इलाज के दौरान मूक-बधिर दिव्यांग महिला की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

Published by : PANKAJ KUMAR SINGH Updated At : 18 Feb 2026 9:27 PM

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जमुई सदर अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है. बुधवार की सुबह इलाज के दौरान एक 20 वर्षीय मुक-बधीर दिव्यांग महिला की मौत हो गयी.

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जमुई. जमुई सदर अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है. बुधवार की सुबह इलाज के दौरान एक 20 वर्षीय मुक-बधीर दिव्यांग महिला की मौत हो गयी. इसके बाद परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियों पर घोर लापरवाही और दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया. मृतक महिला की पहचान सदर थाना क्षेत्र के प्यारेपुर गांव निवासी रंजीत मांझी की 20 वर्षीय पत्नी सरस्वती देवी (20 वर्ष) के रूप में हुई है. दरअसल, सरस्वती देवी को बीते मंगलवार की शाम अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई थी. परिजन ने आनन-फानन में उसे सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड लाया गया. परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीज को देखने के बजाय लेबर रूम में जाने को कह दिया. जब वे मरीज को लेकर लेबर पहुंचे, तो वहां ड्यूटी पर तैनात कर्मियों ने उन्हें डांट-फटकार कर वापस इमरजेंसी भेज दिया. हम रात भर एक वार्ड से दूसरे वार्ड भटकते रहे. काफी हाथ-पैर जोड़ने पर लेबर रूम के कर्मियों ने दो सूई तो लगायी, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ. जब दोबारा गुहार लगायी, तो कर्मियों ने कहा कि बिना डॉक्टर के देखे कुछ नहीं करेंगे और हमें भगा दिया. बताते चलें कि लेबर रूम से महिला चिकित्सक रात्रि ड्यूटी से गायब थी.

10 दिन पहले ही बनी थी मां

घटना की सबसे हृदयविदारक कड़ी यह है कि सरस्वती देवी ने मात्र 10 दिन पूर्व ही एक बच्ची को जन्म दिया था. घर में नये सदस्य के आगमन की खुशियां मातम में बदल गयी. परिजनों का कहना है कि प्रसव के बाद वह स्वस्थ थी, लेकिन अचानक हुए सीने के दर्द और अस्पताल की कथित सुस्ती ने उसकी जान ले ली.

परिजनों ने किया हंगामा

बुधवार सुबह करीब 9:00 बजे महिला ने दम तोड़ दिया मौत की खबर मिलते ही परिजनों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. परिजनों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते वरिष्ठ डॉक्टर मरीज को देख लेते और सही इलाज मिल जाता, तो नवजात बच्ची के सिर से मां का साया नहीं उठता. परिजन द्वारा बताया गया है मृतक सरस्वती देवी और उसका पति दोनों मुक-बधीर दिव्यांग है.

कहते हैं इमरजेंसी के चिकित्सक

इमरजेंसी कक्ष में रात्रि ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ अमित कुमार ने बताया कि महिला के परिजन ने पेट दर्द और ब्लीडिंग होने की बात कही थी. इसलिए उसे लेबर रूम भेज दिया गया था.

लेबर रूम में एक महिला की मौत होने की जानकारी मिली है. मामले की जांच की जा रही है. इलाज में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों पर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.

डॉ अशोक कुमार सिंह, सिविल सर्जन, जमुईB

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