दुर्लभ है मनुष्य शरीर मिलना : आचार्य महाश्रमन जी

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दुर्लभ है मनुष्य शरीर मिलना : आचार्य महाश्रमन जी कटिहार. जैन तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य महाश्रमन जी ने कहा है कि मनुष्य का जीवन मिलना जिस तरह दुर्लभ है, उसी तरह मनुष्य के भीतर मनुष्यता का आना भी दुर्लभ है. सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति का संदेश लेकर कटिहार पहुंची अहिंसा यात्रा की अगुवाई कर […]

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दुर्लभ है मनुष्य शरीर मिलना : आचार्य महाश्रमन जी कटिहार. जैन तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य महाश्रमन जी ने कहा है कि मनुष्य का जीवन मिलना जिस तरह दुर्लभ है, उसी तरह मनुष्य के भीतर मनुष्यता का आना भी दुर्लभ है. सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति का संदेश लेकर कटिहार पहुंची अहिंसा यात्रा की अगुवाई कर रहे आचार्य महाश्रमन जी ने स्थानीय वृंदावन गार्डन में प्रवचन के दौरान यह उद्गार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि बार-बार जन्म-मृत्यु का चक्र चलता है. पृथ्वी अनंत जीव से भरा-पड़ा है. जीवों में सबसे कम संख्या मनुष्यों की है. मनुष्य जन्म से पहले कहां थे. इसका किसी को पता नहीं है. लेकिन मनुष्य में मनुष्यता का अभाव है. मनुष्य के भीतर मनुष्यता का अभाव देखा जाता है. मनुष्य में दूसरी सबसे दुर्लभ धर्म गाथा नहीं सुनना है. आचार्य महाश्रमन जी ने कहा कि संतों व धर्मों का पाठ होता है. लेकिन मनुष्य उसका श्रवण नहीं करते हैं. बहुत से मनुष्य को धर्म श्रवण का मौका ही नहीं मिलता है. जबकि संतों व साधुओं की बातों को सुनने से मनुष्य को ज्ञान की प्राप्ति होती है. ज्ञान से मनुष्यता आयेगी. समाज में सद्भाव आयेगी. नैतिकता को बल मिलेगा. लेकिन मनुष्य धर्म समागम में नहीं जाते. इसलिए समाज में कटुता, अनैतिकता व विभिन्न तरह की कुरीतियां व्याप्त है.

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