गिद्धौर . प्रखंड अंतर्गत बरनार नदी के मौरा निजुआरा बालू घाट पर मानक के विपरीत हो रहे खनन को लेकर क्षेत्र के किसानों में गहरा आक्रोश व्याप्त है. नदी बचाओ, पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने शनिवार देर संध्या घाट पर बैठक कर अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया. बैठक में मौरा, प्रधानचक, धोबघट, निजुआरा एवं तीलेर गांव के सैकड़ों किसान मौरा नदी के कोरिका स्थल पर एकत्र हुए. किसानों ने संवेदक की कार्यशैली पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि अनियमित बालू खनन से सिंचाई व्यवस्था बाधित होने के साथ-साथ सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि के बंजर होने का खतरा उत्पन्न हो गया है. बैठक के दौरान किसानों ने जिला प्रशासन की कथित दमनकारी नीति के खिलाफ नारेबाजी भी की. किसानों का कहना है कि बालू खनन के निर्धारित मानकों की अनदेखी से भू-जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिससे आने वाले समय में सिंचाई के साथ-साथ पेयजल का भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है. बैठक में इन मुद्दों सहित कृषि हित से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गयी. बैठक के दौरान किसानों ने एक समिति गठित करने का भी निर्णय लिया, जो आगे आंदोलन की रणनीति तय करेगी. सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जब तक सरकारी मानक के अनुरूप बालू खनन नहीं किया जाता, तब तक संवैधानिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा. किसानों ने चेतावनी दी कि यदि मानक के विपरीत खनन पर अविलंब रोक नहीं लगी, तो 19 जनवरी से आमरण अनशन सहित अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जायेगा. बैठक में बाबू साहब सिंह, धनराज यादव, अवधेश सिंह, अशोक सिंह, शैलेंद्र कुमार सिंह उर्फ शैलेश सिंह, पूर्व मुखिया कांता प्रसाद सिंह, अनिल रावत, सचित रावत, कन्हैया झा, गिरीश झा, बबलू झा, दिगंबर झा, संजय सिंह, अजय सिंह सहित सैकड़ों किसान उपस्थित रहे.
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