कैमूर: रामपुर में 65 साल पुराने स्कूल की हालत बदहाल, बाउंड्रीवॉल नहीं होने से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा, शिकायत के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई

Author Raju kumar|Edited by Ragini Sharma
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विद्यालय प्रांगण में खेलते छात्र- छात्राएं

कैमूर के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बिछियां की हालत जर्जर है। 65 साल बाद भी बाउंड्रीवॉल न होने से स्कूल गंदगी, आवारा पशुओं और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। मुख्य सड़क से सटे होने के कारण बच्चों की सुरक्षा भी लगातार खतरे में है।

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Kaimur Government School Condition : कैमूर जिले के रामपुर प्रखंड के फ्साई पंचायत अंतर्गत बिछियां गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है. वर्ष 1960 से संचालित इस विद्यालय को बने 65 साल हो चुके हैं, लेकिन आज तक यहां बाउंड्रीवॉल का निर्माण नहीं हो सका है. नतीजा यह है कि स्कूल परिसर गंदगी, आवारा पशुओं और असामाजिक तत्वों का ठिकाना बन गया है. सबसे बड़ी बात यह है कि मुख्य सड़क से सटे इस विद्यालय में पढ़ने वाले करीब 100 बच्चों की सुरक्षा भी हर समय खतरे में बनी रहती है.

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Education System : पढ़ाई के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं

विद्यालय के प्रधानाध्यापक गुफरान अली के अनुसार, पहले यहां प्राथमिक विद्यालय चलता था, जिसे बाद में उत्क्रमित कर मध्य विद्यालय बना दिया गया. वर्तमान में स्कूल में कुल 7 कमरे हैं, जिनमें कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को पढ़ाया जाता है. सीमित संसाधनों के कारण एक ही कमरे में कई कक्षाओं के बच्चों को बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ती है. उदाहरण के तौर पर कक्षा 1 और 2 के बच्चे एक साथ बैठते हैं, वहीं कक्षा 7 और 8 के छात्र-छात्राओं को भी एक ही कमरे में पढ़ाया जाता है.

विद्यालय में कुल 6 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं, लेकिन कक्षाओं और कमरों की कमी के कारण पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.

Kaimur News : बाउंड्री नहीं, तो स्कूल बना असामाजिक तत्वों का अड्डा

बाउंड्रीवॉल नहीं होने से स्कूल की सबसे बड़ी समस्या साफ-सफाई और सुरक्षा की है. प्रधानाध्यापक बताते हैं कि स्कूल बंद होने के बाद परिसर में गंजेड़ी, शराबी और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है. रात के समय आवारा पशु यहां डेरा डाल देते हैं. सुबह जब स्कूल खुलता है, तो बरामदे और परिसर में गोबर और गंदगी फैली रहती है.

छोटे बच्चे खेलते-खेलते कई बार गोबर में गिर जाते हैं, जिससे उनके कपड़े गंदे हो जाते हैं. स्कूल को हरा-भरा रखने के लिए लगाए गए पौधे भी पशुओं के कारण सुरक्षित नहीं रह पाते.

मुख्य सड़क बना सबसे बड़ा खतरा

विद्यालय के बगल से गुजरने वाली मुख्य सड़क बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है. यह सड़क पसाई, बिछियां, कुर्था, खजुरा और मझियाव को जोड़ते हुए प्रखंड मुख्यालय और आगे बेलांब-भगवानपुर तक जाती है. इस पर दिनभर सैकड़ों वाहनों का आवागमन होता है.

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मध्यांतर के समय बच्चे खेलते-खेलते सड़क पर पहुंच जाते हैं. ऐसे में शिक्षक-शिक्षिकाओं को खुद सड़क किनारे खड़े होकर बच्चों की निगरानी करनी पड़ती है. प्रधानाध्यापक के अनुसार, कई बार छात्राएं दुर्घटना का शिकार होते-होते बची हैं.

कई बार दी गई शिकायत, नहीं हुई सुनवाई

प्रधानाध्यापक गुफरान अली ने बताया कि बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए उन्होंने कई बार विभाग को मौखिक और लिखित आवेदन दिया है. उनके पहले के प्रधानाध्यापक ने भी इस समस्या को लेकर कई बार पत्राचार किया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

65 साल पुराने इस विद्यालय की हालत प्रशासनिक उदासीनता की कहानी बयां कर रही है. बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों ही दांव पर लगे हैं. अगर समय रहते बाउंड्रीवॉल का निर्माण नहीं कराया गया, तो किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता. अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है और क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं.

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