जीवित्पुत्रिका व्रत, 13 को नहाय, 14 व्रत, व 15 को होगा पारण

Updated at : 12 Sep 2025 6:40 PM (IST)
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जीवित्पुत्रिका व्रत, 13 को नहाय, 14 व्रत, व 15 को होगा पारण

जीवित्पुत्रिका व्रत, 13 को नहाय, 14 व्रत, व 15 को होगा पारण

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सभी पंचाग एकजुट, आचार्य डॉ. राम कन्हाई शास्त्री कटिहार संतान की दीर्घायु, सुख-शांति व उन्नति के लिए महिलाएं जीवित्पुत्रिका व्रत अर्थात जिउतिया महाव्रत को लेकर इस वर्ष कोई भी कंफ्यूजन नहीं होने वाली है. इस वर्ष सभी पंचाग व्रत को लेकर एकमत है. इस संदर्भ में आचार्य डॉ राम कन्हाई शास्त्री ने बताया कि यह व्रत संतान की रक्षा के साथ-साथ संतान प्राप्ति के उद्देश्य से भी किया जाता है. माताएं जीमूतवाहन व पितरों से अपनी संतान की रक्षा व आशीर्वाद की प्रार्थना करती है. शास्त्रों में उल्लेख है कि जीवन में सुख-शांति और दीर्घायु के लिए देवताओं के साथ पितरों का आशीर्वाद भी आवश्यक है. किसी भी शुभ कार्य में देवताओं के साथ पितरों का आह्वान और पूजन अनिवार्य माना गया है. बिना पितरों की पूजा के कोई भी धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण नहीं होता. आचार्य शास्त्री ने बताया कि इस बार पंचांगकारों में पूर्ण एकरूपता दिखाई दी है. साथ ही माताओं-बहनों के लिए व्रत की कठोरता भी पूर्व वर्षों की तुलना में कम है. इस वर्ष जीवित्पुत्रिका व्रत की शुरुआत 13 सितंबर शनिवार को नहाय-खाय से होगी. रात्रि के अंतिम प्रहर से सूर्योदय पूर्व तक ओठगन का विशेष महत्व है. परिवार के साथ सामूहिक रूप से ओठगन करना अधिक उत्तम माना गया है. 14 सितंबर रविवार को निर्जला उपवास का आरंभ होगा. अष्टमी तिथि इसी दिन सुबह आठ बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 15 सितंबर सोमवार को सुबह 6 बजकर 35 मिनट तक रहेगी. इसके पश्चात नवमी तिथि यानी 15 सितंबर सोमवार 6:35 मिनट के बाद व्रत का पारण किया जायेगा. डॉ शास्त्री ने यह भी बताया कि इस वर्ष जिउतिया व्रत का संयोग अत्यंत शुभ है. जो माताएं उद्यापन करना चाहती हैं. उनके लिए यह समय उपयुक्त है. शास्त्री ने कहा कि व्रत के दौरान यदि किसी महिला का स्वास्थ्य अचानक खराब हो जाय तो धर्म का यही मत है कि आत्मा रक्षितो धर्म: अर्थात आत्मा की रक्षा करना ही सर्वोच्च धर्म है. शरीर से ही संकल्प की सिद्धि होती है. स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोपरि है. इस प्रकार जीवित्पुत्रिका व्रत केवल संतान की दीर्घायु और कल्याण का पर्व ही नहीं, बल्कि मातृत्व की आस्था और तपस्या का अद्भुत उदाहरण भी है. जो हर वर्ष लाखों माताओं द्वारा श्रद्धापूर्वक निभाया जाता है.

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