रंग-बिरंगी पिचकारियों से सज गये बाजार
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सरकारी-गैर सरकारी व स्कूल-कॉलेजों मंे एडवांस में दे रहे होली की बधाई कटिहार : होली का पर्व दो दिन बाद मनाया जायेगा, लेकिन इसका नशा अभी से सिर चढ़ कर बोल रहा है. सरकारी दफ्तरों और स्कूल-कॉलेजों में लोग रंग-अबीर-गुलाल लगा कर एडवांस में होली की बधाई दे रहे हैं. रंग-बिरंगी विभिन्न प्रकार की पिचकारियों […]
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सरकारी-गैर सरकारी व स्कूल-कॉलेजों मंे एडवांस में दे रहे होली की बधाई
कटिहार : होली का पर्व दो दिन बाद मनाया जायेगा, लेकिन इसका नशा अभी से सिर चढ़ कर बोल रहा है. सरकारी दफ्तरों और स्कूल-कॉलेजों में लोग रंग-अबीर-गुलाल लगा कर एडवांस में होली की बधाई दे रहे हैं. रंग-बिरंगी विभिन्न प्रकार की पिचकारियों से बाजार सज गये हैं. इन पिचकारियों को देख कर बच्चे बरबस ही इस आेर आकर्षित हो रहे हैं.
रंग, अबीर, गुलाल और विभिन्न प्रकार के नकाब मसलन कैप, दाढ़ी, बाल इत्यादि भी लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं. लोग जहां एक ओर पूआ-पकवान बनाने के लिए सामग्री की खरीदारी कर रहे हैं, वहीं शहर के बड़ा बाजार, मंगल बाजार, फलपट्टी इत्यादि इलाके में लगे बाजार से लोग पिचकारियां, रंग, अबीर, गुलाल व नकाब की खरीदारी जम कर कर रहे हैं.
चौक-चौराहों पर गूंजने लगे होली गीत
आजमनगर. रंगों का त्योहार होली परवान चढ़ने लगी है. इस बार 23 को होली मनाये जाने को लेकर तैयारी की जा रही है. होली को लेकर रंग, अबीर, पिचकारी आदि की स्थायी व अस्थायी दुकानें बाजारों में सज गयी है. किराना व मिठाई दुकानदार भी होली की तैयारी में लगे हैं. परदेस में रहने वाले लोग होली के मौके पर अपने घर लौटने लगे हैं. ट्रेनों में भी होली को लेकर काफी भीड़ देखी जा रही है. हालत यह है कि लोगों को ट्रेनों में आरक्षण नहीं मिल रहा है. गांव की गलियों से लेकर शहर के चौक-चौराहों पर सभी जगह होली के गीत का बजने शुरू हो गये हैं.
होलिका दहन को लेकर संशय : होली के एक दिन पूर्व होलिका दहन का प्रचलन है. फाल्गुन माह के पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है. लोग इस ज्वाला को देखने के बाद ही भोजन करते हैं. इस बार 22 व 23 मार्च दोनों ही दिन पूर्णिमा होने की वजह से होलिका दहन को लेकर संशय की स्थिति है. कैलेंडर के मुताबिक 22 मार्च को होलिका दहन व 23 मार्च को होली है. होलिका दहन में लोग लकड़ियों को एक जगह इकट्ठा करते हैं.
ध्यान रखा जाता है यह स्थान जहां लकड़ियां इकट्ठी हो रही हैं, निवास से पश्चिम दिशा में हो. निश्चित तिथि व मुहूर्त में उस स्थान को पवित्र जल से शुद्ध कर वहां घर से लायी गयी लकड़ियां, उपले आदि स्थापित कर प्रदोष काल में उसकी पूजा करने के बाद अग्नि प्रज्वलित करने का चलन है. इसके साथ ही नयी फसल अर्पित करने की भी परंपरा है. होलिका दहन की ज्वाला में नयी फसल डालने की परंपरा है.
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