जहानाबाद में निर्जला एकादशी पर ठाकुरवाड़ी में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने किया संगम स्नान
निर्जला एकादशी के अवसर पर काको पणिहास में स्नान करते श्रद्धालु
Jehanabad Nirjala Ekadashi : निर्जला (भीमसेनी) एकादशी के अवसर पर जहानाबाद के दरधा-जमुना संगम तट और ठाकुरवाड़ी विष्णु मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान व पूजा-अर्चना की. श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु के दर्शन कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की.
जहानाबाद से संजय अनुराग की रिपोर्ट
Jehanabad Nirjala Ekadashi : निर्जला (भीमसेनी) एकादशी के अवसर पर गुरुवार को जहानाबाद शहर के दरधा-जमुना संगम तट पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. अहले सुबह से ही संगम तट और ठाकुरबाड़ी स्थित भगवान विष्णु मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं. श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की.
विभिन्न घाटों और मंदिरों में रही श्रद्धालुओं की भीड़
निर्जला एकादशी के अवसर पर दरधा-जमुना संगम तट के अलावा काको पणिहास, धराउत चंद्रपोखर, दक्षिणी तालाब, सूइयां घाट, कन्नौदी तालाब समेत विभिन्न नदियों, तालाबों और पोखरों पर भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. स्नान के बाद लोगों ने विष्णु मंदिर, देवी मंदिर और शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित किया.
गौचानी देवी मंदिर में भी उमड़ी आस्था
शहर स्थित गौचानी देवी मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ देखी गई. श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-पाठ कर परिवार की खुशहाली और जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना की.
वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में एक
पुरोहित पंडित राजू शास्त्री ने बताया कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला या भीमसेनी एकादशी कहा जाता है. यह वर्ष में एक बार आने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है. उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु पूरे वर्ष की 24 एकादशियों का व्रत नहीं कर पाते हैं, वे यदि श्रद्धापूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं तो उन्हें सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है.
दान-पुण्य और जल सेवा का विशेष महत्व
पंडित राजू शास्त्री ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित कर विधिवत पूजा करनी चाहिए. साथ ही दान-पुण्य, ब्राह्मण सेवा और प्यासे लोगों को जल पिलाने का विशेष महत्व है. ऐसा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
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लेखक के बारे में
By Nikhil Anurag
मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.
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