कटिहार का गौरीशंकर नाथ मंदिर, जहां हर दिन उमड़ती है भोलेनाथ के भक्तों की भीड़
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 01 Jun 2026 9:06 AM
गौरीशंकर नाथ मंदिर
Aaj Ka Darshan: कटिहार शहर के बीचोंबीच स्थित गौरीशंकर नाथ मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है. सावन और शिवरात्रि में यहां ऐसा भक्तिमय माहौल बनता है कि पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठता है.
कटिहार से सूरज गुप्ता की रिपोर्ट.
Aaj Ka Darshan: कटिहार शहर के डॉ राजेंद्र प्रसाद पथ स्थित बाटा चौक के समीप अवस्थित श्री श्री 108 कष्टहरण नाथ गौरीशंकर मंदिर शहर के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में गिना जाता है. वर्षों से यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष शांति और ऊर्जा प्रदान करता है.
आस्था का ऐसा धाम, जहां हर दिन होता है जलाभिषेक
गौरीशंकर नाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कटिहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. मंदिर में स्थापित शिवलिंग के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा है. शहर के अलावा आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु यहां नियमित रूप से दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा भोलेनाथ की आराधना करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
सुबह-शाम आरती में शामिल होने पहुंचते हैं सैकड़ों श्रद्धालु
मंदिर के पुजारी हेमचंद्र भारती के अनुसार यहां प्रतिदिन सुबह और शाम नियमित पूजा-अर्चना एवं आरती होती है. सुबह सात बजे से पूजा का क्रम शुरू हो जाता है और करीब आठ बजे आरती संपन्न होती है. वहीं शाम चार बजे से रात्रि आठ बजे तक श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर सकते हैं. रात्रि आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. दोपहर एक बजे से शाम चार बजे तक मंदिर में पूजा-अर्चना नहीं होती.
सावन और शिवरात्रि में दिखता है भक्तों का सैलाब
सावन माह और महाशिवरात्रि के दौरान मंदिर की रौनक कई गुना बढ़ जाती है. सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है. इस दौरान सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहती हैं. मंदिर परिसर में भजन, कीर्तन और हर-हर महादेव के जयघोष से भक्तिमय वातावरण बना रहता है.
शहर की धार्मिक पहचान बन चुका है यह शिवालय
वर्षों पुराना यह मंदिर आज कटिहार की धार्मिक पहचान बन चुका है. यहां आयोजित धार्मिक अनुष्ठान और पर्व-त्योहार क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखते हैं. मंदिर में आने वाले श्रद्धालु केवल पूजा ही नहीं करते, बल्कि यहां के शांत वातावरण में कुछ समय बिताकर मानसिक सुकून भी प्राप्त करते हैं.
स्टेशन से कुछ ही दूरी पर है मंदिर
गौरीशंकर नाथ मंदिर तक पहुंचना बेहद आसान है. कटिहार जंक्शन से श्रद्धालु ऑटो, रिक्शा या पैदल आसानी से मंदिर पहुंच सकते हैं. त्योहारों के दौरान आसपास पार्किंग की सीमित व्यवस्था रहती है. ऐसे में स्थानीय परिवहन का उपयोग अधिक सुविधाजनक माना जाता है.
कटिहार का गौरीशंकर नाथ मंदिर आज भी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भक्ति का केंद्र बना हुआ है. यहां पहुंचने वाला हर भक्त बाबा भोलेनाथ के चरणों में शीश झुकाकर आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करता है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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