भभुआ-मोहनिया के बाजारों में लगी आग, तो जानमाल का हो सकता है भारी नुकसान

तंग व संकरी गलियों में गर्मी का सीजन शुरू होते ही सचेत रहने की जरूरत
तंग व संकरी गलियों में गर्मी का सीजन शुरू होते ही सचेत रहने की जरूरत 1200 फीट पाइप तो है, पर संकरी सड़कों में कम हो जाता है पानी का फोर्स भभुआ सदर. गर्मी का सीजन आते ही लगभग आये दिन भभुआ-मोहनिया शहर सहित ग्रामीण इलाकों में अगलगी की घटनाएं बढ़ने लगती हैं. हालांकि, दमकल विभाग की ओर से हर साल की तरह ही इस साल भी आग से बचाव को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन जागरूकता व जानकारी के बावजूद आग लग रही है और इससे जानमाल का काफी नुकसान हो रहा है. वैसे भी भभुआ व मोहनिया शहर के बाजारों में अगर आग लगती है तो जानमाल का भारी नुकसान हो सकता है. क्योंकि जिले के भभुआ व मोहनिया शहर की तंग-संकरी गलियों में व्यावसायिक इमारतें व स्टोर के साथ लगभग डेढ़ लाख से अधिक की जनसंख्या बस रही है. इसके अलावा रोजाना ही हजारों की संख्या में लोग इन बाजारों व दुकानों में खरीदारी व अन्य कार्यों के लिए पहुंचते हैं. अब जिस प्रकार से गर्मी के सीजन में ग्रामीण क्षेत्र में अगलगी की घटनाएं होती हैं, अगर वो इन बाजारों में हो गयीं तो अग्निशमन विभाग का आग से उठे धुएं के गुब्बारों में दम फूलने लगेगा. जिला प्रशासन ने इसके लिए आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. इन सड़कों के किनारे दुकानें ही नहीं, बल्कि सड़क के अगल-बगल बसी दर्जनों मुहल्लों के 25 हजार से अधिक की आबादी खतरे में पड़ सकती है. उदाहरण के तौर पर शहर का पुराना पश्चिम बाजार काफी पुराना होने के कारण इसकी बसावट भी काफी पुरानी है. कहीं 20 फीट तो कहीं 15 फीट चौड़ी इन सड़कों के किनारे बसे अधिकतर लोग मकान के आगे दुकान खोल कर बैठे हैं. सड़क किनारे बसे परिवारों की यह परंपरा बन गयी है, पीढ़ी दर पीढ़ी यहां के वाशिंदे घर के आगे दुकान लगाकर स्वरोजगार करते हैं. अब जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती गयी, सड़क भी उतनी ही संकरी होती गयी. अब तो आलम ये है कि इस सड़क पर बाइक से पांच सौ मीटर की दूरी तय करने में 25 मिनट से ज्यादा समय लग जाता है, जबकि चारपहिया घुसते ही जाम लग जाता है. आग लगने पर इस क्षेत्र में दमकल कैसे घुसेगा, इस पर आज तक किसी ने गंभीरता से नहीं सोचा. शहर में पूर्व में हुई अगलगी की कुछ घटनाओं में ऐसा देखा गया है कि आग पर काबू पाने के लिए आम लोगों के साथ-साथ दमकल विभाग को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी है. शहर में पश्चिम व चौक बाजार हैं काफी तंग यूं तो भभुआ व मोहनिया शहर के अधिकतर पुराने मुहल्ले तंग गलियों व सड़कों से घिरे हैं और यहां शहरी नियमों की अनदेखी हर हाउस होल्डर ने की है. कुछ रुपये देकर या बिना नक्शा पास कराये ही मकानों का निर्माण करा लिया गया है. वहीं पश्चिम बाजार, पुराना चौक, छोटकी पुल व महावीर मंदिर रोड ऐसे मुख्य बाजार हैं जहां अक्सर हजारों की तादाद में लोगों की भीड़ एकत्रित रहती है और यहां हजारों की संख्या में दुकानें हैं. यहां अगलगी की घटनाओं के बाद दमकल को आने में तो परेशानी होगी ही, स्थानीय लोगों को भी दिक्कतें होंगी. इनके पास सुरक्षा के कोई कारगर उपाय नहीं हैं. अगर यहां आग लग जाती है तो लोग परेशान होंगे. इस गंभीर समस्या पर प्रशासन को देना चाहिए ध्यान शहर के रहने वाले विनोद यादव व राकेश माली आदि का कहना था कि शहर में सड़क किनारे यूं ही दुकानें लगती रहीं व सड़क जाम पर ध्यान नहीं दिया गया, तो कभी भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है. इसके लिए जिला प्रशासन को ध्यान देना चाहिए. सड़क किनारे दुकानों का सामान लगाये जाने पर प्रतिबंध लगाकर सड़क का सुदृढ़ीकरण किया जाना चाहिए. ऐसा नहीं किये जाने पर सड़क जाम की स्थिति बनी रहेगी. इससे कभी भी जानमाल की भारी क्षति हो सकती है. इस मामले पर स्थानीय लोगों को भी जागरूक होना होगा, तभी समस्या का समाधान संभव है. किसी तरह व्यवस्था करते हैं इस संबंध में दमकल विभाग के अधिकारी अग्नि प्रधान सुरेंद्र राय का कहना था कि मेन रोड सहित अन्य जगहों में आग लगने पर अपनी तरफ से हर संभव उसे बुझाने का प्रयास किया जाता है. लेकिन संकरी गलियों व सड़क के चलते परेशानी तो होती ही है. इसके लिए लोगों को सजग होना होगा. वैसे भी विभाग के पास 1200 फीट पाइप प्रत्येक अग्निशमन वाहन में रहता है. अगर किसी गली में आग लग जाती है तो इसके लिए 1200 फीट पाइप से काम किया जाता है, लेकिन इससे पानी का फोर्स कम हो जाता है. वहीं अगर कहीं वाहन जाने की व्यवस्था नहीं होगी तो परेशानी होती है. शहर के पुराने बाजार में तो हमेशा जाम लगा रहता है.
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