Kaimur News : मोहनिया के अब्दुल कलाम पुस्तकालय में रखी लाखों की पुस्तकें हो रहीं खराब

Edited by PANCHDEV KUMAR
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तत्कालीन जल संसाधन मंत्री जगदानंद सिंह ने एक जुलाई 2001 को किया था उद्घाटन

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मोहनिया शहर. ऑनलाइन के चकाचौंध के बीच मोहनिया में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के नाम पर खुले पुस्तकालय बेकार हो रहा है. शहर में एक नहीं, दर्जनों की संख्या में चल रही ऑनलाइन लाइब्रेरी के आगे अब इसे कोई पूछने वाला नहीं है. पुस्तकालय का भवन पूरी तरह से जर्जर हो गया है. छत से पानी टपक रहा है़ ऐसे में चारों तरफ घास ही घास उग आयी हैं. सबसे अहम बात है की कभी किताबों के सौख रखने वाले डॉ अब्दुल कलाम के नाम पर खुले पुस्तकालय से लोगों में खुशी थी, लेकिन पिछले कई वर्ष से पुस्तकालय विरान पड़ा है. स्थानीय प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि की इस पर नजर नहीं है. मालूम हो की मोहनिया शहर में कई शिक्षण संस्थान है, जिसमें बच्चों को पढ़़ाने के लिए मोहनिया में एक भी पुस्तकालय नहीं है. काफी प्रयास के बाद जगजीवन मैदान परिसर में पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर पुस्तकालय खुला था़ इसके कुछ दिन बाद तक संचालन हुआ़ लेकिन, फिलहाल कई वर्षों से बंद पड़ा है. अब ऑनलाइन पुस्तकालय खुल जाने के कारण किसी की इस पर नजर नहीं है. पुस्तकालय में रखीं लाखों रुपये की पुस्तकें खराब हो रही हैं, तो कभी बैठकर गुलजार रहने वाला पुस्तकालय का हाल अब सन्नाटा पसरा हुआ है़ कुर्सी और टेबल सड़ रहे हैं.

पुस्तकालय में अब नहीं होता है झंडोत्तोलन

पूर्व राष्टपति डॉ अब्दुल कलाम के नाम पर पुस्तकालय खोला गया था़ इसमें मोहनिया के हेडमास्टर पद से सेवानिवृत हुए चंद्रजीत सिंह ने पुस्तकालय संचालन को लेकर काफी उत्सुकता दिखाई थी़ इसमें काफी दिन तक पुस्तकालय में कार्यक्रम से लेकर 26 जनवरी व 15 अगस्त को झंडोत्तोलन किया जाता था़ लेकिन, बढ़ती उम्र व घटते उत्सुकता के कारण अब किसी बुद्विजीवी द्वारा पहल नहीं की गयी जो, अब कई वर्षो से पुस्तकालय बंद पड़ा हैं. अब तो झंडोत्तोलन तक नहीं होता है.

एक जुलाई 2001 को खुला था पुस्तकालय

तत्कालीन जल संसाधन मंत्री जगदानंद सिंह ने एक जुलाई 2001 को अब्दुल कलाम पुस्तकालय का उद्घाटन किया था. अंदर बैठ कर लोगों को पढ़ने की व्यवस्था की गयी हैं. लेकिन, अब कई वर्षो से बंद रहने से पूरा अंदर रखा हुआ़ किताबें खराब हो रही हैं. तत्कालीन डीएम मिहिर कुमार के कार्यकाल में जब पुस्तकालय खुला, तो काफी लोगो में खुशी थी़ कुछ दिन संचालन भी हुआ. लेकिन बढ़ते ऑनलाइन की दुनिया के बीच लोगों की रूचि कम होने व प्रशासनिक एवं सामाजिक शिथिलता के कारण बंद हो गया, जो अब पूरी तरह से बंद ही है.

क्या कहते हैं शिक्षाविद्पुस्तकालय, तो अब नये खुल भी नहीं रहे हैं. लेकिन, मोहनिया में 24 वर्षो से खुला हैं, तो स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधि को पहल कर चालू कराना चाहिए, ताकि बच्चों के साथ शिक्षा से जुड़े लोग पुस्तकालय में जाकर अच्छी-अच्छी पुस्तकें पढ़ सकें. पुस्तकालय के चालू करने के लिए प्रयास करूंगी.

नीलम पांडेय, शिक्षिका, डीएवी, रतवार

बंद पड़े पुस्तकालय को चालू करना चाहिए, ताकि आज के बच्चे पुस्तकालय क्या होता हैं, इसके बारे में तो जाकर देखेंगे़ आज लोग मोबाइल से ही जो जनाना होता है़ जानकारी कर लेते है. प्रशासन को चाहिए कि बंद पड़े पुस्तकालय को चालू कराया जाये. पुस्तकालय को चालू करना चाहिए़

आलोक सिंह,डाइरेक्टर, कृष्णा सेंट्रल स्कूल

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