किंजर. पितृपक्ष मेले की शुरुआत के साथ ही किंजर स्थित पुनपुन नदी घाट पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया. अहले सुबह से ही नेपाल, भूटान, उड़ीसा, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली समेत देश-विदेश के कोने-कोने से आये हजारों पिंडदानी अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रथम पिंडदान की प्रक्रिया में जुटे रहे. सैकड़ों की संख्या में आये श्रद्धालु अपने परिवार के साथ चार-चक्का वाहनों में पहुंचे. किंजर सूर्य मंदिर परिसर, सरकारी अस्पताल, और एनएच-33 वाहनों से भर गया. भीड़ को नियंत्रित करने में किंजर थाना पुलिस सक्रिय रही, परंतु यातायात व्यवस्था चरमरायी. पंडित राजेश मिश्रा के अनुसार, शास्त्रों में पुनपुन नदी में प्रथम पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि भगवान श्रीराम और माता सीता ने भी यहीं से पिंडदान की शुरुआत की थी. जहां एक ओर पटना जिले के पुनपुन घाट पर सरकार द्वारा व्यापक व्यवस्था की गयी है, वहीं किंजर घाट पर एसडीआरएफ, बैरिकेडिंग, शौचालय, जल प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव दिखा. बाहर से आये पिंडदानियों ने खुले तौर पर नाराज़गी जतायी और प्रशासनिक अनदेखी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. किंजर पुलिस थाना प्रभारी दरबारी चौधरी व टीम ने एनएच-33 पर ट्रैफिक नियंत्रण एवं घाट की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. श्रद्धालु पुलिस की तत्परता से संतुष्ट दिखे. वहीं मेले में नाईयों की भारी आमदनी हुई. एक-एक नाई ने दिनभर में 1000 तक कमाए. फूल, माला, पान, तिल और पूजन सामग्री की दुकानों पर भी जमकर बिक्री हुई. वहीं नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ होने के बावजूद एसडीआरएफ या स्थानीय गोताखोरों की तैनाती नहीं की गयी, जिससे श्रद्धालु डर-डरकर स्नान करते दिखे. प्रशासन की यह चूक खतरनाक साबित हो सकती थी.
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