बगैर सुविधा शुल्क दिये नहीं हो रहा है म्यूटेशन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Jul 2019 6:46 AM
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कदवा : ऑनलाइन दाखिल खारिज की व्यवस्था आरंभ होने के बाद से लोग परेशान हो रहे हैं. जमीन का दाखिल खारिज करने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले लोगों का आवेदन संबंधित राजस्व कर्मचारी के पास पहुंचना स्वाभाविक प्रक्रिया है. आरोप है कि संबंधित राजस्व कर्मचारी बगैर सुविधा शुल्क लिये दाखिल खारिज के आगे की […]
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कदवा : ऑनलाइन दाखिल खारिज की व्यवस्था आरंभ होने के बाद से लोग परेशान हो रहे हैं. जमीन का दाखिल खारिज करने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले लोगों का आवेदन संबंधित राजस्व कर्मचारी के पास पहुंचना स्वाभाविक प्रक्रिया है. आरोप है कि संबंधित राजस्व कर्मचारी बगैर सुविधा शुल्क लिये दाखिल खारिज के आगे की प्रक्रिया करना मुनासिब नहीं समझते हैं.
ऐसे में इस तरह के लोग जिन्होंने खरीदी गयी भूमि का दाखिल खारिज करने के लिए आवेदन दिया होता है, वे राजस्व कर्मचारी एवं अंचल कार्यालय का चक्कर लगाते प्रतिदिन नजर आते हैं. ऐसे सैंकड़ों आवेदन दाखिल खारिज के लिए संबंधित राजस्व कर्मचारी के पास लंबित पड़े हैं, जिन्हें आवेदन किये महीनों गुजर गये है.
इसकी मुख्य वजह सुविधा शुल्क नहीं दिया जाना बताया जाता है. हालांकि अंचल के राजस्व कर्मचारी इसका कारण काम की अधिकता बताते हैं. इस कारण दाखिल खारिज में समय अधिक लग जाता है. बता दें कि कदवा अंचल 30 पंचायतों का अंचल है.
यहां राजस्व कर्मचारियों की संख्या आधा दर्जन के आसपास है. आधा दर्जन राजस्व कर्मचारी और 30 पंचायतें बड़ी समस्या हैं. एक-एक राजस्व कर्मचारी के पास दस-दस पंचायतें हैं. इसकी वजह से अंचल पदाधिकारी के जो कर्मचारी जितने चहेते हैं, उन्हें उतना अधिक पंचायत आवंटित किया जाना चर्चा में है.
इतना ही नहीं एक-एक राजस्व कर्मचारी के पास पांच-पांच निजी सहायक स्टाफ के रूप में कार्य करते देखे जा सकते हैं. यह भी अच्छी खासा सुविधा शुल्क वसूल कर अपने घर ले जाते हैं. इनपर कोई अंकुश नहीं है. यदि ऐसा नहीं है तो क्या ऐसे लोग मुफ्त सेवा दे रहे हैं, यह एक बड़ा सवाल है.
अगर कोई व्यक्ति अंचल पदाधिकारी के कार्यालय में कर्मचारी के विरुद्ध आवेदन दे दिया, तो सीओ द्वारा जांच कर कार्रवाई की बात कह उन्हें टाल दिया जाता है. इसका परिणाम है कि लंबे अरसे से राजस्व कर्मचारी के विरुद्ध शिकायत के बावजूद आज तक किसी कर्मचारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. हालांकि सीओ बलराम वरुण कुमार उक्त बातों से अनभिज्ञता जताते हैं.
मोहम्मदपुर पंचायत के संझेली ग्राम में एक व्यक्ति द्वारा बिक्री किये गये भूमि का नामांतरण मोहम्मदपुर के राजस्व कर्मचारी द्वारा एक व्यक्ति को कर दिया जाता है, जबकि उसी व्यक्ति द्वारा दूसरे कई लोगों को बिक्री की गयी भूमि का नामांतरण रद्द कर दिया जाता है. जिन भूमिक्रेता नागेंद्र शर्मा, जवाहर लाल शर्मा, तारिनी शर्मा, चंद्रकिशोर शर्मा, पांडव शर्मा, सीताराम शर्मा, परमेश्वर शर्मा आदि का नामांतरण रद्द किया गया.
उनलोगों ने कहा कि राजस्व कर्मचारी द्वारा आवेदन स्वीकृत किये जाने के नाम पर मोटी रकम की मांग की गयी थी. नहीं दिये जाने पर रद्द कर दिया गया. कई लोगों ने यह भी कहा कि लगान रसीद भी बिना सुविधा शुल्क के नहीं काटा जाता है. सुविधा शुल्क नहीं दिये जाने पर कर्मचारी जांच करने, खतियान लाने आदि की बात कर कह कर टाल देते हैं. ऐसी स्थिति में लोग परेशान नजर आ रहे हैं.
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