मानव के लिए महत्वपूर्ण है सम्यक् दृष्टि रखना - आचार्य महाश्रमण

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मानव के लिए महत्वपूर्ण है सम्यक् दृष्टि रखना – आचार्य महाश्रमण फोटो संख्या-5 कैप्सन-आचार्य महाश्रमण जी प्रतिनिधि, कटिहारआत्मा अध्यात्म जगत का केंद्रीय तत्व है. आत्मा का सीधा संबंध साधना से है. आत्मा के अभाव में साधना का सक्षम आधार ही नहीं रह जाता है. वर्तमान जीवन के बाद कोई जीवन नहीं है अथवा इस जीवन […]

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मानव के लिए महत्वपूर्ण है सम्यक् दृष्टि रखना – आचार्य महाश्रमण फोटो संख्या-5 कैप्सन-आचार्य महाश्रमण जी प्रतिनिधि, कटिहारआत्मा अध्यात्म जगत का केंद्रीय तत्व है. आत्मा का सीधा संबंध साधना से है. आत्मा के अभाव में साधना का सक्षम आधार ही नहीं रह जाता है. वर्तमान जीवन के बाद कोई जीवन नहीं है अथवा इस जीवन से पहले कोई जीवन नहीं था. इस मान्यता के आधार पर ही तो साधना की उपयोगिता पर प्रश्नचिन्ह लग सकता है. तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य महाश्रमण जी ने अहिंसा यात्रा के कटिहार पहुंचने के उपरांत मंगलवार को दूसरे दिन स्थानीय वृंदावन गार्डेंन में अपने प्रवचन के दौरान ये बातें कही. उन्होंने कहा कि जैन दर्शन के अनुसार आत्मा द्रव्यत: शाश्वत है. इसलिए इस जीवन से पहले भी कुछ था और बाद में भी कुछ रहेगा. जीवन को मात्र वर्तमान तक ही सीमित नहीं किया जा सकता है. जब तक आत्मा कर्मबद्ध रहती है, तब वह भव भ्रमण करती रहती है. कभी उसका जन्मोत्सव माना जाता है तो कभी मृत्यु उत्सव. फिर सवाल उठता है कि आत्मा शाश्वत है तो फिर मृत्यु किसकी होती है. मृत्यु के बाद शरीर में कुछ समय के लिए अवस्थित रह सकता है और आत्मा भी कहीं न कहीं अपना अस्तित्व रखती है. समाधान की भाषा में कहा गया है कि आत्मा अलग है व शरीर अलग है. इन दोनों के संयोग को ही जीवन कहा जाता है. आत्मा जैसे ही एक शरीर को छोड़ती है, पुन: दूसरे शरीर को धारण कर लेती है.शहर में रही चहल-पहलतेरापंथ संघ की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निकली अहिंसा यात्रा के कटिहार पहुंचने पर आज दूसरे दिन भी चहल-पहल रही. तेरापंथ समाज व स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़ कर इस सत्संग समागम में भाग लिया. स्थानीय विधायक तारकिशोर प्रसाद, विधान पार्षद अशोक कुमार अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी इस अहिंसा यात्रा को समाज निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए आचार्य महाश्रमण जी के प्रयासों को सराहा है. जनप्रतिनिधियों ने सत्संग में भी हिस्सा लेकर आचार्य के विचारों से अवगत हुए. तोरणद्वार से पटा रहा शहरसद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति का संदेश लेकर पहुंची अहिंसा यात्रा के स्वागत में जगह-जगत तोरणद्वार बनाये गये हैं. दो दर्जन से अधिक तोरणद्वार से पूरा शहर पटा हुआ है. शहर के कपड़ा व्यवसायी राजेंद्र वैद ने बताया कि आचार्य महाश्रमण जी उनके समाज के परम पूज्य गुरुदेव हैं. उनके आगमन से उनका समाज गौरवान्वित हैं व उनके बताये मार्गों पर चलने का संकल्प भी लेते हैं.

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