30 नवंबर को मनाया जायेगा गो भक्त बलिदान दिवस

संस्कृति संरक्षण परिषद कटिहार की बैठक बासुदेव नायक के आवास पर आयोजित की गयी.
कटिहार. संस्कृति संरक्षण परिषद कटिहार की बैठक बासुदेव नायक के आवास पर आयोजित की गयी. बैठक में बताया गया कि गो भक्तों के बलिदान दिवस पर प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी शहीद चौक पर गोपाष्टमी 30 नवंबर को संध्या पांच बजे दीपदान कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और अगले वर्ष 60 वर्ष पूर्ण होने पर गोमाता को राष्ट्रीय जीव के दर्जा के लिए वर्ष भर आंदोलन एवं गोपाष्टमी पर संसद पर प्रदर्शन कर सरकार को राष्ट्रीय जीव की दर्जा के लिए बाध्य किया जायेगा. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अवधेश कुमार देव, पंकजेश कुमार, बासुदेव नायक, अरुण कुमार चौधरी, जयप्रकाश बारीक एवं योगेश पूर्वे को दायित्व दिया गया है. साथ ही नागरिकों से आग्रह किया है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपने बलिदानी गोभक्तों को श्रद्धांजलि अर्पित करें. संगठन के महामंत्री विनय भूषण ने कहा कि 1962 के लोकसभा चुनाव जीतने के लिए इंदिरा गांधी ने पुज्यसंत करपात्री जी महाराज के साथ संतों को गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध का आश्वासन दिया. परिणाम स्वरूप 1962 आम चुनाव जीतकर इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री बनी और बनते हीं दिए गए बचन को भूल गयी. तब संतों ने अखिल भारतीय स्तर पर गोरक्षा का आंदोलन पूज्य करपात्री जी के नेतृत्व में किया. आंदोलन के क्रम में बिक्रम संवत् 2023 के गोपाष्टमी 07-11-1966 को संसद पर गोमाता के साथ प्रदर्शन एवं घेराव करने का निर्णय लिया गया. शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे गोभक्तों पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देश पर हमला किया गया. जिसके परिणामस्वरूप संसद मार्ग पर गोमाता एवं गौरक्षकों की लाश और रक्त से पट गया. यह स्थिति देख करपात्री जी बिलख-बिलख कर रोये और दुखी होकर जो शाप दिया, उसके परिणामस्वरूप आज कांग्रेस एवं गांधी परिवार पतन के कगार पर है.
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