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सुई-धागे से आत्मनिर्भरता की कहानी गढ़ रहीं हैं महिलाएं

Updated at : 15 Dec 2025 9:48 PM (IST)
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सुई-धागे से आत्मनिर्भरता की कहानी गढ़ रहीं हैं महिलाएं

भारत सरकार के कौशल विकास व उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा प्रायोजित जन शिक्षण संस्थान से जुड़कर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अब आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनने की दिशा में अग्रसर हो चली है.

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महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं निभा, हस्तनिर्मित वस्त्र बनी ग्राहकों की पहली पसंद

जमुई. भारत सरकार के कौशल विकास व उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा प्रायोजित जन शिक्षण संस्थान से जुड़कर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अब आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनने की दिशा में अग्रसर हो चली है. प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद इन प्रशिक्षुओं को भारत सरकार द्वारा अनुमोदित दक्षता प्रमाण-पत्र भी दिया जा रहा है. ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने व उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अलीगंज की निभा कुमारी सिलाई और वस्त्र निर्माण करने की ट्रेनिंग दे रही है. इस वस्त्र/परिधान के निर्माण प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की राह पकड़ ली है.

जिले के अलीगंज में सिलाई का प्रशिक्षण दे रही संस्थान की प्रशिक्षक निभा कुमारी बताती हैं कि इस प्रशिक्षण के तहत ग्रामीण महिलाएं लहंगा, बचों के कपड़े, स्कूल ड्रेस, फ्रॉक, पेटीकोट, ब्लाउज आदि का निर्माण करने में दक्ष हो रही हैं. प्रशिक्षण के साथ-साथ महिलाओं में आत्मविश्वास का भी संचार देखा जा रहा है. महिलाएं व युवतियां भी इस प्रशिक्षण में रुचि ले रही हैं. इनके बनाये हुए वस्त्र ग्राहकों की पहली पसंद बन रही है. संस्थान से प्रशिक्षित होकर महिलाएं अपने घरेलू कार्यों के साथ-साथ महीने की 5000 से 7000 रुपये की कमाई कर घर बैठे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं. प्रशिक्षक बताती हैं कि महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, वे स्वरोजगार से जुड़कर अपने घर को भी संभाल रही हैं. सामाजिक बंधनों के बावजूद ऐसे प्रशिक्षित महिलाओं को अपने हुनर व दृढ़ता से समाज के बदलाव व विकास की एक नयी कहानी गढ़ने में मदद करने वाली निभा कुमारी अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणापुंज बनी है.

कौशलपरक शिक्षा से आर्थिक सशक्त होंगी महिलाएं : निदेशक

बिहार जैसे राज्य में जहां नौकरी के अवसरों और उद्योगों की कमी है, ऐसे में कौशल दक्ष होकर स्वरोजगार के अवसर तलाशना और इसे जीविकोपार्जन का माध्यम बनाना एक बेहतर विकल्प है. प्रत्येक सत्र में 1800 युवक-युवती संस्थान से जुड़कर ब्यूटीशियन, सिलाई, फैशन ज्वेलरी निर्माण कंप्यूटर ट्रेनिंग आदि विभिन्न प्रकार के स्किल ट्रेनिंग प्राप्त कर स्वरोजगार से जुड़ रहे हैं. महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए कौशल परक शिक्षा समावेश सुनिश्चित हो, इस दिशा में हर संभव प्रयास जारी है.

अंशुमान, निदेशक, जन शिक्षण संस्थान जमुई

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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