नशामुक्ति केंद्र . पूर्ण शराबबंदी से मरीजों की संख्या में हो रहा इजाफा
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सात आदतन शराबी हुए भरती मरीजों का बुरा हाल, कह रहे शराब दो नहीं तो मर जाऊंगा कटिहार. मुझे शराब दो नहीं तो मैं मर जाऊंगा, यह कहते हुए वह तड़प कर अपने बेड से उठ जाता है, उसके परिजन उसे बार-बार बेड पर लिटाते और जब उससे परिजन पकड़ते तो कहता थोड़ी सी ही […]
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सात आदतन शराबी हुए भरती
मरीजों का बुरा हाल, कह रहे शराब दो नहीं तो मर जाऊंगा
कटिहार. मुझे शराब दो नहीं तो मैं मर जाऊंगा, यह कहते हुए वह तड़प कर अपने बेड से उठ जाता है, उसके परिजन उसे बार-बार बेड पर लिटाते और जब उससे परिजन पकड़ते तो कहता थोड़ी सी ही शराब दे दो. यह वाकया सदर अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में बुधवार को देखने को मिला. सरकार द्वारा पूर्ण रूपेण शराबबंदी के बाद सदर अस्पताल में स्थापित नशा मुक्ति केंद्र में बुधवार को दो और मरीज भरती हो गये.
उनकी हालत काफी गंभीर है. बीते मंगलवार को कटिहार के शहरी क्षेत्र से एक नये मरीज को भरती किया गया था, उसकी बैचेनी कम थी, लेकिन उन मरीजों में व्याकुलता व छटपटाहट बरकरार थी. सदर अस्पताल के नशामुक्ति केंद्र में अबतक सात मरीज भरती हो चुके हैं.
इनका इलाज सीएस एसएन झा के निरीक्षण में डॉ बीके गोपालका, डॉ तनवीर हैदर कर रहे हैं. बार-बार भागने की कोशिश : नशा मुक्ति केंद्र में रंजीत व संजय (काल्पनिक नाम) दो मरीज को बुधवार को गंभीर अवस्था में भरती कराया गया. डॉ तनवीर हैदर ने उन्हें देखते ही अविलंब दवा दी. वह बार-बार अपने बेड से उतरकर भागना चाह रहा था. पत्नी व अन्य परिजन उसे पकड़े हुए थे. जब वह भाग नहीं पा रहा था, तो अपने परिजनो से कह रहा था कि मुझे थोड़ी सी ही शराब दे दो नहीं तो मैं मर जाऊंगा.
उनकी स्थिति व व्याकुलता देखकर पत्नी व घरवालों को रोना आ रहा था और उसकी पत्नी खामोश बस एक टक उसे देखे जा रही थी. वहीं एक अन्य मरीज शराब की तलब व उससे हो रही बैचेनी से मानो अर्द्धविक्षिप्त हो गया हो. वह बार-बार बेड से उतरने का प्रयास कर रहा था. शरीर में हो रही ऐंठन व अन्य कारणों से विचलित सा हो रहा था. इधर मंगलवार को शहर के सिंगल टोला स्थित एक मरीज को भरती कराया गया. वह इतना व्याकुल था कि वह बेड से उतरकर नीचे तड़प रहा था. यह मरीज भी बार-बार कर्मियों से बस थोड़ी सी शराब मांग रहा था.
कहते हैं चिकित्सक : नशा मुक्ति केंद्र में तैनात डॉ तनवीर हैदर ने कहा कि आदतन शराबी को भरती के दिनों से सात दिनों तक काफी कठिनाई होती है. अलकोहल विथड्रोम पिड्रोम के इलाज के बाद मरीज में सुधार हो जाता है. आदतन शराबी के लीवर व हर्ट की भी जांच होती है. सात दिनों के अंदर मरीज की स्थिति में सुधार हो जाता है और उसे शराब की तलब कम होती है. इन्ही सात दिनों के अंदर व्याकुलता, बदन खींचना, उल्टी सहित अन्य कारणों से मरीज की स्थिति खराब हो जाती है और वह शराब की मांग करते रहते हैं.
सरकार को यह निर्णय पहले ही ले लेना था
नशा मुक्ति केंद्र में मरीजों की व्याकुलता को देख अच्छे-अच्छे लोगों के दिल पिघल जा रहे हैं. उनकी चीख सुन कर कुछ लोग एक बार उस कमरे में तड़पते मरीज को देख लेते और उनके मुंह से अनायास ही आह निकल जाती थी. वहां से गुजरने वालों में हफला निवासी मंजू देवी,
बरारी निवासी एक मरीज की मां, सहित अन्य मरीज के परिजनों ने कहा कि क्या शराब पीने से लोगों की स्थिति ऐसी होती है. तो सरकार इसे राज्य में किस प्रकार चला रही थी. उन लोगों ने यह भी कहा कि शराब को तो बहुत पहले ही बंद कर देना चाहिए था. ऐसा निर्णय लेने में इतना विलंब क्यों हुआ. हालांकि नशामुक्ति केंद्र में भरती अन्य तीन मरीजों की स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है.
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