आरटीइ के तहत निजी विद्यालयों में 1220 बच्चों का भविष्य संवरेगा
Published by : VIKASH KUMAR Updated At : 27 Feb 2026 12:03 AM
गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले छात्रों को 10 मार्च तक होगा नामांकन
गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले छात्रों को 10 मार्च तक होगा नामांकन डीपीओ ने जारी की चयनितों की सूची, अभिभावकों के मोबाइल पर भेजे गये संदेश भुआ नगर. शिक्षा का अधिकार (आरटीइ) अधिनियम के तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रहने वाले परिवारों के बच्चों को निजी विद्यालयों में निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. इसी क्रम में जिले में 1220 पात्र छात्रों की सूची प्रकाशित कर दी गयी है. इन छात्रों का नामांकन 24 फरवरी से 10 मार्च तक निर्धारित अवधि में निजी विद्यालयों में कराया जायेगा. सूची जारी होने के बाद अभिभावकों में राहत व उत्साह का माहौल देखा जा रहा है, क्योंकि इससे उनके बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सुविधाएं मिल सकेंगी. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा अभियान) विकास कुमार डीएन द्वारा आरटीइ के अंतर्गत चयनित छात्रों की सूची सार्वजनिक की गयी है. इसके साथ ही जिले के सभी संबंधित निजी विद्यालय संचालकों को ज्ञान दीप पोर्टल के माध्यम से यह जानकारी दे दी गयी है कि उनके विद्यालय में कितने छात्रों का नामांकन किया जाना है. इस व्यवस्था से पारदर्शिता बनी रहेगी व विद्यालयों को पहले से ही आवश्यक तैयारियां करने में सुविधा होगी. अधिकारियों के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया को सुचारु एवं समयबद्ध तरीके से पूरा कराने के लिए शिक्षा विभाग सतत निगरानी रखेगा. नामांकन की प्रक्रिया होगी सरल आरटीइ के तहत चयनित सभी छात्रों के अभिभावकों के मोबाइल नंबर पर संदेश भेजकर नामांकन से संबंधित जानकारी उपलब्ध करा दी गयी है. संदेश में विद्यालय का नाम, नामांकन की तिथि, आवश्यक दस्तावेज तथा संपर्क विवरण शामिल है. इससे अभिभावकों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे व उन्हें स्पष्ट जानकारी एक ही माध्यम से मिल सकेगी. विभाग का कहना है कि यदि किसी अभिभावक को तकनीकी या दस्तावेज संबंधी परेशानी होती है, तो वे संबंधित प्रखंड शिक्षा कार्यालय या विद्यालय से संपर्क कर सकते हैं. शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल आरटीइ के अंतर्गत निजी विद्यालयों में नामांकन की यह प्रक्रिया शिक्षा के अधिकार को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है. इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन व प्रतिस्पर्धी माहौल मिलेगा. शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से विद्यालयों में सामाजिक समावेशन को बढ़ावा मिलेगा व बच्चों के भविष्य की संभावनाएं भी सशक्त होंगी.
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