चंद्रमंडीह. चकाई प्रखंड अंतर्गत चंद्रमंडीह पंचायत के असहना गांव में श्रीश्री 108 श्री राम चरित मानस नवाह परायण यज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं. साथ ही दिन भर वैदिक रीति से जारी यज्ञ के दौरान श्रद्धालु यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर अपने एवं अपने परिवार की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना कर रहे हैं. वहीं इस दौरान गुरुवार की रात्रि कथा के दौरान वृंदावन धाम से पधारी प्रसिद्ध कथा वाचिका राघव प्रिया ओझा ने श्रीराम जन्म की कथा एवं बाल रूप का वर्णन कर भक्तों को भाव विभोर कर दिया. श्रीराम जन्म की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि शादी के वर्षों बाद जब राजा दशरथ को कोई संतान नहीं हुआ तो उन्होंने अपने गुरु की आज्ञानुसार पुत्रेष्टि यज्ञ का आयोजन किया. यज्ञ की समाप्ति के बाद खीर रूपी प्रसाद को राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानियों को ग्रहण करने के लिए दिया. यज्ञ की महिमा एवं गुरु की कृपा से तीनों रानियों गर्भवती हो गईं. तत्पश्चात सबसे पहले महाराज दशरश की बड़ी रानी कौशल्या ने श्याम वर्ण एवं अलौकिक बालक को जन्म दिया. शिशु का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था. पुनः शुभ नक्षत्रों में कैकेयी और सुमित्रा ने भी अपने-अपने पुत्रों को जन्म दिया. महाराज के चारों पुत्रों के जन्म की सूचना मिलते ही संपूर्ण राज्य में आनंद का माहौल छा गया. इस खुशी में देवताओं ने पुष्प वर्षा कर सभी बालकों का स्वागत किया. कुछ दिनों के बाद नामकरण संस्कार को पूरा किया गया. महर्षि वशिष्ठ ने महाराज दशरथ के चारों पुत्रों का नाम क्रमशः राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखा. थोड़े से बड़े होने के बाद चारों की अठखेलियों से राजमहल में आनंद का माहौल कायम हो गया. जैसे-जैसे ये चारों बड़े होने लगे युवराज के संस्कारों की चर्चा चहुंओर होने लगी. श्रीराम अपने गुणों के कारण प्रजा के बीच बेहद लोकप्रिय होने लगे. विलक्षण प्रतिभा के कारण वे कम आयु में ही समस्त विषयों में पारंगत हो गए. मर्यादा के आवरण में ढके होने के कारण वे माता-पिता, गुरुजनों एवं प्रजाजनों के बेहद प्रिय हो गए. वहीं इस दौरान उनके द्वारा प्रस्तुत की गई भगवान श्रीराम के बाल लीलाओं का एक से बढ़कर एक गीतों ने उपस्थित लोगों को थिरकने के लिए मजबूर कर दिया. मौके पर मौके पर यज्ञाचार्य पंडित उमेश पांडेय सहित रावणेश्वर दास, आनंद मोहन राय, विनय कुमार राय, विनोद राय, अजय राय, मथुरा प्रसाद राय, शिवनंदन राय, शुकदेव राय, बुल्लू पांडेय, श्याम सुंदर राय, धनंजय राय, परमानंद यादव, दीनबंधु राय, मुरारी राम, परमानंद दास, हरिबोल दास सहित सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे.
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