रीपर कम बाइंडर से फसल की कटाई व बोझा बांधने में किसानों को मिलेगी मदद

Published by : VIKASH KUMAR Updated At : 27 Nov 2025 4:17 PM

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सराय में आयोजित किसान चौपाल में कृषि कर्मियों ने बताये उपाय

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# सराय में आयोजित किसान चौपाल में कृषि कर्मियों ने बताये उपाय मोहनिया सदर. गुरुवार को भोखरी पंचायत के सराय गांव में आयोजित किसान चौपाल में उपस्थित कृषि कर्मियों ने किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने व कृषि यंत्रों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी. इस दौरान प्रतीक्षित राय ने किसानों को बताया कि रीपर कम बाइंडर एक ऐसा आधुनिक यंत्र है जो धान व गेहूं की फसल की कटाई के साथ फसलों का बोझा बनाने के लिए उपयुक्त आधुनिक यंत्र है, इस यंत्र से एक घंटे में लगभग 0.4 हेक्टेयर भूमि में लगी फसल की कटाई आसानी से की जा सकती है, साथ ही कटाई के साथ बोझे भी तैयार हो जाते हैं. किसान भाइयों के लिए यह यंत्र अधिक महंगा भी नहीं है. इसकी कीमत ढाई लाख से साढ़े चार लाख रुपये तक है, जिसे आसानी से किसान भाई खरीद सकते हैं. इस यंत्र की खरीदारी करने से किसान भाईयों को कम परिश्रम करना पड़ेगा और कम समय में आसानी से धान व गेहूं की कटाई के साथ उसके बोझ भी मशीन से ही बांध दिये जाते हैं. इसके साथ ही अन्य कृषि यंत्रों की भी विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने किसानों को बताया कि स्ट्रा बेलर की क्षमता 0.34 से 0.38 हेक्टेयर प्रति घंटा है. स्ट्रा बेलर खेतों में बिखरे पुआल को एकत्रित कर ठोस वर्ग के आकार में इकट्ठा कर मजबूत गांठ बना देता है, इससे पुआल को एक जगह से दूसरे जगह ले जाने में काफी आसानी होती है तथा उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इस यंत्र की अनुमानित कीमत लगभग तीन लाख रुपये है. इस मशीन की सहायता से किसान भाई अपने पशुओं के लिए चारे का बंदोबस्त आसानी से कर सकते हैं और अतिरिक्त चारे को बाजार में बेचकर अच्छी आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं. इस यंत्र के उपयोग से खेतों में पराली जलाने जैसी समस्या दूर की जा सकती है. उन्होंने किसानों को बताया कि हैपी सीडर एक ऐसा कृषि यंत्र है, जिसकी कार्य क्षमता 0.30 से 0.40 हेक्टेयर प्रति घंटा है. इसका अनुमानित मूल्य डेढ़ लाख से 175000 है, इसकी शक्ति 50 एचपी है. कंबाइन मशीन द्वारा काटे गये धान के खेतों में बिना पुआल जलाये गेहूं की बुवाई सरलता से की जा सकती है. यह मशीन पुआल को काटकर मल्चर के रूप में जमीन में ही मिला देती है और बुआई सुगमता से की जा सकती है. हैपी सीडर द्वारा गेहूं की जीरो टिलेज विधि से बुआई करने पर 800 से 1000 रुपये तक की बचत आसानी से की जा सकती है, इसलिए सभी किसान भाइयों से आग्रह है कि वे आधुनिक कृषि यंत्रों का भरपूर उपयोग करें और अपने खेतों में पराली जलाने से परहेज करें, जिससे कि धरती की उर्वरा शक्ति को नष्ट होने व धरती के बढ़ते ताप दोनों को प्रभावी तरीके से कम किया जा सके. इस दौरान कृषि कर्मी विवेक कुमार, विकास कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे.

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