आखिर कब चालू होगा सदर अस्पताल का आइसीयू
Updated at : 12 Sep 2019 4:15 AM (IST)
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जहानाबाद : सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को दुरुस्त करने के लिए कई योजनाओं को धरातल पर लाया है. मरीजों को मुफ्त में दवा देने के साथ-साथ तमाम तरह की समस्याओं का निराकरण भी किया है. सूबे के कई जिलों के अस्पताल जहां चकचक हैं, वहीं कभी सूबे भर में अव्वल आने वाला जहानाबाद का सदर […]
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जहानाबाद : सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को दुरुस्त करने के लिए कई योजनाओं को धरातल पर लाया है. मरीजों को मुफ्त में दवा देने के साथ-साथ तमाम तरह की समस्याओं का निराकरण भी किया है.
सूबे के कई जिलों के अस्पताल जहां चकचक हैं, वहीं कभी सूबे भर में अव्वल आने वाला जहानाबाद का सदर अस्पताल आज कई समस्याओं से जूझ रहा है. लंबे समय से खींची चली आ रही आइसीयू की समस्या का समाधान निकालने में शायद किसी की दिलचस्पी नहीं दिख रही.
हर कोई बस अपनी नौकरी करने में लगा है. सदर अस्पताल में 2009-10 में आइसीयू का निर्माण हुआ था, लेकिन विशेषज्ञ कर्मियों और चिकित्सकों की कमी के कारण आइसीयू अब तक चालू नहीं हो सका है. वहां लगे उपकरण भी अब दम तोड़ने लगे हैं.
तमाम अखबारों में खबरें लगातार लिखी जाती रही हैं, लेकिन कोई असर नहीं हुआ. बीते एक दशक में भी आइसीयू चालू नहीं हो सका है. गंभीर बीमारियों का इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को तत्काल रेफर करने में ही अस्पताल प्रबंधक अपनी सलामती समझता रहा है. जिस आइसीयू का इस्तेमाल जीवन और मौत से जूझ रहे मरीजों के लिए करना था.
आज वह सिर्फ ओटी रूम बनकर रह गया है. वहीं 300 बेड वाला यह प्रस्तावित अस्पताल भवन में महज 100 बेड भी बमुश्किल सलामत होंगे. कभी-कभार तो मरीजों की लंबी कतारों के कारण मरीज फर्श पर भी लेटे देखे जा सकते हैं. समस्याओं को दुरुस्त करने के बजाय अस्पताल में भी समस्याएं पाली जा रही हैं.
ओपीडी में इलाज के नाम पर हो रही खानापूर्ति : सदर अस्पताल के ओपीडी में इलाज के नाम पर खानापूर्ति होती रही है. एक तरफ जहां रजिस्ट्रेशन कराने के लिए मरीजों को घंटों जद्दोजहद करना पड़ता है, वहीं चिकित्सकों द्वारा न तो बीमार मरीजों को आला लगाया जाता है और न ही उनका नब्ज टटोला जाता है. सिर्फ मर्ज पूछकर ही अस्पताल में दवाएं लिखी जाती हैं.
दवाओं के लिए भी मरीजों को घंटों लंबी लाइनों में लगनी पड़ती है जिसके बाद कुछ दवाएं तो मुफ्त में मिलती है. वहीं बाकी की दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ती है. सुकून देने वाली बात सिर्फ एक यही है कि बंद पड़ा सदर अस्पताल का अल्ट्रासाउंड अब चालू हो गया है. मरीजों की अधिक संख्या रहने के कारण ओपीडी में मरीजों का सही से इलाज भी नहीं हो पाता. हर रोज करीब 700 से अधिक मरीज अस्पताल पहुंचते हैं.
आइसीयू को सुचारु करने के लिए कई बार विभाग से भी पत्राचार किया गया है. आइसीयू के लिए कर्मियों और चिकित्सकों का अभाव है. विशेषज्ञ डॉक्टरों के सहारे ही आइसीयू का संचालन संभव है जिसकी मांग सरकार से की जा रही है.
विजय कुमार सिन्हा, सिविल सर्जन, जहानाबाद
एक डॉक्टर करते हैं 100 से अधिक मरीजों का इलाज
कुशल कर्मी और चिकित्सकों की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक डॉक्टर के हवाले होते हैं 100 मरीज. जिनका उपचार के लिए भी ओपीडी में समय निर्धारित है.
नियत समय के अंदर एक चिकित्सक 100 मरीजों का कैसे करते हैं इलाज, हम और आप अनुमान ही लगा सकते हैं. भीड़ के कारण डॉक्टर भी तेजी से मरीजों को देखकर काम तमाम करते रहे हैं जिसके कारण आमजनों को अस्पताल का पूरा-पूरा लाभ नहीं मिल पाता है.
भीड़ के कारण ही आज भी शहरी और ग्रामीण इलाकों में चिकित्सकों के पास शुल्क देकर भी दिखाने के लिए लंबी कतार लगती है. इन निजी क्लिनिकों में मरीजों की मर्ज भले ही ठीक न हो, लेकिन डॉक्टर उन्हें आला लगाकर संतुष्ट करते हैं और भरपूर समय देकर उनकी परेशानियों को सुनते हैं.
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