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पूरा गांव खाट पर सो रहा होता है, तभी विद्यालयों में बज जा रही है घंटी

Updated at : 03 Jan 2026 5:01 PM (IST)
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पूरा गांव खाट पर सो रहा होता है, तभी विद्यालयों में बज जा रही है घंटी

कड़ाके की ठंड में 6:30 बजे स्कूल पहुंचने को मजबूर शिक्षक व छात्र छात्राएं

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= कड़ाके की ठंड में 6:30 बजे स्कूल पहुंचने को मजबूर शिक्षक व छात्र छात्राएं = शीतलहर व कड़ाके की ठंड के बीच समय परिवर्तन करने की उठी मांग = जिले के दो दर्जन विद्यालयों में दो शिफ्टों में होती है पढ़ाई, ठंड में पठन-पाठन प्रभावित भभुआ नगर. जिले में जारी कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. सुबह के समय तापमान लगातार गिर रहा है. कोहरा व ठंडी हवाओं के बीच लोग अभी खाट तक नहीं छोड़ पा रहे हैं, लेकिन ऐसे हालात में भी जिले के करीब दो दर्जन विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, शिक्षक व छात्र-छात्राएं सुबह 6.30 बजे ही विद्यालय पहुंचने को विवश हैं. ठंड से ठिठुरते हुए बच्चे व शिक्षक जैसे-तैसे स्कूल तो पहुंच जा रहे हैं, लेकिन दिनभर कंपकंपी के कारण पठन-पाठन संभव नहीं दिख रहा है. इस समय जिलेभर में ठंड का असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है. शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के कई विद्यालयों का संचालन दो शिफ्टों में किया जा रहा है. पहली शिफ्ट सुबह 6.30 बजे से 11.00 बजे तक व दूसरी शिफ्ट 11.00 बजे से 4.00 बजे तक संचालित हो रही है. ठंड को देखते हुए प्रशासन की ओर से कक्षा 8 से 12वीं तक के छात्रों का शिफ्ट सुबह कर दिया गया है, जबकि छोटे बच्चों के लिए विद्यालय का समय 11.00 बजे से 4.00 बजे तक निर्धारित किया गया है. बावजूद इसके सुबह की पहली शिफ्ट में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं व शिक्षक भीषण ठंड में किसी तरह विद्यालय पहुंचने को विवश हैं. सुबह 6.30 बजे जब विद्यालयों में घंटी बजती है, उस समय सड़कों पर आधी रात जैसा सन्नाटा पसरा रहता है. कई छात्र अलाव तापते हुए या ठंड से कांपते हुए विद्यालय पहुंचते हैं. शिक्षकों का कहना है कि ठंड के कारण न केवल बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है, बल्कि पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. छोटे बच्चों के लिए इतनी सुबह ठंड में घर से निकलना जोखिम भरा भी साबित हो सकता है. वहीं, छात्र-छात्राओं का कहना है कि सुबह-सुबह ठंड इतनी ज्यादा होती है कि हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं. कई बार विद्यालय पहुंचने तक हालत खराब हो जाती है. शिक्षक भी ठंड में लंबी दूरी तय कर विद्यालय पहुंचने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं. उनका कहना है कि ठंड के इस प्रकोप को देखते हुए कम से कम विद्यालय के समय में अस्थायी बदलाव किया जाना चाहिए. इसको लेकर छात्र-छात्राओं, शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों ने जिला पदाधिकारी व जिला शिक्षा पदाधिकारी से विद्यालय के समय में परिवर्तन करने की गुहार लगायी है. उन्होंने मांग की है कि ठंड कम होने तक सुबह के शिफ्ट को कुछ देर से शुरू किया जाये या अस्थायी रूप से एक शिफ्ट में ही विद्यालय का संचालन किया जाये, ताकि बच्चों व शिक्षकों को राहत मिल सके. क्या कहते हैं जिला शिक्षा पदाधिकारी इस संबंध में पूछे जाने पर जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार ने बताया कि कड़ाके की ठंड के कारण शिक्षक व छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी हो रही है, यह उन्हें भी ज्ञात है. उन्होंने कहा कि सरकारी निर्देश के अनुसार विद्यालय का न्यूनतम संचालन समय पांच घंटे सुनिश्चित करना अनिवार्य है. जिले में विद्यालय भवनों की कमी के कारण लगभग दो दर्जन विद्यालयों का संचालन दो शिफ्टों में किया जा रहा है. ऐसे में समय सारिणी में पूरी तरह बदलाव करना फिलहाल चुनौतीपूर्ण है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा व स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए ठंड की स्थिति को देखते हुए विद्यालय संचालन समय में आवश्यक संशोधन पर विचार किया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH KUMAR

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