नवजात के परिजनों का ठौर बनाने का काम शुरू

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एसएनसीयू में भरती नवजात के परिजनों के रहने के लिए होने लगी व्यवस्था भभुआ (सदर) : सदर अस्पताल में नवजात बच्चों के इलाज के लिए लाखों रुपये की लागत से एसएनसीयू (गहन बाल रोग चिकित्सा इकाई) की व्यवस्था तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो वर्ष पूर्व कर दी गयी, लेकिन एसएनसीयू में भरती नवजातों के परिजनों […]

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एसएनसीयू में भरती नवजात के परिजनों के रहने के लिए होने लगी व्यवस्था

भभुआ (सदर) : सदर अस्पताल में नवजात बच्चों के इलाज के लिए लाखों रुपये की लागत से एसएनसीयू (गहन बाल रोग चिकित्सा इकाई) की व्यवस्था तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो वर्ष पूर्व कर दी गयी, लेकिन एसएनसीयू में भरती नवजातों के परिजनों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता था.

इसके चलते नवजातों की मां या अन्य परिजन एसएनसीयू के बाहर इधर-उधर बरामदे में तो अस्पताल परिसर में अपना ठौर तलाशते बच्चे की जल्द स्वस्थ होने की कामना करते थे. इनकी हालात पर प्रभात खबर ने भी अपने 14 सितंबर के अंक में ‘नवजात बच्चों की मां के लिए ठौर नहीं’ शीर्षक से खबर छापते हुए सदर अस्पताल के अधिकारियों को भी इससे अवगत कराया था. खबर छपने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हरकत में आये और एसएनसीयू के बाहर चबूतरे का निर्माण कराते हुए चेयर वेटिंग शेड बनाने का काम शुरू हो गया.

स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ विवेक कुमार सिंह ने बताया कि निर्माण कार्य के अलावा एसएनसीयू में साउंड सिस्टम और वेटिंग हॉल भी जल्द ही बनाया जायेगा, ताकि महिलाएं और उनके साथ आये पुरुष बेहतर ढंग से अपने बच्चों को जल्द ठीक होने का इंतजार कर सके.

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