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Kaimur News : एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण में मुख्य सचिव के सामने होंगी तीन चुनौतियां

Updated at : 27 Jul 2025 9:21 PM (IST)
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Kaimur News : एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण में मुख्य सचिव के सामने होंगी तीन चुनौतियां

मुआवजा में असमानता के कारण अधिकतर किसान जमीन देने को नहीं हैं तैयार

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भभुआ कार्यालय. सूबे के मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा रविवार को कैमूर पहुंचे. मुख्य सचिव सोमवार को समाहरणालय के सभाकक्ष में जमीन अधिग्रहण सहित अन्य बिंदुओं पर समीक्षा करेंगे. माना यह जा रहा है की मुख्य सचिव का कैमूर दौरा महत्वपूर्ण रूप से एक्सप्रेसवे के निर्माण में आ रही बाधा को दूर करने के लिए निर्धारित है़ मुख्य सचिव इस दौरान सबसे अधिक जमीन अधिग्रहण में आ रही समस्या की जमीनी हकीकत जानने व उस समस्या को दूर करने का प्रयास करेंगे़ इसके लिए हो सकता है कि वह एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए अधिग्रहित होने वाली जमीन पर जाकर जमीन मालिकों के साथ बातचीत करें व समस्या का समाधान निकालने की कोशिश करें. अभी तक के जिला प्रशासन व जमीन मालिकों के बीच अधिग्रहण को लेकर जो गतिरोध बना हुआ है, उसे देख यही कहा जा सकता है कि एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण में मुख्य सचिव के सामने तीन बड़ी चुनौतियां होंगी. उनका निराकरण किया जाने के बाद जमीन अधिग्रहण का रास्ता साफ हो जायेगा और एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेजी आ जायेगी. = मुआवजा में असमानता के मुद्दे पर जमीन मालिकों को समझना दरअसल, जमीन मालिक पिछले लगभग दो साल से इस बात को लेकर आंदोलन कर रहे थे कि उनके जमीन का सर्किल रेट काफी कम है. इस कारण उन्हें जमीन का मुआवजा काफी कम मिल रहा है. इसलिए वह एक्सप्रेस में निर्माण में अपनी जमीन नहीं देंगे. लेकिन, जब जिला प्रशासन की मदद से आर्बिट्रेटर के यहां जमीन मालिकों के द्वारा अपील की गयी, तो जमीन मालिकों के सर्किल रेट को आर्बिट्रेटर के द्वारा दुगना कर दिया गया. इसके बाद मुआवजा भी दोगुना हो गया है. सर्किल रेट और मुआवजा दोगुना होने के बाद किसानों ने अपना आंदोलन भी समाप्त कर दिया था. लेकिन, अब एक नयी बात सामने आयी है, जिसे लेकर जमीन मालिक आंदोलन करते हुए अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है. अब जमीन मालिकों का कहना है कि भभुआ के आसपास के गांव में जमीन का मुआवजा काफी अधिक मिल रहा है. जबकि, भभुआ के आसपास के गांव से थोड़ी दूर पर ही मुआवजा सीधे 75 प्रतिशत से भी अधिक काम हो जा रहा है. जबकि जमीन का किस्म में एक है पैदावार एक है, ऐसे में मुआवजा की इतना भारी अंतर पर हम जमीन देने को तैयार नहीं है. जब तक मुआवजा में समानता नहीं लायी जाती है तब तक वह अपनी जमीन एक्सप्रेस में निर्माण के लिए नहीं देंगे. और इसी बात को लेकर जमीन मालिकों द्वारा प्रशासन के लाख मनाही के बावजूद अपने जमीन पर धान की खेती कर दी गयी है. मुख्य सचिव के सामने जमीन मालिकों के द्वारा की जा रही इस नये मांग से निबटना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी. मुआवजे के भुगतान में विलंब भी अधिग्रहण में बड़ी बाधा जमीनों का मुआवजा दोगुना होने के बाद जिस जमीन के मालिक अपनी जमीन देने को तैयार भी हैं, उनके भी खाते में मुआवजे की राशि नहीं आने के कारण एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए शुरू कार्य को रुकवा दिया. जमीन मालिकों का कहना था कि जो मुआवजे की राशि तय की गयी है, उस राशि को उनके खाते में अभी तक भुगतान नहीं किया गया है. एक्सप्रेस में निर्माण में लगी कंपनी उनके जमीन पर काम भी शुरू कर दी है, जो बिल्कुल गलत है. जब तक कि उनके खाते में मुआवजे की राशि नहीं भेज की जाती है, तब तक वह अपनी जमीन पर काम नहीं करने देंगे. = जमीन पर कार्रवाई के बजाय कागजी घोड़ा दौड़ा रहे हैं अधिकारी कहीं भी सड़क या एक्सप्रेसवे का निर्माण होता है, तो वहां सबसे बड़ी बाधा के रूप में जमीन अधिग्रहण ही रहा है. इसके लिए पूर्व के इतिहास को देख, तो अधिकारियों को जमीन अधिग्रहण के लिए जमीन मालिकों के साथ जमीनी स्तर पर काफी मशक्कत करनी पड़ती है. लेकिन बनारस-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे की जमीन अधिग्रहण में अभी जमीनी अस्तर पर अधिकारियों के द्वारा कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ कागजी घोड़ा दौड़या जा रहा है. किसान संघर्ष मोर्चा के नेताओं का कहना है कि कोई भी अधिकारी गंभीरता से जमीन मालिकों की समस्या को सुनकर उसके निदान को लेकर जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, बल्कि प्रतिदिन एक पत्र जारी किया जा रहा है. इसमें किसानों को धमकी दी जा रही है कि अगर वह अपनी जमीन पर धान की खेती करते हैं, तो उन पर कार्रवाई की जायेगी. जमीनी स्तर पर जाकर समस्या को दूर करने के बजाय अधिकारियों के द्वारा प्रतिदिन नया-नया आदेश निकालकर कागजी घोड़ा दौड़ने का काम किया जा रहा है. इससे समस्या का समाधान नहीं होने वाला है. कुल मिलाकर देखें, तो अधिकारियों को भी एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण में जमीन पर जाकर जमीन मालिकों के साथ समस्या के हर बिंदु पर गंभीरता से बातचीत कर इसे दूर करना होगा. यह भी एक बड़ी चुनौती है इनसेट आदिवासी गीत एवं नृत्य से मुख्य सचिव का हुआ स्वागत =मुख्य सचिव कैमूर पहाड़ी पर बनवासियों से बिजली पानी व शिक्षा का जाना हाल = बनवासियों को बहुत जल्द मिलेगी ग्रीड से बिजली व पाइपलाइन से शुद्ध पानी भभुआ कार्यालय. सोमवार को होने वाली समीक्षा बैठक को लेकर रविवार को ही सूबे के मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा भभुआ पहुंच गये. भभुआ के सर्किट हाउस में मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा का आदिवासी गीत व नृत्य के साथ उनका स्वागत किया गया. कैमूर पहाड़ी पर स्थित आदिवासियों के द्वारा करमा गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया गया. जिसे देख और सुनकर मुख्य सचिव भी काफी प्रसन्न हुए. नृत्य और गीत के संपन्न होने के बाद प्रस्तुति देने वाले छात्र-छात्राओं व कलाकारों के साथ बातचीत कर उनकी समस्या की जानकारी मुख्य सचिव ने ली. सबसे पहले उन्होंने कलाकारों से पूछा कि उनके यहां अनुसूचित जनजाति के लिए जो विद्यालय का निर्माण हो रहा है, उसका काम कहां तक पहुंचा है. इसकी जानकारी लेने के बाद उन्होंने कलाकारों को बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रगति यात्रा के दौरान कैमूर पहाड़ी पर सभी गांव में ग्रेट से बिजली देने की योजना को मंजूरी दी है. उसका टेंडर कर दिया गया है. बहुत जल्द काम शुरू हो जायेगा. कैमूर पहाड़ी पर सभी गांवों में ग्रीड से बिजली पहुंचा दी जायेगी. लंबे समय से वहां बिजली की समस्या थी. वहां पर सोलर प्लांट के जरिये बिजली की आपूर्ति की जा रही थी. लेकिन, वह बहुत अधिक कारगर नहीं था, जिसके बाद वन विभाग से क्लीयरेंस लेकर वहां पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिजली ग्रिड से पहुंचाई जा रही है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि लंबे समय से कैमूर पहाड़ी पर पेयजल का संकट रहा है. इसको ध्यान में रखते हुए सोन नदी से लिफ्ट कराकर कैमूर पहाड़ी पर स्थित सभी गांव में पाइपलाइन के जरिये पानी पहुंच जाने की योजना है. इसकी स्वीकृति प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के द्वारा दी जा चुकी है. इसका भी काम टेंडर की प्रक्रिया में है. बहुत जल्द वहां गांव में शुद्ध पेयजल पाइपलाइन के जरिये हर घर में मिलेगा. मुख्य सचिव ने कहा कि कैमूर पहाड़ी पर रहने वाले लोगों की विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और मुख्यमंत्री ने प्रगति यात्रा के दौरान वहां के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की है, जिस पर तेजी से काम किया जा रहा है. कई कार्यो का टेंडर कर दिया गया है. कई योजनाओं पर काम भी शुरू हो गया है. कैमूर पहाड़ी पर पेयजल बिजली शिक्षा हर क्षेत्र में सरकार के स्तर से काम किया जा रहा है. उनके द्वारा आदिवासी गीत व नृत्य प्रस्तुत करने वाली छात्र-छात्राओं से भी पठन-पाठन व विद्यालय भवन के विषय में जानकारी ली गयी. कैमूर आये मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा को कैमूर डीएम सुनील कुमार ने मां मुंडेश्वरी की प्रतिमा व एसपी हरिमोहन शुक्ला ने पौधा भेंट की.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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