आरोप . मूक बधिर नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का मामला
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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पीएचसी के डॉक्टर पर प्राथमिकी मूक बधिर एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में डॉक्टर पर केस दर्ज किया गया है. 33 माह पूर्व घोसी थाना क्षेत्र के मुड़ला बिगहा में यह घटना हुई थी. महिला थानाध्यक्ष ने नगर थाने में एफआइआर दर्ज करायी है. इसके साथ ही मामले […]
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पीएचसी के डॉक्टर पर प्राथमिकी
मूक बधिर एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में डॉक्टर पर केस दर्ज किया गया है. 33 माह पूर्व घोसी थाना क्षेत्र के मुड़ला बिगहा में यह घटना हुई थी. महिला थानाध्यक्ष ने नगर थाने में एफआइआर दर्ज करायी है.
इसके साथ ही मामले का दोबारा अनुसंधान शुरू किया गया है.
आरोपित डॉक्टर अरवल जिले के करपी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित हैं और जहानाबाद शहर में निजी क्लिनिक का संचालन करते हैं. मेडिकल जांच के क्रम में पीड़िता को बदनीयति एवं मनमाने ढंग से जांच रिपोर्ट दी गयी और इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी गयी. प्राथमिकी में कहा गया है कि डॉक्टर की वैधानिक जवाबदेही एवं गलत मंशा के कारण ऐसा हुआ है.
जहानाबाद : 33 माह पूर्व मूक बधिर एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के एक मामले में जान बूझ कर महत्वपूर्ण साक्ष्य को दबाने और नष्ट करने के आरोप में एक डॉक्टर पर नगर थाने में एफआइआर दर्ज की गयी है. महिला थानाध्यक्ष कुसुम भारती ने मेडिको लीगल घटना की श्रेणी के इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. फिर तीन जून, 2013 को पीड़ित लड़की के पिता के आवेदन पर घोषी थाने में कांड संख्या 114/13 के तहत मामला दर्ज हुआ.
मामले का अनुसंधान कर चिकित्सक की सूचना के अभाव में धारा 354(ए)(वन) के तहत अभियुक्त रामस्वरूप यादव के विरुद्ध आरोपपत्र समर्पित किया गया. खबर के अनुसार पीड़ित लड़की के पिता ने अपनी पुत्री के साथ हुए अत्याचार के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों, महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग के पास गुहार लगायी थी. अनुसंधान में लड़की की मेडिकल जांच सदर अस्पताल में करायी गयी, जिसकी रिपोर्ट में साक्ष्य का अभाव पाया गया.
प्राथमिकी में कहा गया है कि डॉक्टर की वैधानिक जवाबदेही एवं गलत मंशा के कारण ऐसा हुआ है. यह भी कहा गया है कि यह घटना मेडिको लीगल घटना की श्रेणी में है. इसमें पीड़िता की चिकित्सीय जांच के लिए महिला चिकित्सक की आवश्यकता है. एफआइआर में आरोप लगाया गया है कि डॉ कुमार के द्वारा निजी स्तर पर सिमटोमैटिक जांच करनी, महिला डॉक्टर को अग्रसारित नहीं करना और पुलिस को सूचित नहीं करना उपाधि प्राप्त एवं रजिस्टर्ड डॉक्टर की सेवा शर्तों के प्रतिकूल कार्यशौली को दरसाता है.
इस कारण पीड़िता के बदन पर शारीरिक शोषण से संबंधित पाये जानेवाले जख्म की जांच सक्षम महिला डॉक्टर से नहीं हो सकी. डॉक्टर पर महत्वपूर्ण साक्ष्य को दबाना, नष्ट करना और पुलिस को भी भ्रमित करने का आरोप है. नगर थाने में डॉक्टर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस अागे की कार्रवाई कर रही है.
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