जीविका की दीदियों से स्कूलों की नहीं करायी जा रही जांच

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विभागीय सुस्ती से अब तक नहीं हो सका जांच के लिए समूह का गठन शिक्षा विभाग सभी बीइओ से मांग रहा रिपोर्ट भभुआ(नगर) : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाली जीविका समूह की महिलाओं को प्राइमरी स्कूलों की जांच की भी जिम्मेवारी सौंपी गयी है. शराबबंदी में जीविका समूह की महिलाओं द्वारा […]

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विभागीय सुस्ती से अब तक नहीं हो सका जांच के लिए समूह का गठन
शिक्षा विभाग सभी बीइओ से मांग रहा रिपोर्ट
भभुआ(नगर) : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाली जीविका समूह की महिलाओं को प्राइमरी स्कूलों की जांच की भी जिम्मेवारी सौंपी गयी है. शराबबंदी में जीविका समूह की महिलाओं द्वारा किये गये योगदान की मुख्यमंत्री ने खुले दिल से प्रशंसा की.
इसके बाद स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मॉनीटरिंग की जिम्मेवारी भी इन्हें सौंपी जा चुकी है, लेकिन कैमूर जिले में सीएम के इस आदेश के बावजूद इस दिशा में कोई कारगर प्रयास अब तक शुरू नहीं हुआ है. जानकारी के अनुसार अब तक जिले में एक भी स्कूल की जांच जीविका समूह की महिलाओं के माध्यम से नहीं हुई है. इस मामले अब तक जीविका की दीदियों के समूह का भी गठन नहीं किया जा सका है.
गौरतलब है कि जीविका की दीदी को स्कूलों में जाकर बच्चों की उपस्थिति, शिक्षकों की उपस्थिति और एमडीएम की गुणवत्ता की जांच करनी है. इसमें शिक्षा विभाग व ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संयुक्त हस्ताक्षर किया हुआ प्रपत्र दिया गया है. इसमें स्कूल संबंधी जांच की रिपोर्ट भरी जानी है. लेकिन, जिले में अब तक इस व्यवस्था के लागू हो जाने के बावजूद इस काम को गति नहीं मिली है.
अब तक नहीं दिया गया प्रशिक्षण
प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अनुश्रवण को लेकर महिला संगठन व स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्कूलों का अनुश्रवण करेंगी. इस संगठन को सामाजिक सुधार समिति का नाम दिया गया है. इसमें ग्राम संगठन की महिलाओं को शामिल किया जाना है. महिला संगठन नहीं होने की स्थिति में अलग-अलग स्वयं सहायता समूह की तीन सदस्यों का चयन करना है, जो महीने में दो बार नियमित तौर पर विभिन्न अनुश्रवण कर तय फॉर्मेट में इसकी रिपोर्ट प्रखंड स्तरीय समिति को देनी है. इसके आधार पर स्कूलों में सुधार को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जानी है.
तय फॉर्मेट में अनुश्रवण रिपोर्ट दूसरे दिन इसे अनिवार्य रूप से प्रखंड परियोजना प्रबंधक को सौंपी जानी है. मिली जानकारी के अनुसार राज्य स्तर पर कुछ लोगों को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है. लेकिन अब तक जिले में न तो स्कूलों की जांच के लिए जीविका समूह की महिलाओं का चयन ही किया गया और न ही कोई ट्रेनिंग दी गयी.
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