दो महीने से सदर अस्पताल में नहीं चल रही है आंख की ओपीडी

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 27 Feb 2025 10:47 PM

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जिले के सबसे बड़े सदर अस्पताल में आंख की ओपीडी पिछले दो महीने से नहीं चल रही है. सदर अस्पताल में आई विभाग की ओपीडी बंद रहती है.

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जहानाबाद.

जिले के सबसे बड़े सदर अस्पताल में आंख की ओपीडी पिछले दो महीने से नहीं चल रही है. सदर अस्पताल में आई विभाग की ओपीडी बंद रहती है. ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि आंख रोग विशेषज्ञ कोई चिकित्सक सदर अस्पताल में नहीं हैं जिसके कारण इस जिला अस्पताल में आंख का इलाज नहीं हो पा रहा है. हाल यह है कि सदर अस्पताल की ओपीडी में आंख दिखलाने के लिए आने वाले रोगियों की पर्ची भी नहीं काटी जा रही है. लंबी-लंबी लाइनों में खड़े होकर जब मरीज पर्ची काटने के लिए खिड़की पर पहुंचते हैं, तो कहा जाता है कि यहां आंख के डॉक्टर नहीं है, इसलिए आपकी पर्ची नहीं काटी जायेगी. इसके बाद जिले के सुदूर देहाती क्षेत्रों से भाड़ा खर्च कर सदर अस्पताल पहुंचने वाले आंख के रोगियों को मायूस होकर सदर अस्पताल से बैरंग वापस लौटना पड़ता है. घोसी प्रखंड अंतर्गत लखवार गांव की नागेश्वरी देवी आंख दिखलाने आयी थी. उन्होंने बताया कि बुढ़ापे में अब कम नजर आ रहा है. इसीलिए वह सदर अस्पताल आंख दिखलाने के लिए आई थी किंतु लंबी लाइन में लगने के बाद काउंटर पर बताया गया की आंख के डॉक्टर नहीं है इसलिए उनकी पर्ची नहीं काटी जायेगी. इसके बाद उन्हें मायूस होकर घर लौटना पड़ रहा है.

दिसंबर में ही सेवानिवृत्त हो गये एसीएमओ कार्यालय के आंखों के विशेषज्ञ : एसीएमओ कार्यालय के आंख रोग विशेषज्ञ डॉ मो अली दिसंबर महीने में ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं. सदर अस्पताल में तो बहुत पहले से ही आंख रोग विशेषज्ञ नहीं है. एसीएमओ कार्यालय के आंख रोग विशेषज्ञ डॉ मो अली ही सदर अस्पताल में आंख के मरीजों का इलाज करते थे, किंतु उनके रिटायर होने के बाद से अभी तक सदर अस्पताल में कोई भी आंख के डॉक्टर नहीं आया है जिसके कारण सदर अस्पताल में आंख के किसी भी मरीज को देखा नहीं जा रहा है. सदर अस्पताल में फिलहाल आंख रोग विशेषज्ञ कोई भी डॉक्टर नहीं है. हालांकि मो अली भी सदर अस्पताल के आई स्पेशलिस्ट नहीं थे, बल्कि उनकी पदस्थापना एसीएमओ कार्यालय में थी, बावजूद इसके उन्हें सदर अस्पताल की ओपीडी में बैठाया जाता था. उनके कारण ही सदर अस्पताल के रोगी अपनी आंख का इलाज करा पाते थे. उनके रिटायर हो जाने के बाद अब सदर अस्पताल या एसीएमओ कार्यालय में कोई आई स्पेशलिस्ट नहीं है जिसके कारण सदर अस्पताल में आने वाले आंख के मरीजों को डॉक्टर की कोई सेवा नहीं मिल पा रही है.आई स्पेशलिस्ट महिला डॉक्टर का हो गया ट्रांसफर : सदर अस्पताल में आई स्पेशलिस्ट एक महिला चिकित्सक भी थी. उक्त महिला चिकित्सक का ट्रांसफर पिछले दिसंबर माह में ही हो गया. हालांकि यह बड़ा अजीब लगता है कि एसीएमओ कार्यालय के आई रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ मोहम्मद अली की सेवानिवृत्ति दिसंबर में होना पहले से ही तय थी, बावजूद इसके सदर अस्पताल के एकमात्र आई स्पेशलिस्ट लेडी डॉक्टर का ट्रांसफर पटना कर दिया गया. उनका स्थानांतरण मोहम्मद अली के रिटायर होने के दिसंबर महीने में ही किया गया है. स्थानांतरण होने के बाद उन्हें यहां से विरमित भी कर दिया गया. जबकि सदर अस्पताल की अधीक्षक से लेकर सिविल सर्जन तक को पता था कि डॉ मो अली का रिटायरमेंट दिसंबर महीने में ही होना है. आई स्पेशलिस्ट महिला चिकित्सक डॉ मो अली के रिटायर होने के कुछ दिन पहले ही यहां से पटना चली गयी.नहीं हो रहा है मोतियाबिंद का ऑपरेशन : आंख रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण सदर अस्पताल की ओपीडी में आंख रोग के इलाज की सेवा तो बंद है ही, इसके साथ ही साथ यहां होने वाला मोतियाबिंद ऑपरेशन भी बंद है, क्योंकि आंख रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है इसलिए किसी मरीज के आंख की जांच कर उनमें मोतियाबिंद है और अगर है तो किस पोजीशन में है उसका ऑपरेशन हो सकता है या नहीं, यह बताने वाला भी कोई नहीं है. कुछ संगठनों द्वारा कई बार कई जगहों पर मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए कैंप लगाया जाता है किंतु जब बुजुर्ग या किसी रोगी को यह पता ही नहीं होगा कि उनमें मोतियाबिंद है और है तो किस पॉजीशन में है उसका ऑपरेशन हो सकता है या नहीं तो कैंप में कोई चिकित्सक अचानक किसी का ऑपरेशन कैसे कर देगा. वैसे मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए किसी संगठन के सहयोग से सदर अस्पताल के आंख रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की सहायता से ही कैंप लगाया जाता था.एकमात्र टेक्नीशियन बचे हैं आई विभाग में : सदर अस्पताल जहानाबाद के आई विभाग में अब मात्र एक आई टेक्नीशियन बच गये हैं. इसके अलावा और कोई कर्मचारी आई विभाग में नहीं है. टेक्नीशियन का काम आई विभाग में मरीज के आंख में लगने वाले उपयुक्त नंबर के चश्मे की जांच करना है. किंतु जब कोई चिकित्सक ही नहीं है और पर्ची ही न ही कट रही है तो टेक्नीशियन मरीज के लिए उपयुक्त चश्मे की जांच कैसे करेंगे. अब सदर अस्पताल में कोई भी मरीज अपना चश्मा भी जांच नहीं कर पा रहे हैं. एक और आई टेक्नीशियन भी दिसंबर माह में ही सेवानिवृत हो गये हैं. संजीव कुमार नामक उक्त आई टेक्नीशियन का रिटायरमेंट भी डॉ मो अली के साथ ही दिसंबर को हो गया है.क्या कहते हैं अधिकारीसदर अस्पताल में फिलहाल आंख रोग विशेषज्ञ कोई चिकित्सक नहीं हैं, जिसके कारण आंख के रोगियों का इलाज नहीं हो पा रहा है. एसीएमओ कार्यालय के आई स्पेशलिस्ट की सेवानिवृत्ति के बाद विभाग द्वारा नये आंख रोग विशेषज्ञ डॉक्टर को नहीं भेजा गया है.

डॉ प्रमोद कुमार, प्रभारी अधीक्षक, सदर अस्पताल, जहानाबाद

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