Kaimur News : महिलाओं के साथ जुर्म करने वालों के खिलाफ दंड का कड़ा प्रावधान लाये सरकार

Updated at : 07 Mar 2025 8:55 PM (IST)
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Kaimur News : महिलाओं के साथ जुर्म करने वालों के खिलाफ दंड का कड़ा प्रावधान लाये सरकार

हर वर्ष आठ मार्च का दिन दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के तौर पर मनाया जाता है. ये दिन महिलाओं की उपलब्धियों को सलाम करने का दिन है. इस दिन को महिलाओं की आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक तमाम उपलब्धियों के उत्सव के तौर पर मनाया जाता है.

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भभुआ सदर. हर वर्ष आठ मार्च का दिन दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के तौर पर मनाया जाता है. ये दिन महिलाओं की उपलब्धियों को सलाम करने का दिन है. इस दिन को महिलाओं की आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक तमाम उपलब्धियों के उत्सव के तौर पर मनाया जाता है. साथ ही उन्हें यह एहसास कराया जाता है कि वह हमारे लिए कितनी खास हैं. शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रभात खबर द्वारा भी महिलाओं और छात्राओं से उनके महिला अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक उन्नति पर संवाद किया गया. प्रभात खबर के संवाद कार्यक्रम में अधिकतर महिलाओं और छात्राओं ने माना कि, केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से आज महिलाएं हर क्षेत्र में पूरे दमखम के साथ परचम लहरा रही है. लेकिन यह भी सत्य है कि आज भी कई जगहों पर उन्हें लैंगिक असमानता, भेदभाव झेलना पड़ता है और शिक्षा, आर्थिक उन्नति और स्वास्थ्य से लेकर रोजगार तक में पुरुषों और महिलाओं के बीच एक गहरी खाई नजर आती है. महिलाओं का कहना था कि कन्या भ्रूण हत्या के मामले आज इस आधुनिक युग में भी आना गंभीर चिंता का विषय है. महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे हैं और आज भी अधिकतर स्त्रियों को परिवार में फैसले लेने का अधिकार और आजादी नहीं मिल पायी है. ऐसे में हमारा यह कर्तव्य है कि हम सभी महिलाओं की स्थिति समाज में बेहतर बनाने को लेकर प्रयासरत रहने का संकल्प लें. इसके लिए सरकार भी यह शपथ ले कि महिलाओं और बच्चियों से जुर्म करनेवालों के खिलाफ दंड का कड़ा प्रावधान लायेगी, ताकि फिर ऐसी हरकत कोई भी करने की जुर्रत न कर सके. = हर घर में होनी चाहिए महिला के सम्मान की बात छात्राओं ने समाज में महिलाओं की स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि छोटे शहर की महिलाओं व युवतियों के अंदर हौसला तो है, लेकिन उनको बड़े शहरों की तरह सही प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता है. इसकी वजह से उनके सामने अनेक तरह की समस्याएं आती रहती हैं और वह समझ के फेर में हिंसा और प्रताड़ना की शिकार हो जाती है. अगर घर में महिला के साथ हिंसा होती है तो उनके अंदर गुस्सा तो बहुत आता है, पर वह अपनी आवाज बाहर तक पहुंचाने में सफल नहीं हो पाती हैं, जिस दिन महिलाएं घर के अंदर उठने वाले हाथ को पकड़ लेगी. उसी दिन महिला उत्पीड़न की घटनाएं बंद हो जायेगी. इसलिए महिलाओं और बच्चियों के सम्मान की बात घर-घर में होना चाहिए, क्योंकि किसी अच्छे काम की शुरुआत घर से ही होती है. = अधिकतर महिलाओं को महिला कानून की नहीं है जानकारी प्रभात खबर संवाद में महिला शिक्षिकाओं ने कहा कि महिला उत्पीड़न पर कानून तो बहुत बने हैं, पर असल जानकारी महिलाओं को न होने से वह इनके लाभ से वंचित हो रही हैं. यह सब तभी संभव होगा, जब हर घर की महिला शिक्षित होगी. महिला शिक्षित तभी होगी, जब मां-बाप बेटा-बेटी में फर्क करना छोड़ देंगे. यह शुरुआत सबसे पहले हमें अपने घर से करनी होगी. संवाद कार्यक्रम में कुछ छात्राओं ने कहा कि, आजकल जिस प्रकार का हाल है उसके चलते उनकी कई सहेलियों के माता पिता उनकी जल्दी से जल्दी शादी करना चाहते है, ताकि उनकी भी बेटी के साथ किसी प्रकार का अप्रिय हादसा ना हो जाये और फिर बेटी को ज्यादा स्वतंत्रता देने में उनकी बदनामी ना हो जाये. = महिला हिंसा और उनकी सुरक्षा पर रखी गयी राय – महिलाओं को हिंसामुक्त जीवन प्रदान करने के लिए पुरुष-समाज को उन आदतों, वृत्तियों, महत्वाकांक्षाओं, वासनाओं व कट्टरता को अलविदा कहना ही होगा. नारी पर हो रहे नित-नये अपराध और अत्याचार पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के लिए पुरुष समाज के प्रदूषित व विकृत हो चुके तौर-तरीके बदलने होंगे, साथ ही उन कारणों को भी जड़ से उखाड़ फेंकना होगा, जिनके कारण बार-बार नारी को जहर का घूंट पीने को विवश होना पड़ता है. अंजू कुमारी, प्रभारी प्रिंसिपल, कन्या मध्य विद्यालय, वार्ड 18 – राजनेताओं को महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए. पुलिस और न्यायिक व्यवस्था को दुरुस्त करने से ही बदलाव आ सकेगा. जबकि वास्तविकता में महिलाओं की सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है. राजनेताओं सहित पुलिस और न्यायिक व्यवस्था भी सिर्फ कागजों में ही महिला सुरक्षा को लेकर सब कुछ परफेक्ट दिखाना चाहती है, जबकि हकीकत में इसे लेकर कहीं भी ठोस प्रयास नजर नहीं आता है. रिंकी शुक्ला, ट्रेनी शिक्षिका – जब भी महिलाओं के अधिकारों की बात आती है तो उसे गंभीरता से नहीं लिया जाता है और लोगों का सब चलता है वाला एटीट्यूड सामने आ जाता है. हमें सुरक्षा के लिए वोट देना होगा. हमें निर्भया के नाम पर वोट देना होगा. इसके साथ ही हमें अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से भी सवाल करना होगा. अंजू कुमारी-ट्रेनी शिक्षिका – नारी को छोटा व दोयम दर्जे का समझने की मानसिकता भारतीय समाज के रग-रग में समाया हुआ है. असल प्रश्न इसी मानसिकता को बदलने का है. अन्यायी तभी तक अन्याय कर सकता है, जब तक कि उसे सहा जाये. सरिता कुमारी, शिक्षिका – महिलाओं में इस धारणा को पैदा करने के लिए न्याय प्रणाली और मानसिकता में मौलिक बदलाव की जरूरत है. देश में लोगों को महिलाओं के अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी नहीं है और इसका पालन पूरी गंभीरता और इच्छाशक्ति से नहीं होता है. मानवी कुमारी, शिक्षिका – महिला सशक्तीकरण के तमाम दावों के बाद भी महिलाएं अपने असल अधिकार से कोसों दूर हैं, उन्हें इस बात को समझना होगा कि दुर्घटना व्यक्ति और वक्त का चुनाव नहीं करती है और यह सब कुछ होने में उनका कोई दोष नहीं है. मंजू कुमारी, ट्रेनी शिक्षिका – आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है. लेकिन समाज में स्त्रियों का यौन उत्पीड़न लगातार जारी है. यह विडंबना ही कही जायेगी कि सरकार, प्रशासन, न्यायालय, समाज और सामाजिक संस्थाओं के साथ मीडिया भी इस कुकृत्य में कमी लाने में सफल नहीं हो पायी है. अंशिका पांडेय, छात्रा-कन्या मध्य विद्यालय – जिस प्रकार छोटे शहरों और गांवों में भी महिलाओं और युवतियों के खिलाफ हिंसा और अराजकता बढ़ी है, उससे घर से स्कूल तक आने में भय महसूस होता है. पुलिस लाख कहे कि महिलाओं को सुरक्षा दी जा रही है, लेकिन जब वैसी कोई घटना होती है तो फिर उसी पुलिस और उनके कानून के दायरे सिमट जाते हैं. नूरी सबा, छात्रा, कन्या मध्य विद्यालय – हम निर्भया जैसे मामलों के बारे में जानते हैं. लेकिन कई ऐसे भी रेप के मामले हैं जो सामने नहीं आते हैं. महिलाओं काे यूज किया जाता है और फेंक दिया जाता है. परिवार में ही महिलाओं का शोषण किया जाता है और महिलाओं को चुप करा दिया जाता है. जहां आज भी यह स्थिति भयावह है. सोनम कुमारी, ट्रेनी शिक्षिका – महिला विरोधी हिंसा किसी एक समाज, समुदाय या वर्ग में नहीं बल्कि सभी प्रकार के वर्गों, जातियों, संप्रदायों में की जाती है. इससे प्रश्न यह उठता है कि आखिर बार-बार सिर्फ महिलाओं को ही क्यों प्रताड़ित किया जाता है. रिया कुमारी, छात्रा, कन्या मध्य विद्यालय

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