बढ़ौना के प्रधानाध्यापक से जवाब-तलब, शिक्षक संघ और शिक्षा विभाग आया आमने-सामने

KAIMUR NEWS.चैनपुर प्रखंड के मध्य विद्यालय बढ़ौना के छात्र-छात्राएं शैक्षणिक परिभ्रमण के लिए पटना जा रहे थे. इसी दौरान बस व ट्रक की टक्कर में दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें दो शिक्षकों की मौत हो गयी, जबकि तीन शिक्षक व कई बच्चे घायल हो गये.
घायल प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण पर संघ भड़का
संघ के नेताओं ने कहा- शोक के घड़ी में भी कार्रवाई क्यों
भभुआ नगर.
चैनपुर प्रखंड के मध्य विद्यालय बढ़ौना के छात्र-छात्राएं शैक्षणिक परिभ्रमण के लिए पटना जा रहे थे. इसी दौरान बस व ट्रक की टक्कर में दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें दो शिक्षकों की मौत हो गयी, जबकि तीन शिक्षक व कई बच्चे घायल हो गये. घटना के बाद बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ ने गहरा शोक व्यक्त किया है. संघ के जिला अध्यक्ष संतोष कुमार प्रसाद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि ऐसी दुखद घड़ी में शिक्षा विभाग द्वारा प्रधानाध्यापक से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगना अमानवीय है.उन्होंने बताया कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक विपिन पांडेय स्वयं गंभीर रूप से घायल हैं व इलाजरत हैं. ऐसे में उनसे जवाब-तलब व विभागीय कार्रवाई की चेतावनी देना शिक्षा विभाग की संवेदनहीनता को दर्शाता है.विभाग पर तानाशाही रवैये का आरोप
जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रिंट मीडिया में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कार्रवाई की बात कही है, जो अन्यायपूर्ण है. उनका कहना है कि घायल शिक्षक जीवन-मृत्यु से जूझ रहे हैं. ऐसे समय में कार्रवाई की चेतावनी देना शिक्षकों का मनोबल तोड़ने जैसा है. संघ ने कहा कि जिला शिक्षा पदाधिकारी को पहले मृत शिक्षकों के परिजनों से मिलकर सांत्वना देनी चाहिए व घायलों का हालचाल लेकर हरसंभव सहयोग का भरोसा देना चाहिए. संघ ने इसे शिक्षा विभाग का तानाशाही रवैया बताते हुए कहा कि शोक की इस घड़ी में संयम व संवेदनशीलता अपेक्षित है, न कि दंडात्मक रुख अपनाना चाहिए.
40 लाख मुआवजा व आश्रितों को नौकरी देने की मांग
संघ ने आरोप लगाया कि शैक्षणिक परिभ्रमण की राशि अभी तक विद्यालयों को उपलब्ध नहीं करायी गयी थी. इसके बावजूद 21 फरवरी तक हर हाल में परिभ्रमण कराने का दबाव बनाया गया और नहीं कराने पर निलंबन की चेतावनी दी गयी. संघ के अनुसार लेखा व योजना पदाधिकारी ने बैठक कर प्रधानाध्यापकों पर दबाव बनाया. बिना राशि उपलब्ध कराये बच्चों को परिभ्रमण पर भेजना सरकार की गाइडलाइन के विरुद्ध है.संघ ने मांग की है कि मृत शिक्षकों के परिजनों को 40 लाख रुपये मुआवजा व आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाये. साथ ही चेतावनी दी कि यदि शिक्षकों पर कार्रवाई की गयी तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा. संघ का कहना है कि जिम्मेदारी तय होनी चाहिये, लेकिन दुख की घड़ी में संवेदनहीन निर्णय शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
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