जहानाबाद के मोरहर नदी को कूड़ाघर बना रहे व्यवसायी, पुल के पांच दर जाम होने के करीब, जुर्माने के बावजूद नहीं रुक रही लापरवाही

मोरहर नदी पर जमा कूड़ा
Jehanabad Morhar River : जहानाबाद के शकूराबाद में व्यवसायियों द्वारा मोरहर नदी में लगातार कूड़ा-कचरा और मलबा फेंके जाने से नदी का अतिक्रमण बढ़ गया है. पुल के पांच दर बंद होने की कगार पर हैं, जिससे बरसात में बाढ़ और आवागमन बाधित होने का खतरा गहरा गया है. प्रशासन से कार्रवाई की मांग तेज हो गई है.
रतनी (जहानाबाद) से अविनाश कुमार की रिपोर्ट
Jehanabad Morhar River : सरकार जहां नमामि गंगे अभियान के तहत नदियों की सफाई और संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं जहानाबाद से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित शकूराबाद बाजार में मोरहर नदी में खुलेआम कूड़ा-कचरा फेंके जाने से नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाजार के व्यवसायी दिन-रात नदी में कचरा, मलबा और अन्य अपशिष्ट डाल रहे हैं, जिससे पुल के नीचे बने छह दरों में से लगभग पांच दर बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं.
पुल के नीचे तेजी से भर रहा कचरा
शकूराबाद बस पड़ाव के समीप मोरहर नदी पर बने पुल के नीचे ठेला, बोरी और अन्य साधनों से कूड़ा-कचरा तथा पुराने मकानों का मलबा फेंका जा रहा है. लोगों का कहना है कि यह सिलसिला लंबे समय से जारी है. लगातार जमा हो रहे कचरे के कारण पुल के दरों में पानी के बहाव की क्षमता घटती जा रही है.
बरसात में बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा
स्थानीय निवासियों के अनुसार, बरसात के दिनों में मोरहर नदी उफान पर रहती है और कई बार पुल के ऊपर से तीन फीट तक पानी बह चुका है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है. यदि समय रहते कचरा फेंकने पर रोक नहीं लगी तो आने वाले दिनों में पुल के सभी दर बंद हो सकते हैं और शकूराबाद क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा.
पहले भी लिया गया था जुर्माना लगाने का निर्णय
गत वर्ष स्वच्छता को लेकर आयोजित बैठक में नदी में कचरा फेंकने वालों पर 500 रुपये जुर्माना लगाने और निगरानी टीम गठित करने का निर्णय लिया गया था. उस समय जेसीबी से नदी की सफाई भी कराई गई थी, लेकिन बाद में निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं रही और फिर से कचरा डालने का सिलसिला शुरू हो गया.
नदी से हजारों एकड़ भूमि होती है सिंचित
मोरहर नदी से इलाके की हजारों एकड़ कृषि भूमि सिंचित होती है. ग्रामीणों का कहना है कि लगातार अतिक्रमण और गाद भरने से नदी संकरी होती जा रही है, जिससे बाढ़ के समय पानी तेजी से खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में फैलता है.
कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय लोगों ने बताया कि तीन वर्ष पहले अदालत ने मोरहर नदी की गाद उड़ाही और पूर्वी तट पर सड़क निर्माण के लिए बाढ़ एवं जल निकासी प्रमंडल, एकंगरसराय को कार्रवाई का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर नदी में कचरा फेंकने पर रोक लगाने और मोरहर नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है.
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लेखक के बारे में
By निखिल अनुराग
मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.
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