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साइबर अपराधियों के लिंक पर क्लिक करते ही खाते से उड़ाये 9600 रुपये

लो, हम प्रखंड कार्यालय के रूम नंबर 12 से दीपक वर्मा बोल रहे हैं मेरी बात बघिनी के सरदार राम से हो रही है. जी सर, ऐसा है हाल में आपकी पत्नी ने जिस बच्ची को सरकारी अस्पताल में जन्म दिया है, उसकी राशि आपके खाते में भेजना है.

मोहनिया सदर. हैलो, हम प्रखंड कार्यालय के रूम नंबर 12 से दीपक वर्मा बोल रहे हैं मेरी बात बघिनी के सरदार राम से हो रही है. जी सर, ऐसा है हाल में आपकी पत्नी ने जिस बच्ची को सरकारी अस्पताल में जन्म दिया है, उसकी राशि आपके खाते में भेजना है. अपना गूगल पे फोन नंबर बताइएं और नंबर बताते ही सरदार के मोबाइल पर एक लिंक आता है और दीपक वर्मा ने लिंक पर क्लिक करने की बात कहीं, फिर क्या था सरदार ने मोबाइल पर आये लिंक पर जैसे ही क्लिक किया, खाते से 9600 रुपये उड़ गये. जैसे ही खाता से रुपये साइबर अपराधियों ने उड़ाया, उनके जिस मोबाइल नंबर 8789011690 से सरदार को फोन किया गया था, वह व्यस्त बताने लगा. सरदार को जैसे ही खाते से 9600 रुपये कटने का मैसेज मोबाइल पर मिला, वह दौड़ते भागते प्रखंड कार्यालय के रूम नंबर 12 में पहुंचा व दीपक वर्मा नामक व्यक्ति की जानकारी ली, तो पता चला यहां दीपक वर्मा नाम का कोई कर्मी कार्यरत ही नहीं है, फिर क्या सरदार हाथ मलते रह गये और खाते से मेहनत की कमाई के रुपये उड़ गये. कुछ देर बाद उक्त मोबाइल नंबर 8789011690 से सरदार के पड़ोसी कांशी कुमार को फोन आता है, लेकिन कांशी उस समय बाइक चला रहे होते हैं. इसकी वजह से साइबर अपराधी का फोन रिसीव नहीं हो सका. बघिनी से मोहनिया की दूरी आठ किमी तय करने के बीच साइबर अपराधियों ने उसी मोबाइल नंबर से कांशी को लगातार तीन बार फोन किया, लेकिन कांशी का भाग्य अच्छा था कि उसने फोन रिसीव नहीं किया, जैसे कांशी मोहनिया पहुंचता है सरदार का फोन आता है और उसने कांशी को आपबीती बताया. इतना सुनने के बाद जब कांशी से सरदार को आये हुए मोबाइल का नंबर लिया, तो देखा उसी नंबर से उसके मोबाइल पर भी तीन बार फोन आया था. कांशी ने जब उक्त मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, तो उससे भी बेटी के जन्म के बाद खाते में रुपये भेजने की बात कही गयी. लेकिन, कांशी तो सतर्क हो चुका था. इसकी भनक साइबर अपराधियों को लग गयी और उन लोगों ने फोन काट दिया. कुछ दिन पहले ही कांशी की पत्नी ने भी अनुमंडलीय अस्पताल में बेटी को जन्म दिया था. # साइबर अपराधियों को कैसे पता किसने-किसने दिया है बच्चियों को जन्म यह तो सच है कि साइबर अपराधी किसी के भी मोबाइल नंबर पर संपर्क करते रहते है, लेकिन अब सवाल यह उठता है कि आखिर उन लोगों को ही साइबर अपराधियों का फोन क्यों आ रहा है, जिनकी पत्नियों ने हाल के दिनों में अनुमंडलीय अस्पताल में बच्चियों को जन्म दिया है. कांशी कुमार कहते है कि आखिर साइबर अपराधियों को कैसे मालूम है कि हम और सरदार दोनों एक गांव के है और हम दोनों की पत्नियों ने सरकारी अस्पताल में बेटियों को जन्म दिया है. कहीं अस्पताल के किसी कर्मी का साइबर अपराधियों से साठगांठ तो नहीं है. लेकिन, मामला चाहे जो भी हो यह जांच का विषय जरूर है. हालांकि, पुलिस हमेशा लोगों को साइबर अपराधियों से सतर्क रहने की सलाह देती है. इसके बावजूद लोग साइबर अपराधियों की जाल में फंस ही जा रहे हैं

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