किससे पूछूं कि मेरा बेटा कब आयेगा...

Updated:
विज्ञापन

मोहनिया नगर : जहां देश आज दीपावली के जश्न में डूबा हुआ है वहीं जम्मू के उरी में शहीद हुए राकेश के घरवाले शहीद राकेश को श्रद्धांजलि के तौर पर एक दीया जला कर अपने बेटे को याद कर रहे हैं. राकेश का इकलौता बेटा जो अभी पंद्रह माह का है, वो पिता को खोजते-खोजते […]

विज्ञापन
मोहनिया नगर : जहां देश आज दीपावली के जश्न में डूबा हुआ है वहीं जम्मू के उरी में शहीद हुए राकेश के घरवाले शहीद राकेश को श्रद्धांजलि के तौर पर एक दीया जला कर अपने बेटे को याद कर रहे हैं. राकेश का इकलौता बेटा जो अभी पंद्रह माह का है, वो पिता को खोजते-खोजते सो जाता है.
उस बेचारे को पतानहीं है कि अब उसके पापा कभी भी उसके साथ पटाखे छोड़ने नहीं आयेंगे. पूरा परिवार यहां तक कि राकेश की पत्नी किरण पिछली दीपावली की बातें बताते-बताते रो पड़ती है. किरण ने अपने पति राकेश की याद में आज दीपावली के दिन एक दीया जला कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. पूरा परिवार आज बस एक नजर से राकेश के फोटो को निहारता रहा. राकेश की मां कहती है कि मेरा बेटा जब फौज में था तो, कभी दीपावली पर छुट्टी नहीं मिलती थी.
तो मै गांव के दूसरे लोग जो फौज में थे, उनके घर जा कर पूछती थी कि तुम लोग आ गये लेकिन, मेरा राकेश कब आयेगा. उसने कोई संदेश भेजा है लेकिन, अब मै किससे पूछने जाऊंगी कि मेरा बेटा कब आयेगा. इतना कहते हुए बूढ़ी मां अपने बेटे की याद में रो पड़ती है. दुखों का पहाड़ झेल रही राकेश कि पत्नी अपने आप को ढांढ़स बांधते हुए राकेश के द्वारा पिछली दीपावली में बिताये गये राकेश के साथ पल को बताते हुए रोने लगती है. कहती है कि मेरी शादी उनसे 2012 में हुई थी. शादी से पहले उनके बारे में ज्यादा जानने का मौका नहीं मिला लेकिन, शादी के बाद वो फौज के सभी बातों को बताते थे.
शादी के बाद सिर्फ़ दो दीपावली को ही समय मिल पाया उनके साथ बिताने का. पिछली बार दीपावली पर वो जब आये थे तो अपने बेटे के लिए बहुत ज्यादा पटाखे ले कर आये थे. दोनों लोग पटाखे छोड़ रहे थे. बेटा अपने पापा के साथ बहुत ज्यादा खुश रहता था. वो बराबर कहते थे कि बेटे कि जो भी इच्छा हो मैं वो सब पूरा करूंगा. बस उसे एक अच्छा आदमी बनाना. अगर मैं न भी रहूं तो तुम उसकी पढ़ाई में कोई भी कमी मत कराना.
एक फौजी को फेस्टिवल पर बहुत मुश्किल से छुट‍्टी मिल पाता है. ये दीपावली क्या हमलोग तो अब कोई भी दीपावली नही मना पायेंगे. जब ये बड़ा होगा तो अपने पापा के बारे में पूछेगा कि मम्मी दीपावली में सबके पापा आये हैं. मेरे पापा कब आयेंगे तो मै इसको क्या जवाब दूंगी. हमलोगों को उनके साथ दो दीपावली मनाये थे. बस वही याद रहेगा पूरे जीवन भर पिछली बार जब बेटे का जन्मदिन था तो उन्हें बुलाने के लिए बोली. लेकिन, वे बोले कि तुम इस बार मना लो मैं अगले बार जरूरआऊंगा.
साथ में बेटे का जन्मदिन मनायेंगे लेकिन, ऐसा हो नहीं सका. पूरा देश आज दीपावली का जश्न मना रहा है लेकिन, शहीद राकेश की पत्नी किरण अब उन्हें सिर्फ़ याद कर के हीं दीपावली का त्योहार मना रही है.
वो उनकी बातों को याद कर के रोने लगती है कि इस दीपावली पर कितना अरमान हमने सजाया था लेकिन, वो पूरा नहीं हो पाया. लेकिन वो चाहती है कि मेरे पति ने देश के लिए अपनी शहादत दी है तो आज दीपावली के दिन एक दीया सभी भारत के लोग उन सैनिकों के लिए जलाये जो आपके खुशियों के लिए अपना घर बार सब कुछ छोड़कर सरहद पर बैठे हुए हैं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन