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Jehanabad : गया के बाद जहानाबाद बना मगध का दूसरा तिलकुट हब

Updated at : 04 Jan 2026 10:56 PM (IST)
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Jehanabad : गया के बाद जहानाबाद बना मगध का दूसरा तिलकुट हब

मगध क्षेत्र में गया जिले के बाद अब जहानाबाद जिला तिलकुट उत्पादन का दूसरा बड़ा केंद्र बनकर उभर चुका है. कभी जहानाबाद में अच्छी गुणवत्ता का तिलकुट गया से मंगाया जाता था

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जहानाबाद. मगध क्षेत्र में गया जिले के बाद अब जहानाबाद जिला तिलकुट उत्पादन का दूसरा बड़ा केंद्र बनकर उभर चुका है. कभी जहानाबाद में अच्छी गुणवत्ता का तिलकुट गया से मंगाया जाता था, लेकिन अब यहां तैयार होने वाला तिलकुट बिहार के कई जिलों के साथ-साथ झारखंड और नेपाल तक भेजा जा रहा है. बिहार के पटना, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, अरवल, भोजपुर, औरंगाबाद और बिहार शरीफ सहित कई जिलों में जहानाबाद का तिलकुट नियमित रूप से सप्लाई किया जा रहा है. वहीं झारखंड के हजारीबाग, रांची, रामगढ़, जमशेदपुर (टाटा), गुमला, पलामू समेत अन्य जिलों में भी इसकी अच्छी खासी मांग है. तिलकुट निर्माताओं के अनुसार झारखंड जाने वाली बसों के माध्यम से तिलकुट की सप्लाई की जाती है, जिससे भाड़े में काफी बचत होती है. जहानाबाद से होकर झारखंड के विभिन्न जिलों में जाने वाली बसों के कंडक्टर के जरिए कम लागत में तिलकुट के कार्टन वहां तक पहुंचा दिए जाते हैं. बताया जाता है कि पहले जब जहानाबाद के लोग अपने सगे-संबंधियों के यहां झारखंड जाते थे, तो संदेश के रूप में यहां का बना तिलकुट ले जाते थे। वहां इसकी गुणवत्ता की काफी सराहना हुई और धीरे-धीरे अधिक मात्रा में तिलकुट की मांग शुरू हो गयी. इसी मांग को पूरा करने के लिए बसों के माध्यम से तिलकुट भेजा जाने लगा. झारखंड में बसे जहानाबाद के कई लोगों ने वहां तिलकुट का व्यवसाय भी शुरू कर दिया। जैसे-जैसे मांग बढ़ी, वैसे-वैसे जहानाबाद में तिलकुट का उत्पादन भी तेज़ी से बढ़ने लगा. अब स्थिति यह है कि मकर संक्रांति का मौसम शुरू होते ही जहानाबाद तिलकुट उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन जाता है. इन उत्पादन केंद्रों में दिन-रात तिलकुट की कुटाई होती है. 24 घंटे उत्पादन के कारण मजदूरों की मांग भी काफी बढ़ गयी है. मकर संक्रांति नजदीक आते ही शहर में मिनी तिलकुट फैक्ट्रियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है. झारखंड के व्यापारी स्वयं जहानाबाद पहुंचकर तिलकुट की गुणवत्ता जांचते हैं और रेट तय करते हैं. इस तरह जहानाबाद जिले में तिलकुट का यह कुटीर उद्योग तेजी से फल-फूल रहा है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का मजबूत जरिया बनता जा रहा है. वहीं जहानाबाद जिले में उत्पादित खोवा और केसर वाले तिलकुट की भी बिहार के अन्य जिले और झारखंड में अच्छी खासी डिमांड है. क्योंकि दूसरे जिले और झारखंड में थोड़ा बहुत जो तिलकुट का उत्पादन होता है उसमें खोवा भरकर और केसर वाले तिलकुट का उत्पादन नहीं किया जाता. ऐसे में लोग इस तरह का तिलकुट गया जिले और जहानाबाद जिले से मंगवाते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MINTU KUMAR

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By MINTU KUMAR

MINTU KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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