दिनदहाड़े खेतों में किसान जला रहे गेहूं के डंठल

Published by : VIKASH KUMAR Updated At : 21 Apr 2026 3:51 PM

विज्ञापन

प्रशासन की सख्ती के बाद भी नहीं थम रहा पराली जलाने का सिलसिला

विज्ञापन

प्रशासन की सख्ती के बाद भी नहीं थम रहा पराली जलाने का सिलसिला पराली जलाने वाले किसानों का रजिस्ट्रेशन होगा रद्द, तीन साल तक सरकारी योजनाओं से रहेंगे वंचित रामपुर. प्रखंड क्षेत्र के गांवों में शाम तो शाम, दिन में भी बेखौफ होकर किसान गेहूं की पराली जला रहे हैं. प्रदेश में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर खेत में गेहूं के डंठल जलाने पर रोक लगायी गयी है, साथ ही डंठल जलाने वालों पर सरकार द्वारा कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गयी है. इसको लेकर जिला प्रशासन व कृषि विभाग के स्तर से लगातार किसानों को जागरूक करने का काम भी किया जा रहा है, लेकिन क्षेत्र के किसान अभी भी इस पर अमल नहीं कर रहे हैं. प्रत्येक दिन किसी न किसी गांव के बधार में दिन व रात के वातावरण में धुआं दिखाई दे रहा है. खेतों के बगल से होकर गुजरने वाला प्रशासन खेत में डंठल जलता देखकर भी बेखबर बना हुआ है. गेहूं के डंठल जलाने से उठने वाले धुएं से प्रदूषण फैल रहा है, वहीं आग की चपेट में आकर मिट्टी के मित्र कीट भी जलकर नष्ट हो रहे हैं. खेतों की नमी भी समाप्त हो रही है, जिससे मिट्टी की सेहत काफी खराब हो जाती है. साथ ही चिलचिलाती लू व हवा में डंठल जलने से आग इतना विकराल रूप ले लेती है कि बधार में लगायी गयी आग गांव के नजदीक तक चली आती है. इससे गांव में भी आग लगने का भय बना रहता है. विगत वर्ष गेहूं की डंठल जलने से खजुरा, बिछिया, कुर्था, पसाई, सबार, मझियाव, बड़कागांव, दड़वा, गम्हरिया, बाघी, बेलाव, निरविसपुर, बसुहारी, भीतरीबांध व समाव सहित लगभग दर्जनों गांव जलने से बच गये थे. ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ व दमकल के सहयोग से गांवों को बचाया था. डंठल जलाने पर सिर्फ रोक ही नहीं है, बल्कि कृषि विभाग की तरफ से किसानों को जागरूक करने के लिए स्थानीय प्रखंड क्षेत्र के गांवों में समय-समय पर किसान चौपाल लगाकर जागरूक भी किया जा रहा है. लेकिन यह कवायद केवल हर अभियान की भांति रस्म अदायगी बनकर सिमट गयी है. बीते दिनों की बात करें तो अगले साल के लिए कुछ किसानों का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया गया है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी होने के बाद भी किसान डंठल जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं. प्रखंड में गेहूं की कटनी हो चुकी है, यदि प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता है तो किसान पराली जलाने से पीछे नहीं हटेंगे. ऐसे में जिला प्रशासन का प्रयास असफल साबित हो रहा है. इस संबंध में कृषि समन्वयक प्रवीण कुमार ने बताया कि पटना कृषि विभाग द्वारा ”फायर प्वाइंट” से जानकारी प्राप्त कर जिला कृषि कार्यालय को सूची जारी की जाती है. वह सूची प्रखंड कृषि कार्यालय आती है, जिसके बाद हम सूची के आधार पर उन किसानों को चिह्नित कर उनका रजिस्ट्रेशन बंद कर देंगे. इसके बाद तीन साल तक कृषि संबंधित सरकार की किसी भी योजना का लाभ उक्त किसान को नहीं दिया जायेगा.

विज्ञापन
VIKASH KUMAR

लेखक के बारे में

By VIKASH KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन