नशे की गर्त में समाता जा रहा है बचपन

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कुरसेला : नशे की गर्त में बचपन समाता जा रहा है. किशोरों ने मदहोशी के लिए नशा करने का नया तरीका अपनाया है. यह तरीका इनके लिये सस्ता और सुलभ है. जिनमें शराब से अधिक नशा प्रभाव होता है. इस नशा का प्रयोग किशोरों के जीवन को खोखला कर रहा है. लत के आदी बने […]

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कुरसेला : नशे की गर्त में बचपन समाता जा रहा है. किशोरों ने मदहोशी के लिए नशा करने का नया तरीका अपनाया है. यह तरीका इनके लिये सस्ता और सुलभ है. जिनमें शराब से अधिक नशा प्रभाव होता है. इस नशा का प्रयोग किशोरों के जीवन को खोखला कर रहा है. लत के आदी बने किशोर इसके घातक दुष्प्रभाव से अनभिज्ञ होते हैं. सेवन करने वाले पर ड्रग्स एडिक्ट जैसा प्रभाव बन जाता है. नशा चपेट में दस से पंद्रह वर्ष के बच्चे आ रहे हैं

. इनमें छात्र और गरीब तबके के बच्चों के इस नशा के गिरफ्त में आने की चर्चाएं है. लत लगने वाले किशोरो की संख्या दिन व दिन बढ़ती जा रही है. हालांकि शराबबंदी के बाद कुछ आदतन शराबी भी इस नशा का सेवन करने लगे हैं. इन स्थितियों में नशा लेने का नया साधन उभर कर सामने आया है.

क्या है यह नशा : साइकिल टायर का पंक्चर बनाने वाला रबड़ सुलेशन नशा करने का साधन बन चुका है. सुलेशन को कपड़े में भीगा कर नाक से श्वास के जरिये खींचा जाता है. सेवन करने वाले तत्काल प्रभाव से नशे में आ जाते हैं. एक छोटे सुलेशन के डिब्बे से शराब के बड़े बाेतलों से अधिक नशा होता है बाजारों में यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है.
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