संक्रमण का रहता है खतरा
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सदर अस्पताल . नहीं है मेडिकल वेस्टेज निबटाने की व्यवस्था कचरे को अस्पताल की खाली पड़ी जमीन पर या तो दफन कर दिया जाता है या फिर जला दिया जाता है. इससे मिट्टी के साथ-साथ हवा भी हो रही है प्रदूषित. कटिहार : एक आंकड़े की मानें तो सूबे में प्रतिदिन मेडिकल वेस्ट के तौर […]
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सदर अस्पताल . नहीं है मेडिकल वेस्टेज निबटाने की व्यवस्था
कचरे को अस्पताल की खाली पड़ी जमीन पर या तो दफन कर दिया जाता है या फिर जला दिया जाता है. इससे मिट्टी के साथ-साथ हवा भी हो रही है प्रदूषित.
कटिहार : एक आंकड़े की मानें तो सूबे में प्रतिदिन मेडिकल वेस्ट के तौर 120 क्विंटल कचरा विभिन्न अस्पतालों से निकलता है. इसमें से महज 22 क्विंटल कचरे का ही निष्पादन किया जाता है, बाकी कचरे को या तो जला दिया जाता है या फिर उन्हें सड़कों या फिर अस्पताल के किसी कोने में जमा कर दिया जाता है.
आंकड़ों की स्थिति को देख कर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य महकमा किस तरह मेडिकल वेस्ट का निबटान कर रहा है. यही हाल कमोबेश जिले का भी है. सदर अस्पताल में मेडिकल वेस्ट मसलन इलाज का कचरा कभी भी हमें बीमार कर सकता है. सदर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले और आसपास रहने वाले लोग मेडिकल वेस्ट से होनेवाले संक्रमण और बीमारियों की जद में हैं. मुख्य वजह है, इस कचरे का पुख्ता निबटान न होना.
हालांकि अस्पताल प्रबंधन इन बातों से इत्तेफाक नहीं रखता. प्रबंधन का कहना है कि प्रतिदिन अस्पताल परिसर की सफाई होती है और मेडिकल वेस्ट का भी निबटान होता है. मेडिकल वेस्ट के खुले में होने की वजह से नयी बीमारियों और संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है. हालांकि यह हाल सिर्फ सदर अस्पताल का ही नहीं है, बल्कि शहर के कई अन्य निजी अस्पतालों में भी मेडिकल वेस्ट के निबटान की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है. इस कारण इन जगहों पर बदबू और बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है.
कचरे के रूप में चुन रहे मौत
उपयोग में लायी जा चुकी सीरिंज, प्लास्टिक की सीसी आदि कचरे के डिब्बे से चुन कर कबाड़ में बेचकर थोड़े से पैसे कमाने की चाहत में गरीब बच्चे जानलेवा बीमारी को हाथ लगा बैठते हैं. कचरा चुनने के चक्कर में ये बच्चे संक्रमित चीजें भी हाथों से ही उठा लेते हैं और बीमारी का शिकार होते हैं. इस दिशा में भी अस्पताल प्रशासन द्वारा कुछ खास नहीं किया जा रहा है.
क्या है नियम
बायो मेडिकल वेस्टेज का सही तरीके से निष्पादन नहीं करना अपराध माना जाता है. बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट ऑफ हैंडलिंग रूल्स 98 के तहत बायो मेडिकल वेस्टेज को इधर-उधर फेंकना गैर कानूनी है. बायो मेडिकल वेस्टेज का सही तरीके से डिस्पोजल न कर सार्वजनिक स्थान या फिर परिसर में फेंकना म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, पुलिस एक्ट 69 की धारा 34, इंवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 86 की धारा 15 का भी उल्लंघन है. इस अपराध के लिए दोषी पाये जाने पर आरोपित को पांच साल तक की सजा का प्रावधान है. इन सबके बावजूद निजी और सरकारी अस्पतालों में कानून को ताख पर रख कर काम किया जा रहा है और ये कचरे लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं.
क्या है मेडिकल वेस्टेज
बरसात के दिनों में बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा
मरीजों के इलाज में उपयोग होनेवाले कॉटन, बैंडेज, आइवी फ्लूड बॉटल, सीरिंज, इंजेक्शन, बॉडी पार्ट, सर्जिकल आइटम, प्लेसेंटा समेत अन्य दवाइयां जो इस्तेमाल के बाद यूं ही फेंक दी जाती हैं. इन कचरों को अस्पताल की खाली पड़ी जमीन पर या तो दफन कर दिया जाता है या फिर जला दिया जाता है.
इससे मिट्टी के साथ साथ वायु प्रदूषण का भी खतरा बना रहता है. बता दें कि कचरे में शामिल कॉटन, बैंडेज और बॉडी पार्ट एक से दो दिन में नष्ट हो जाते हैं, लेकिन आइवी फ्लूड की बोतल, सीरिंज, निडिल सहित सर्जिकल आइटम नष्ट नहीं होते हैं. इससे मिट्टी प्रदूषित हो जाती है और बरसात के दिनों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. कचरा के जमा होने से वायु, जल और भूमि प्रदूषण के साथ साथ हेपेटाइटिस-बी, कोलेरा, प्लेग, ट्यूबरक्यूलोसिस जैसी घातक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है.
अस्पताल में साफ-सफाई के पुख्ता इंतजाम
मेडिकल वेस्ट उठाने के लिए प्रतिदिन भागलपुर से गाड़ी आती है और यदि कभी कभार कचरा जमा रह जाता है, तो उसे प्लास्टिक बैग में जमा कर दिया जाता है और नगर निगम के सफाई कर्मी से इसकी सफाई करायी जाती है. उन्होंने कहा कि अस्पताल में परिसर में साफ सफाई के पुख्ता इंतजाम हैं.
डॉ एससी झा, सिविल सर्जन
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