टपकती छत के नीचे गुजर रही जिंदगी, दो साल से सरकारी आवास के इंतजार में विभा देवी का परिवार

टूटे कच्चे मकान पर पॉलिथीन डालकर रहने को मजबूर विभा देवी का परिवार.
Poor Family Plight: बारिश की हर बूंद जमुई के इस परिवार के लिए आफत बनकर गिरती है. पॉलिथीन से ढकी टूटी छत, जमीन पर सोते बच्चे और सरकारी मदद के इंतजार में बीतते दिन, व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहे हैं.
मुख्य बातें
- पॉलिथीन बनी छत, बारिश बनी मुसीबत
- सूरत में मजदूरी कर रहे पति, गांव में संघर्ष कर रही पत्नी
- एक चौकी पर आधा परिवार, बाकी जमीन पर गुजरती है रात
- दो साल से आवास योजना का इंतजार
बरहट, जमुई से शशिलाल की रिपोर्ट
Poor Family Plight: सरकारी योजनाओं के तहत हर गरीब को पक्का मकान उपलब्ध कराने के दावे लगातार किये जाते हैं, लेकिन जमुई जिले के बरहट प्रखंड की लखैय पंचायत के लकरा गांव में रहने वाली विभा देवी का परिवार इन दावों से अब भी कोसों दूर है. पिछले दो वर्षों से यह परिवार टूटे कच्चे मकान, टपकती छत और पॉलिथीन के सहारे जिंदगी गुजारने को मजबूर है. बरसात का मौसम आते ही उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं.
Poor Family Plight: पॉलिथीन बनी छत, बारिश बनी मुसीबत
लखैय पंचायत के वार्ड संख्या 10 स्थित लकरा गांव में विभा देवी का घर अब महज नाम का घर रह गया है. मिट्टी की दीवारों और जर्जर छप्पर के सहारे खड़ा यह मकान हर बारिश के साथ टूटने का डर पैदा करता है.
छत पर बिछाई गई पॉलिथीन तेज बारिश के सामने बेअसर साबित होती है और पानी सीधे कमरे के अंदर टपकने लगता है. ऐसे में पूरा परिवार रातभर जागकर किसी तरह सुबह होने का इंतजार करता है.
सूरत में मजदूरी कर रहे पति, गांव में संघर्ष कर रही पत्नी

परिवार के मुखिया दीपक राम रोजगार की तलाश में गुजरात के सूरत शहर में मजदूरी करते हैं. इधर गांव में उनकी पत्नी विभा देवी दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा और घरेलू काम करके छह बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं.
सीमित आय और बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी आसान नहीं है.
दो साल से आवास योजना का इंतजार
विभा देवी बताती हैं कि उन्होंने कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों से प्रधानमंत्री आवास योजना तथा मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की गुहार लगाई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है.
परिवार का राशन कार्ड तो बना है, लेकिन उसमें भी केवल दो सदस्यों का ही नाम दर्ज है. आयुष्मान भारत योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी परिवार तक नहीं पहुंच पाया है.
एक चौकी पर आधा परिवार, बाकी जमीन पर गुजरती है रात

घर में न अलग रसोई है और न ही सामान रखने की पर्याप्त जगह. जिस कमरे में खाना बनता है, उसी में बच्चे पढ़ाई करते हैं और रात होने पर वहीं सो जाते हैं.
पूरे घर में सोने के लिए केवल एक चौकी है. परिवार के कुछ सदस्य उसी पर सोते हैं, जबकि बाकी लोग जमीन पर बिस्तर बिछाकर रात गुजारते हैं. बरसात के दिनों में फर्श भी भीग जाता है, तब बच्चों को पड़ोसियों के यहां शरण लेनी पड़तीहै.
ग्रामीणों ने उठाये सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और आवास सहायकों से परिवार को आवास योजना का लाभ देने की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई.
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि सरकार हर पात्र परिवार को पक्का मकान देने का दावा करती है, तो फिर यह परिवार अब तक जर्जर घर में रहने को क्यों मजबूर है.
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बीडीओ ने आवंटन मिलने पर लाभ देने का दिया भरोसा
प्रखंड विकास पदाधिकारी एसके पांडेय ने बताया कि आवास योजना के लिए सर्वेक्षण कराया जा चुका है. फिलहाल नए आवंटन की प्रतीक्षा की जा रही है.
उन्होंने कहा कि जैसे ही आवंटन प्राप्त होगा, पात्र लाभुकों को प्राथमिकता के आधार पर योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा.
व्यवस्था के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल
बरसात के इस मौसम में विभा देवी का परिवार हर दिन डर और अनिश्चितता के बीच जीवन जी रहा है. सवाल यह है कि क्या सरकारी योजनाओं का लाभ समय रहते उन लोगों तक पहुंच पाएगा, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, या फिर यह परिवार भी लंबे इंतजार की सूची में शामिल रह जाएगा.
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