तापमान में 12 डिग्री का अंतर
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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हालात . पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष काफी अधिक है तापमान अप्रैल में जिस तरह की गरमी लगातार पड़ रही है, उस तरह की गरमी कभी पड़ती नहीं थी. मई व जून में ही इस तरह की गरमी व धूप से लोगों को पाला पड़ता था. अप्रैल में अधिकतम तापमान 37 डिग्री से […]
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हालात . पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष काफी अधिक है तापमान
अप्रैल में जिस तरह की गरमी लगातार पड़ रही है, उस तरह की गरमी कभी पड़ती नहीं थी. मई व जून में ही इस तरह की गरमी व धूप से लोगों को पाला पड़ता था. अप्रैल में अधिकतम तापमान 37 डिग्री से लेकर 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा, जबकि वर्ष 2015 में अप्रैल में अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री तक ही गया था.
कटिहार : शरीर को झुलसा देने वाली कड़ी धूप, उमस भरी गरमी और लू तीनों से लोग एक साथ परेशान हो रहे हैं. घर से निकलने में लोगों को सौ बार सोचना पड़ रहा है. स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति लगातार घट रही है. निजी स्कूलों में बच्चे सिलेबस में पीछे नहीं रह जायें, इसलिए अभिभावक नहीं चाहते हुए भी बच्चों को स्कूल भेजने को विवश हो रहे हैं. सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति काफी कम हो गयी है. स्कूली बच्चे व अभिभावक कड़ी धूप व गरमी को देखते हुए स्कूलों में गरमी छुट्टी देने की मांग कर रहे हैं. इसमें न डीएम कोई ध्यान दे रहे हैं न ही शिक्षा विभाग कोई पहल कर रहा है.
नतीजतन छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल से घर लौटने में पसीने छूट रहे हैं. दरअसल अप्रैल में जिस तरह की गरमी लगातार पड़ रही है, उस तरह की गरमी कभी पड़ती नहीं थी. मई व जून में ही इस तरह की गरमी व धूप से लोगों को पाला पड़ता था. यही वजह है कि लोगों को इससे निबटने में खासी परेशानी हो रही है. एक निजी स्कूल प्रबंधक ने बताया कि अप्रैल में सेशन चालू ही हुआ है. अभी एक माह भी पढ़ाई नहीं हुई है. ऐसे में धूप व गरमी को लेकर यदि अभी छुट्टी हो जाती है, तो सिलेबस को पूरा करने में परेशानी होगी. चूंकि अप्रैल में जब इस तरह की गरमी पड़ रही है, तो मई एवं जून में और ज्यादा गरमी पड़ने की संभावना है. लगातार छुट्टी होने से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा.
तापमान ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त किये
इस वर्ष 2016 के अप्रैल महीने में अधिकतम तापमान 37 डिग्री से लेकर 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा, जबकि वर्ष 2015 में अप्रैल महीने में अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री तक ही गया था. इस वर्ष अधिकतम व न्यूनतम तापमान ने पिछले सारे रिकाॅर्ड को ध्वस्त कर दिया है.
मौसम के बदलने से आम जनजीवन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. लोग घर में काम-धाम छोड़कर दुबकने को विवश हो रहे हैं. इससे लोगों को काम प्रभावित हो रहा है. दुकानदार व व्यवसायी के यहां ग्राहक के नहीं आने से उनका धंधा चौपट हो रहा है. लेकिन लोग करें तो आखिर क्या करें. प्रचंड गरमी व झुलसा देने वाली धूप यदि इसी तरह पड़ती रही, तो लोगों की परेशानी और ज्यादा बढ़ जाने की बात कही जा रही है.
फुटपाथी दुकानदार हैं परेशान
शहर में फुटपाथी दुकानदारों की संख्या हजारों में है. सड़क किनारे गरीब तबके के लोग विभिन्न तरह की छोटी दुकानें लगाकर अपना व परिवार का भरण पोषण करते हैं. कड़ी धूप के कारण खुले में लोग एक मिनट जब रहना पसंद नहीं करते वैसी स्थिति में इन्हें पूरे दिन धूप में बैठे रहना पड़ता है. इससे फुटपाथी दुकानदारों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है. वही मजदूर वर्ग के लोग, रिक्शा, ठेला, ऑटो चलाने वाले लोग भी कड़ी धूप में परेशान हो रहे हैं.
आग उगलती धूप के बीच जिले में फसलें बरबाद हो रही हैं. किसान अपनी फसल को बरबाद होता देख छाती पीटने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहे हैं. दरअसल कड़ी धूप की वजह से खेत सूख रहे हैं. फसलों को बचाने के लिए पानी की दरकार है. लेकिन अधिकांश किसान खेत में पटवन करने में सक्षम नहीं हो रहे हैं.
धूप इतनी तेज है कि रोज-रोज पटवन करने पर ही फसल को बचाया जा सकता है. रोज पटवन करने में किसानों की लागत बढ़ती जा रही है. किसानों के पास इतना रुपये नहीं है कि पटवन कर फसल को बचा सकें. धूप से मखाना, मक्का, केला, सब्जी की खेती, गरमा धान की खेती बरबाद होने के कगार पर है. इसके साथ ही तालाब सूखने से मछली उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है.
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