ePaper

कुकुरझप डैम में घटता जलस्तर बना चिंता का कारण, सिंचाई पर असर से किसान परेशान

Updated at : 15 Feb 2026 8:01 PM (IST)
विज्ञापन
कुकुरझप डैम में घटता जलस्तर बना चिंता का कारण, सिंचाई पर असर से किसान परेशान

प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा बरहट प्रखंड का कुकुरझप डैम इन दिनों घटते जलस्तर के कारण चर्चा में है. एक ओर इसे ‘मेरा प्रखंड, मेरा गौरव’ अभियान के तहत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग उठ रही है,

विज्ञापन

बरहट. प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा बरहट प्रखंड का कुकुरझप डैम इन दिनों घटते जलस्तर के कारण चर्चा में है. एक ओर इसे ‘मेरा प्रखंड, मेरा गौरव’ अभियान के तहत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर लगातार कम हो रहे पानी ने किसानों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है. डैम का जलस्तर घटने से जहां सैलानी भी निराश लौट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने से किसानों के सामने फसल बचाने का संकट खड़ा हो गया है.

मछली पालन व जल निकासी पर सवाल

स्थानीय किसानों में दिनेश कुमार यादव, नागेश्वर यादव, आनंदी यादव, दिनेश कोड़ा, उपेंद्र यादव व बब्लू यादव ने बताया कि डैम के एक हिस्से में संविदा पर मछली पालन का कार्य चल रहा है. किसानों का आरोप है कि मछली पालन के लिए डैम से लगातार पानी निकाला जा रहा है, जो छप्पर घुट्टू गांव स्थित पइन के रास्ते आंजन नदी में बहाया जा रहा है. किसानों का कहना है कि इससे सिंचाई व्यवस्था चरमरा गई है. खरीफ सीजन में धान की फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिला और अब रबी फसल की बुआई भी प्रभावित हो रही है.

सिंचाई की धुरी है डैम

तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, कुकुरझप डैम 82 वर्ग किलोमीटर के जलग्रहण क्षेत्र में फैला है. 518.3 मीटर लंबा और 7.5 मीटर चौड़ा यह बांध खरीफ में 6287 हेक्टेयर तथा रबी में 1750 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करने की क्षमता रखता है. लक्ष्मीपुर प्रखंड सहित दर्जनों गांवों की खेती इसी पर निर्भर है. इस वर्ष जलस्तर में आयी गिरावट के कारण खेतों तक समय पर पानी नहीं पहुंच पाया, जिससे उत्पादन घटने और किसानों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है.

गौरवशाली रहा है इतिहास

इस परियोजना की आधारशिला वर्ष 1976 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री व सांसद डीपी यादव की पहल पर रखी गयी थी. उस समय स्थानीय मुखिया शुक्रदास यादव ने दो पहाड़ों को काटकर डैम निर्माण की योजना सुझाई थी. सरकार की मंजूरी के बाद वर्ष 1995 में इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ. लंबे समय तक इस डैम ने क्षेत्र को पानी, पैदावार और आर्थिक मजबूती दी.

विभाग को भेजी गयी रिपोर्ट

इस संबंध में जल संसाधन विभाग की प्रमंडल पदाधिकारी पलक कुमारी ने बताया कि रबी फसल के लिए डैम से पानी छोड़ा गया था, लेकिन पानी आसपास के खेतों तक ही पहुंच सका. उन्होंने कहा कि सरकार के निर्देश पर मछली पालन का ठेका दिया गया है. फिलहाल, डैम का मेंटेनेंस कार्य चल रहा है तथा जलस्तर में कमी को लेकर विस्तृत रिपोर्ट विभाग को भेजी गयी है, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके.

विज्ञापन
PANKAJ KUMAR SINGH

लेखक के बारे में

By PANKAJ KUMAR SINGH

PANKAJ KUMAR SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन