भूकंप सुरक्षा नियमों को दैनिक जीवन में अपनाएं, समाज को भी करें जागरूक

Updated at : 20 Jan 2026 7:00 PM (IST)
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भूकंप सुरक्षा नियमों को दैनिक जीवन में अपनाएं, समाज को भी करें जागरूक

. भूकंप सुरक्षा पखवाड़ा 15 से 29 जनवरी अंतर्गत भूकंप से बचाव, तैयारी व जन-जागरूकता के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं

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कटिहार इंजीनियरिंग कॉलेज में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कटिहार. भूकंप सुरक्षा पखवाड़ा 15 से 29 जनवरी अंतर्गत भूकंप से बचाव, तैयारी व जन-जागरूकता के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इसी क्रम में कटिहार इंजीनियरिंग कॉलेज में मंगलवार को आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से भूकंप सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में कॉलेज की प्राचार्या डॉ रंजना कुमारी, कार्यक्रम के संचालक प्रो राहुल कुमार, सभी विभागाध्यक्ष, समस्त विभागों के प्राध्यापकगण व एसडीआरएफ टीम के साथ राज वर्धन कुमार उपस्थित रहे. प्राचार्या डॉ रंजना कुमारी ने कहा कि भूकंप जैसी आपदा से बचाव के लिए पूर्व तैयारी और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है. उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे भूकंप सुरक्षा के नियमों को केवल कार्यक्रम तक सीमित न रखें. बल्कि दैनिक जीवन में भी अपनाएं तथा अपने परिवार व समाज को भी जागरूक करें. उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण,मॉक ड्रिल कार्यक्रमों को छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कॉलेज स्तर पर नियमित रूप से ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया. एसडीआरएफ की ओर से राज वर्धन कुमार व उनकी टीम ने भूकंप सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी अवेयरनेस स्लाइड्स के माध्यम से प्रस्तुत की तथा आपदा के समय अपनाए जाने वाले सुरक्षित व्यवहार, राहत एवं बचाव के प्रारंभिक उपायों और भवन सुरक्षा मानकों पर विस्तृत जानकारी दी. प्रो राहुल कुमार ने बतया कि आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा डिजाइन कोड बीआइएस 2025 के तहत संशोधित भूकंपीय जोनल मानचित्र जारी किया गया है. पहले भारतीय भू-भाग को भूकंपीय जोन द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ व पंचम में वर्गीकृत किया गया था. जबकि अब एक नया उच्च जोखिम वाला जोन षष्ठी भी जोड़ा गया है. इसके अंतर्गत बिहार राज्य के दरभंगा व मधुबनी को उच्चतम भूकंपीय जोन में सम्मिलित किया गया है. साथ ही उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर सहित कुल 12 जिलों को शामिल किए जाने का उल्लेख किया गया है. इसके अतिरिक्त पूर्वी बिहार के कोसी-सीमांचल क्षेत्र को भी अधिक जोखिम वाला क्षेत्र बताया गया है. इसके चलते भवन निर्माण में भूकंपरोधी उपायों को अनिवार्य रूप से अपनाने तथा तैयारी और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया. कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के विद्यार्थियों ने उत्साह पूर्वक भाग लेते हुए मॉक ड्रिल एवं फुट मार्च में बढ़-चढ़कर सहभागिता की. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों एवं कॉलेज समुदाय को भूकंप जैसी आपदाओं के प्रति जागरूक कर सुरक्षित व जिम्मेदार व्यवहार विकसित करना रहा.

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