार वर्ष 2006 के चुनाव में आधे से अधिक सीटों पर महिलाएं जीतकर अपने हाथ में पंचायत की बागडोर संभाली. गुरुवार को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस है. यूं तो पंचायत एवं गांव के विकास में त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रतिनिधियों ने अहम भूमिका निभायी है. पर जब से आधी आबादी को आधे से अधिक सीटों पर नेतृत्व करने का मौका मिला. तब से गांव की तस्वीर भी बदलने लगी है. कभी चूल्हा-चाकी व घूंघट में रहने वाली महिलाएं अब पंचायत की सरकार चला रही है. हालांकि जब राज्य सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था में आधी आबादी को 50 प्रतिशत रिजर्वेशन दिया तब राज्य सरकार की खूब आलोचना हुई. उसे समय आधे से अधिक सीटों पर महिलाएं जीत का जरूर आयी थी. पर अधिकांश जगह में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि की जगह पर उनके रिश्तेदार ही निर्णय लिया करते थे. लेकिन अब स्थिति बदलने लगी है. अब निर्वाचित महिलाएं न केवल निर्णय लेती है. बल्कि पंचायत की सरकार चलाने में अहम भूमिका निभा रही है. गांव व पंचायत के समग्र विकास को लेकर सतत निगरानी भी कर रही है. यही वजह है कि पंचायती राज व्यवस्था में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों ने अपने नेतृत्व क्षमता के बल पर गांव व पंचायत में विकास की नयी इबारत लिख रही है. पंचायत सरकार की मिसाल मुखिया भारती फोटो 22 कैप्शन- भारती कुमारी जिले के फलका प्रखंड हथवाड़ा पंचायत की मुखिया भारती कुमारी अपने पंचायत से पहली बार मुखिया बनी है. पर उसने जिस तरह अपने पंचायत के समग्र विकास के लिए काम किया है. उसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई दी है. दरअसल पिछले वर्ष भारती को पंचायत में किये गये उनके काम के आधार पर केंद्रीय पंचायतीराज मंत्रालय की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया. साथ ही पिछले वर्ष 15 अगस्त को लाल किले में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए भारती को आमंत्रित किया गया. भारती के बारे में कहा जाता है कि वह गरीब, दलित, महादलित, जनजातिसमाज के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनती गया तथा उसके समाधान के लिए पहल करती है. राशन कार्ड, पशु शेड, सामाजिक सुरक्षा योजना सहित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से लोगों को न केवल जोड़ने का काम करती है. बल्कि उसके प्रति जागरूक भी करती है. उन्होंने जब सरकारी स्कूल का निरीक्षण किया तो पता चला कि बच्चे बहुत कम स्कूल आते है. उन्होंने नुक्कड़ सभा कर एक-एक व्यक्ति से मिलकर शिक्षा के बारे में समझाकर बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित की. मनोविज्ञान से स्नाकोत्तर भारती ने विद्यालय की आधारभूत संरचना को बेहतर किया. शिक्षा, स्वास्थ्य सहित लोगों की हर बुनियादी जरूरत को पूरा करने के लिए पहल कर रही है. मुखिया बन कर समाज की कर रही है सेवा फोटो 23 कैप्शन- पार्वती हेम्ब्रम जिले के डंडखोरा पंचायत में दूसरी बार मुखिया बनकर पार्वती हेंब्रम समाज की सेवा कर रही है. वह लगातार दूसरी बार अनुसूचित जनजाति अन्य के लिए सुरक्षित सीट से पंचायत का मुखिया बनने में कामयाब रही है. स्थानीय लोगों की माने तो अपनी काबिलियत के बल पर वहां दूसरी बार मुखिया बनी है. आमतौर पर आदिवासी समाज में लीडरशिप का सर्वथा अभाव देखा जाता है. लेकिन जब पार्वती हेंब्रम को 2016 में पहली बार मुखिय बनने का मौका मिला तो वह अपने दायित्व को बेहतर तरीके से निभाने का प्रयास किया. यही वजह है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें दूसरी बार नेतृत्व करने का मौका दिया. स्थानीय लोगों की माने तो मुखिया बनने के बाद पार्वती ने ऐसे गांव में सड़क का निर्माण कराया. जहां के लोग पक्की सड़क कभी नहीं देखा था. बरसात के दिनों में लोग कीचड़ से गुजरते हुए अपने गंतव्य को जाते थे. मुखिया बनने के बाद पार्वती ने ऐसे ही गांव में सड़क व नाला बनाया. जहां बरसात के दिनों में लोगों को परेशानी होती थी. उन्होंने सड़क, नाला, सामुदायिक शौचालय सहित विभिन्न विकास विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रियता दिखायी. साथ ही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से लोगों को जोड़ने की दिशा में पहल की. यही वजह है कि दूसरी बार भी वहां के लोगों ने उन्हें भारी वोटो की अंतर से जिताया है. विकास को लेकर प्रतिबद्ध जिप सदस्य आशा सुमन फोटो 24 कैप्शन- आशा सुमन जिले के कदवा प्रखंड से पहली बार जिला परिषद के सदस्य चुनी गयी आशा सुमन न केवल अपने क्षेत्र में विकास योजनाओं को क्रियान्वित कर रही है.. बल्कि अमलोगों से जुड़ी हुई है. अपने क्षेत्र में विकास कार्य यथा सामुदायिक शौचालय एवं सड़क का निर्माण कर लोगों सुविधा मुहैया करायी है. अपने निर्वाचन क्षेत्र में सड़क, नाला, चाहदीवारी सहित विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर हमेशा वह मुखर रहती है. साथ ही विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन करके लोगों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध करा रही है. जिला परिषद की बैठक के साथ-साथ अन्य मंचों पर भी वह अपने विकास कार्य को लेकर सक्रिय रहती है. अपने क्षेत्र में विकास व कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के अलावा आम जनता के प्रति सम्मान, सोहार्द भाव रखते उनके सुख दुख में शामिल होना आशा के स्वभाव में शामिल है. यही वजह है कि उनके नेतृत्व क्षमता को देखते हुए बिहार में सत्तारूढ़ दल के मुख्य घटक दल जनता दल यूनाइटेड के महिला प्रकोष्ठ का जिला अध्यक्ष बनाया गया. पंचायती राज व्यवस्था में अपनी भूमिका एवं दायित्वों का निर्वहन करते हुए वह पार्टी के लिए भी सक्रिय रहती है.

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