सूर्यपुरा पुल के पास सड़क पर बंदरों के आतंक से राहगीर परेशान

Edited by PANCHDEV KUMAR
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कंदमूल खाने वाले बंदर हरे घास खाकर बुझा रहे पेट की भूख

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रामगढ़. मोहनिया-बक्सर पथ पर सूर्यपुरा पुल के पास मुख्य सड़क पर बंदरों का आतंक काफी बढ़ गया है. इस पथ से गुजरने वाले बाइक सवार, साइकिल सवार, पैदल चलने वाले राहगीर व बच्चे कब इनके शिकार बन जाये, कहना मुश्किल है. वन स्थल को छोड़ मैदानी भाग में भटक कर आये बेजुबान बंदरों की पीड़ा भी कुछ कम नहीं दिखती. जंगलों में कंदमूल खाकर आजादी से अपना जीवन व्यतीत करने वाले बंदर पेट की भूख मिटाने के लिए छोटे-छोटे बच्चों के साथ सड़क किनारे हरे घास खाकर अपनी भूख मिटाने को विवश हैं. ऐसे में भूख की पीड़ा से तड़प रहे वन्य जीव सड़क से गुजर रहे राहगीरों का सामान झपट कर बर्बाद कर दे रहे हैं. वन्य प्राणियों की इस वेदना को लेकर वन विभाग के पदाधिकारी जहां मूकदर्शक बने हैं. वहीं, उक्त पथ से प्रत्येक दिन मुख्य सड़क से जिला मुख्यालय जाने वाले हाकिमों की नजर भी बेजुबान वन्य जीवों की वेदना पर नहीं पड़ रही है. # पांच वर्ष पहले वन विभाग ने रोहिया गांव से एक दर्जन बंदरों का किया था रेस्क्यू धरातल पर नजर डालें तो पांच वर्ष पूर्व 2020 के अक्त्तूबर माह गांव में बंदरों के आतंक से परेशान रोहिया गांव के ग्रामीणों को जिला मुख्यालय से आये वन विभाग की छह सदस्यीय टीम ने गांव पहुंच गांव के आसपास से 12 बंदरों को पकड़ कर पिजड़े में डालते हुए वन विभाग ले जाने का काम किया था. इसके बाद ग्रामीणों को बंदरों के आतंक से निजात मिली थी. बंदरों के आतंक से परेशान बिशनपुरा के लोगों ने 2020 में चुनाव बहिष्कार का किया था एलान रामगढ़ क्षेत्र में बंदरों के आतंक से परेशान बिशनपुरा गांव के लोगों ने वन विभाग के ढुलमुल रवैये व जिला प्रशासन की उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने वर्ष 2020 में चुनाव के दौरान चुनाव बहिष्कार करने का ऐलान कर लिया था. ग्रामीणों की जिद थी कि वर्षों से पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बाद भी बंदरों के आतंक से निजात नहीं दिलायी जा रही है़ किंतु, मतदान के कुछ दिन पूर्व जिले व अनुमंडल के पदाधिकारियों की टीम उक्त गांव में पहुंची और कुछ दिनों के भीतर बंदरों से निजात दिलाने का वादा कर ग्रामीणों से मतदान करवाने का काम किया. क्या कहते हैं डीएफओ डीएफओ चंचलम प्रकाशम ने कहा बंदर वन के साथ मैदानी भाग में भी रहते हैं, कुछ लोगों के इनके साथ धार्मिक आस्था भी जुड़ी हुई है. फिर भी अगर गांव के अंदर जाकर यह उत्पात मचा रहे हैं तो इनका रेस्क्यू करवाया जायेगा.

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