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Kaimur News: एक्सप्रेसवे निर्माण के अड़चनों को दूर करने कल आयेंगे मुख्य सचिव

Updated at : 26 Jul 2025 8:54 PM (IST)
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Kaimur News: एक्सप्रेसवे निर्माण के अड़चनों को दूर करने कल आयेंगे मुख्य सचिव

एक्सप्रेस में निर्माण को लेकर जमीनी हकीकत को जानेंगे मुख्य सचिव

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भभुआ कार्यालय. मुख्य सचिव के द्वारा प्रत्येक सप्ताह बनारस-रांची कोलकाता एक्सप्रेसवे के निर्माण की दिशा में कार्य प्रगति की समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाती है. लेकिन, हाल के दिनों में अधिकारियों के काफी प्रयास के बावजूद एक्सप्रेसवे निर्माण का कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है. दो महीने पहले एक्सप्रेस में निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि पर साफ सफाई व रूट लाइनिंग का काम शुरू हुआ था. लेकिन, कुछ ही दिन बाद जमीन मालिकों के द्वारा मुआवजा को लेकर काम बंद कर दिया गया. इसके बाद से अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है. प्रत्येक सप्ताह मुख्य सचिव के द्वारा एक्सप्रेसवे निर्माण व जमीन अधिग्रहण के प्रगति की समीक्षा की जाती है. लेकिन, इस दिशा में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा के बावजूद अपेक्षित प्रगति नहीं होने के बाद मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा सोमवार को स्वयं कैमूर आ रहे हैं. वह एक्सप्रेसवे निर्माण व जमीन अधिग्रहण में आ रही अड़चन की जमीनी हकीकत की जानकारी लेंगे. इसके लिए वह समाहरणालय में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के साथ-साथ एक्सप्रेसवे निर्माण वाले जमीन पर जाकर जमीन मालिकों के साथ बातचीत कर जमीन अधिग्रहण में आ रही समस्याओं की जानकारी भी ले सकते हैं. इधर, मुख्य सचिव के कार्यालय से कैमूर डीएम को पत्र देकर मुख्य सचिव के कैमूर आने व एक्सप्रेसवे निर्माण सहित विकास के कार्यों व विधि व्यवस्था की समीक्षा किये जाने की जानकारी दी गयी है. इसके बाद जिला प्रशासन मुख्य सचिव के आगमन व समीक्षा बैठक को लेकर तैयारी में जुट गया है.

जिला प्रशासन की कार्रवाई का आदेश भी किसानों के ऊपर दिखा बेअसर

एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए अधिग्रहित की गयी जमीन पर धान की खेती नहीं करने के प्रशासन के आदेश का कोई असर जमीन मालिकों के ऊपर देखने को नहीं मिल रहा है. जिला प्रशासन के द्वारा पत्र जारी कर आदेश दिया गया था कि अधिग्रहीत जमीन पर अगर जमीन मालिकों के द्वारा खेती की जाती है, तो उनके ऊपर कार्रवाई की जायेगी. लेकिन, इस आदेश को नजरअंदाज करते हुए जमीन मालिकों के द्वारा सीवो से लेकर रामपुर तक अधिग्रहित हुए अधिकतर जमीन पर धान की रोपनी कर दी गयी है. जमीन मालिकों का स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार के द्वारा हमारे जमीन का मुआवजा राशि हमारे खाते में नहीं भेज दिया जाता है, तब तक उन्हें अपने जमीन पर काम नहीं करने देंगे. वहीं, जमीन मालिकों की एक बड़े वर्ग का यह भी कहना है कि मुआवजे का दर निर्धारित किया गया है. वह जब तक सभी जगह एक तरह का नहीं किया जाता है, तब तक वह अपनी जमीन एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए नहीं देंगे. इसी बात पर अडिग जमीन मालिकों के द्वारा प्रशासन के लाख कार्रवाई व धमकी के बावजूद अधिग्रहित जमीन पर धान की खेती कर दी गयी है.

जमीन मालिक कागजात जमा करने में भी नहीं दिख रहे हैं रुचि

जमीन मालिक अधिग्रहित होने वाले जमीन का मुआवजा राशि लेने के लिए जमीन का कागजात जमा करने में भी रुचि नहीं दिख रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि उनके अपेक्षा के अनुकूल उन्हें मुआवजा नहीं दिया जा रहा है, जबकि पिछले दिनों मुआवजे को लेकर लगभग दो साल तक आंदोलन के बाद आर्बिट्रेटर के यहां उक्त मामले में सुनवाई के बाद सर्किल रेट को दोगुना कर दिया गया था. इसके बाद सभी जमीन मालिकों का मुआवजा दोगुना हो गया है. इसके बावजूद जमीन मालिकों का कहना है कि अभी जो मुआवजा करने के बाद निर्धारित किया गया है, वह भी जमीन के वास्तविक मूल्य से काफी कम है. वहीं, सबसे बड़ी आपत्ति जमीन मालिकों की यह है कि भभुआ के आसपास जमीन की कीमत काफी अधिक है, जबकि भभुआ के बगल में स्थित गांव में जमीन की कीमत काफी कम निर्धारित की गयी है. जमीन का किस्म पैदावार एक तरह का होने के बावजूद मुआवजे की राशि में भारी अंतर है. इसके कारण जमीन के मालिक मुआवजा पर असंतोष जताते हुए अपने कागजात मुआवजा की राशि प्राप्त करने के लिए जमा नहीं कर रहे हैं. जबकि, तेजी से जमीन मालिकों के खाते में मुआवजे की राशि भेजी जाये. इसके लिए जमीन मालिकों के द्वारा कागजात जमा नहीं करने की स्थिति में उनके घर पर भी कागजात लेने के लिए राजस्व कर्मचारियों को भेजा जा रहा है. इसके बाद भी जमीन मालिक मुआवजा की राशि प्राप्त करने के लिए कागजात देने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं.

= एक्सप्रेसवे के निर्माण में जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी बाधाबनारस रांची कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है. इसके निर्माण की प्राथमिकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक्सप्रेसवे निर्माण के प्रगति की समीक्षा प्रत्येक सप्ताह सीधे मुख्य सचिव के द्वारा डीएम के साथ की जाती है. पिछले ढाई सालों से सरकार के वरीय अधिकारियों के साथ-साथ जिला प्रशासन पूरी ताकत से एक्सप्रेसवे निर्माण का कार्य शुरू करने में लगी हुई है. वहीं दूसरी तरफ जमीन के मालिक भी लंबे समय से आंदोलन करते रहे हैं. जहां पिछले दिनों जिला प्रशासन ने जब काफी तत्परता से काम किया, तो जमीन का मुआवजा दोगुना होने के बाद एक्सप्रेसवे निर्माण की दिशा में काम शुरू हो गया था. लेकिन, दोगुना मुआवजा के भुगतान की गति काफी धीमी होने के कारण जमीन मालिकों के द्वारा काम रुकवा दिया गया. उनका कहना था कि जब तक उनके खाते में मुआवजे की राशि नहीं आ जाती है, तब तक वह अपनी जमीन पर काम नहीं करने देंगे. इसी बीच चांद चैनपुर रामपुर के किसान इस बात को लेकर नाराज हो गये कि उनके जमीन का मुआवजा भभुआ के जमीन के मुआवजे से काफी कम है. इसलिए वह अपनी जमीन मुआवजा के निर्धारित हुए नयी दर पर भी नहीं देंगे. कुल मिलाकर देखें, तो भभुआ के आसपास के जमीन मालिक इस बात से नाराज थे कि उनके खाते में मुआवजे की राशि नहीं आयी और उनके जमीन पर एक्सप्रेस पर निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है. एक्सप्रेसवे निर्माण का काम शुरू हो जाने के बाद उन्हें अपने जमीन पर जाने नहीं दिया जायेगा और मुआवजा देने में भी विलंब किया जायेगा. ऐसे में जब तक हमारे खाते में पैसा नहीं आता तब तक वह अपनी जमीन किसी कीमत पर एक्सप्रेस में निर्माण के लिए नहीं देंगे. कुल मिलाकर कैमूर जिले के पांचों प्रखंड में कहीं भी एक्सप्रेस में निर्माण का काम वर्तमान समय में शुरू नहीं है. वहीं, दूसरी तरफ किसानों के द्वारा अधिग्रहित जमीन पर धान की खेती कर दी गयी है, जिसने जिला प्रशासन की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है. इन्हीं समस्याओं को प्रतिदिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनने के बाद मुख्य सचिव इसकी जमीनी हकीकत को जानने के लिए सोमवार को कैमूर आ रहे हैं.

= पिछले दिनों कमिश्नर के आने के बावजूद कार्य में नहीं हुई कोई प्रगतिपिछले दिनों एक्सप्रेस वे निर्माण में प्रगति लाने के उद्देश्य से पटना के आयुक्त डॉ चंद्रशेखर सिंह भी कैमूर आये थे. उन्होंने किसानों के साथ बैठक भी की थी. इसके बाद अधिकारियों के साथ उन्होंने समीक्षा भी की. उन्होंने किसानों को अपने स्तर से काफी समझाने का भी प्रयास किया. लेकिन, इसका भी कोई खास असर कार्य के प्रगति में देखने को नहीं मिला. इसके बाद एक्सप्रेस में निर्माण में प्रगति को लेकर मुख्य सचिव के यात्रा को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

= विकास योजना व विधि व्यवस्था की भी करेंगे समीक्षामुख्य सचिव के द्वारा अपने कैमरा आगमन पर एक्सप्रेसवे निर्माण के साथ-साथ जिले में चल रहे विकास की योजनाओं व विधि व्यवस्था की भी समीक्षा की जायेगी. इस बैठक में जिले के सभी विभागों के जिलास्तरीय पदाधिकारी अपने अपने विभाग में चल रही योजनाओं की प्रगति के साथ रिपोर्ट लेकर उपस्थित होंगे, जिस पर मुख्य सचिव बिंदुवार समीक्षा करेंगे.

इनसेटअकोढ़ी में किसानों ने अपना कागजात देने से इंकार किया, खाली हाथ लौटे पदाधिकारीफोटो 40, शिविर में उपस्थित किसान व पदाधिकारी.

रामपुर. किसानों से कागजात लेने के लिए पंचायत भवन अकोढ़ी में शनिवार को शिविर का आयोजन अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी आदित्य कुमार व सीओ अनु कुमारी के उपस्थित में किया गया. जहां किसानों ने अपना कागजात देने से इन्कार किया. इस स्थिति में शिविर में आये पदाधिकारी व कर्मी खाली हाथ लौट गये. किसान तिलेश्वर दुबे, केश नाथ साह, सोनू सिंह आदि ने बताया कि क्षेत्र के दर्जनों किसानों के भूमि से होकर भारत माला एक्सप्रेस वे बनवाया जाना है. संबंधित किसानों को पहले के निर्धारित दर से दुगुना राशि देने के लिए आर्बिट्रेटर द्वारा आदेश दिया गया है. उसके हिसाब से राशि प्राप्त करने के लिए क्षेत्र के 39 किसानों ने भूअर्जन कार्यालय में आवेदन दो माह पहले से दिया है, उन किसानों को पैसा नहीं मिला, तो हमलोग कैसे विश्वास करें. वहीं, किसानों ने यह भी कहा कि यही मामला भभुआ प्रखंड के सीओ गांव का भी है. लगभग दो सौ किसान अपना कागजात जमा किये हैं. उन किसानों को भी मुआवजा नहीं मिला, तो क्या पता कि कागजात जमा करने के बाद हम लोगों को पैसा मिल जायेगा. कहीं, ऐसा न हो कि कागजात जमा करा कर पैसा भुगतान करने से पहले ही हमलोगों के भूमि पर मशीन चला कर अधिग्रहण कर लें. इससे हमलोगों का फसल क्षतिग्रस्त हो जायेगा. कुछ किसानों ने यह भी कहा कि हम किसानों की भूमि अधिग्रहण का मुआवजा देने का निर्देश मध्यस्थता कोर्ट से है जिनका भूमि भारत माला एक्सप्रेस वे पथ में जा रहा है. आपको बता दें कि उक्त पथ क्षेत्र के पसाई, मईडाण, चमरियांव, नजरों, करिगाई, अकोढ़ी, टेटिहां सहित एक दर्जन से अधिक मौजा से होकर बनवाया जाना है. सीओ अनु कुमारी ने बताया कि शिविर में किसी किसान ने मुआवजा पाने के लिए कागजात जमा नहीं किया है. अब तक किसान ने एलपीसी बनवाने के लिये ऑफलाइन 114 आवेदन दिये थे, जिसमें 109 आज तक निर्गत कर दिया गया. वहीं, ऑनलाइन 50 आवेदन प्राप्त है. वह भी निर्गत कर दिया गया है. यह भी बोला गया है कि जिसका कागजात सही है उसका भुगतान हो रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANCHDEV KUMAR

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