अरवल में NH-139 किनारे धर्मकांटों पर ‘बालू कटौती’ का खेल! अवैध बिक्री से सरकार को लाखों के नुकसान की आशंका

Edited by Nikhil Anurag
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बालू उत्खनन कार्य

Arwal News: अरवल जिले में एनएच-139 किनारे संचालित धर्मकांटों पर ट्रकों से अतिरिक्त बालू उतरवाकर रात में ट्रैक्टरों के जरिए बेचने के आरोप लगे हैं. स्थानीय लोगों ने सरकार को लाखों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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कलेर (अरवल) से अंजनी कुमार की रिपोर्ट
Arwal News: अरवल जिले में एनएच-139 के किनारे कलेर से अरवल तक संचालित करीब एक दर्जन धर्मकांटे इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि इन धर्मकांटों पर केवल मालवाहक वाहनों की तौल ही नहीं होती, बल्कि बालू लदे ट्रकों की भी नियमित जांच और तौल की जाती है. आरोप है कि निर्धारित मात्रा से अधिक बालू मिलने पर उसे वहीं उतरवा लिया जाता है और बाद में उसी बालू को रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों के माध्यम से बेचा जाता है.

प्रतिदिन दर्जनों ट्रकों की होती है तौल

स्थानीय लोगों के अनुसार प्रत्येक धर्मकांटे पर प्रतिदिन दो से तीन दर्जन बालू लदे ट्रकों की तौल होती है. तौल के दौरान ट्रकों से निकाले गए अतिरिक्त बालू का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता. आरोप है कि यही बालू रात के समय ट्रैक्टरों पर लादकर आसपास के इलाकों में बेची जाती है. यदि आरोप सही साबित होते हैं तो इससे सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है.

लंबे समय से चल रहा है कथित खेल

लोगों का कहना है कि यह कथित अवैध कारोबार कोई नया मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय से जारी है. कलेर से लेकर अरवल तक एनएच-139 किनारे स्थित कई धर्मकांटों पर इस तरह की गतिविधियों की चर्चा आम है. इसके बावजूद अब तक किसी बड़े स्तर पर जांच या कार्रवाई नहीं होने से लोगों में सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

अतिरिक्त बालू का हिसाब कौन रख रहा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बालू ट्रकों से उतारी जाती है, तो उसका रिकॉर्ड किसके पास है और वह बालू आखिर कहां जाती है. यह एक महत्वपूर्ण सवाल है, जिसका जवाब संबंधित विभागों को देना चाहिए. लोगों का आरोप है कि अतिरिक्त बालू की निकासी और बिक्री की निगरानी नहीं होने से अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है.

क्या कहते हैं जिला खनन पदाधिकारी

इस संबंध में जिला खनन पदाधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि धर्मकांटों के लाइसेंस संबंधी जानकारी माप-तौल विभाग से प्राप्त की जानी चाहिए, क्योंकि लाइसेंस जारी करने की जिम्मेदारी उसी विभाग की है. अतिरिक्त बालू की बिक्री के आरोपों पर उन्होंने कहा कि पहले यह जांच की जाएगी कि संबंधित बालू वैध है या अवैध. यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

जांच की मांग तेज

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि धर्मकांटों पर ट्रकों से उतारी जा रही अतिरिक्त बालू का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है और इससे सरकार को हो रहे संभावित राजस्व नुकसान की वास्तविक स्थिति क्या है.

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Nikhil Anurag

लेखक के बारे में

By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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