शहीद एल. रंजन सिंह के 29वें स्मरणोत्सव पर दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, एसएसबी परिसर में आयोजित हुई परेड

Published by :Divyanshu Prashant
Published at :10 May 2026 10:40 AM (IST)
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शहीद एल. रंजन सिंह के 29वें स्मरणोत्सव पर दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, एसएसबी परिसर में आयोजित हुई परेड

एसएसबी परिसर में आयोजित स्मरण परेड

जमुई के पकरी स्थित 16वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल मुख्यालय में शहीद नायक एल. रंजन सिंह के 29वें स्मरणोत्सव पर भव्य परेड का आयोजन कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई. वर्ष 1997 में मणिपुर में ड्यूटी के दौरान वीरगति प्राप्त करने वाले शहीद के अदम्य साहस को नमन करते हुए कमांडेंट अनिल कुमार पठानिया ने उनके बलिदान को राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत बताया.

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जमुई: जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत पकरी स्थित 16वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) मुख्यालय में वीर शहीद नायक/जीडी एल. रंजन सिंह का 29वां स्मरणोत्सव दिवस अत्यंत सम्मान और गर्व के साथ मनाया गया. इस अवसर पर वाहिनी मुख्यालय में भव्य स्मरण परेड का आयोजन किया गया, जिसमें एसएसबी के अधिकारियों और जवानों ने शहीद की शहादत को नमन किया.

दो मिनट का मौन और अदम्य साहस को सलाम

समारोह के दौरान अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों और जवानों ने शहीद एल. रंजन सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. राष्ट्र के प्रति उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया. पूरा परिसर ‘भारत माता की जय’ और देशभक्ति की भावनाओं से ओतप्रोत नजर आया. जवानों ने शहीद की पावन स्मृति में सलामी दी और उनके दिखाए गए कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया.

1997 में मणिपुर ड्यूटी के दौरान हुए थे शहीद

एसएसबी के अधिकारियों ने शहीद के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 09 मई 1997 को मणिपुर और नागालैंड के डिविजनल मुख्यालय में ड्यूटी के दौरान अज्ञात हमलावरों ने एल. रंजन सिंह पर कायरतापूर्ण हमला कर दिया था. इस हमले में उन्होंने बहादुरी से मुकाबला करते हुए वीरगति प्राप्त की थी. उनके इस सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्र हमेशा याद रखेगा.

शहीद का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा: कमांडेंट

इस विशेष अवसर पर 16वीं वाहिनी के कमांडेंट अनिल कुमार पठानिया ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि शहीद एल. रंजन सिंह ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए प्राणों की आहुति दी थी. उनका यह बलिदान न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है. उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्र सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता और शहीद का साहस व समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा. कार्यक्रम का समापन शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित करने और देश की अखंडता की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ.

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